9/11 हमले के 25 साल बाद
अमेरिका में हुए 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले यानी 9/11 की घटना को 25 साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन इस हमले से जुड़े कई सवाल आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। अब एक नई जांच रिपोर्ट और पहले सार्वजनिक न की गई वीडियो फुटेज ने उमर अल-बायूमी नाम के संदिग्ध को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अल-बायूमी के संबंध अल-कायदा के भविष्य के नेता अनवर अल-अवलाकी और कुछ सऊदी अधिकारियों से होने के संकेत मिले हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि FBI के पास कथित तौर पर कुछ महत्वपूर्ण सुराग मौजूद होने के बावजूद इस दिशा में जांच आगे क्यों नहीं बढ़ी।
कौन है उमर अल-बायूमी?
उमर अल-बायूमी सऊदी अरब का नागरिक था, जो 1990 के दशक में अमेरिका के सैन डिएगो पहुंचा था। उसके मुताबिक वह अंग्रेजी सीखने के लिए अमेरिका आया था। बाद में वह धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा और अमेरिकी जांच एजेंसियों की नजर में भी आया।
9/11 हमले के बाद उसका नाम इसलिए महत्वपूर्ण हुआ क्योंकि उसका संबंध हमले में शामिल दो अपहरणकर्ताओं—नवाफ अल-हाजमी और खालिद अल-मिहधर—से जुड़ा बताया गया। दोनों उन 19 आतंकियों में शामिल थे जिन्होंने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में विमानों का अपहरण किया था।
अल-बायूमी ने हमेशा खुद को चरमपंथी या सऊदी जासूस बताए जाने से इनकार किया है। सऊदी अरब ने भी 9/11 हमले में अपनी सरकार या अधिकारियों की किसी भूमिका से इनकार किया है।
नई वीडियो फुटेज में क्या दिखा?
25 साल बाद सामने आई नई फुटेज इस मामले में सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में उमर अल-बायूमी को अनवर अल-अवलाकी के साथ देखा जा सकता है। दोनों सैन डिएगो के आसपास पेंटबॉल खेलते नजर आते हैं।
अनवर अल-अवलाकी बाद में अल-कायदा से जुड़ा एक प्रमुख चेहरा बना। इसी वजह से कई साल पुरानी इस फुटेज को जांच के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय कुछ लोग सैन्य शैली के कपड़े पहनकर पेंटबॉल खेल रहे थे और धार्मिक नारे भी लगाए गए थे।
हालांकि, केवल किसी व्यक्ति के साथ दिखाई देना अपने आप में आतंकवादी गतिविधि में शामिल होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। इस मामले में भी फुटेज को अन्य जांच सामग्री के साथ जोड़कर ही देखा जाना चाहिए।
FBI को कब मिला था यह वीडियो?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह फुटेज 9/11 हमलों के कुछ ही समय बाद अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के हाथ लगी थी। उस समय जांचकर्ता पहले से अल-बायूमी के संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल कर रहे थे।
बताया गया है कि FBI अधिकारियों को यह जानकारी भी दी गई थी कि कुछ पेंटबॉल गतिविधियों का इस्तेमाल कथित तौर पर जिहादी प्रशिक्षण के लिए किया जाता था। अनवर अल-अवलाकी के संपर्कों को देखते हुए अल-बायूमी के साथ उसके संबंधों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया था।
लेकिन अब सामने आए दस्तावेजों और वीडियो को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि उस समय उपलब्ध जानकारी को जांच में कितनी गंभीरता से आगे बढ़ाया गया।
सऊदी अधिकारियों से भी जुड़े थे संबंध
अल-बायूमी के मामले में केवल अल-कायदा कनेक्शन ही चर्चा का विषय नहीं है। जांच रिपोर्ट में उसके सऊदी अधिकारियों और धार्मिक मामलों से जुड़े लोगों के साथ संपर्क का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के भी इस पूरे नेटवर्क में संपर्क सामने आए। अमेरिकी अधिकारियों ने कथित तौर पर इन संबंधों को लेकर सऊदी पक्ष से पूछताछ की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
यही वजह है कि 9/11 के बाद से सऊदी कनेक्शन को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
9/11 के दो संदिग्धों से कैसे जुड़ा था अल-बायूमी?
अल-बायूमी का नाम उस समय और महत्वपूर्ण हो गया जब जांच में पता चला कि उसका नाम एक अपार्टमेंट के किराये के समझौते में आया था। यह अपार्टमेंट नवाफ अल-हाजमी और खालिद अल-मिहधर से संबंधित था।
दोनों बाद में 9/11 हमले में शामिल पाए गए। रिपोर्टों के अनुसार, अल-बायूमी ने दोनों को अमेरिका में शुरुआती दौर में सहायता उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई हो सकती है। हालांकि उसकी ओर से हमले में जानबूझकर मदद करने के आरोपों से इनकार किया गया है।
यही वह कड़ी है जिसकी वजह से अमेरिकी जांच एजेंसियां उसके संपर्कों को लेकर लंबे समय तक सवाल उठाती रही हैं।
ब्रिटेन में गिरफ्तारी के बाद क्या मिला?
9/11 हमले के कुछ दिनों बाद अल-बायूमी ब्रिटेन के बर्मिंघम चला गया था। 21 सितंबर 2001 को ब्रिटिश पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज, तस्वीरें और वीडियो टेप बरामद किए गए। इन्हीं सामग्री में एक नोटबुक का पन्ना भी शामिल था, जिसमें विमान का स्केच और उससे संबंधित कुछ गणनाएं दर्ज होने की बात सामने आई।
पीड़ित परिवारों से जुड़े वकीलों ने इस सामग्री को संभावित रूप से महत्वपूर्ण बताया। रिपोर्ट के अनुसार, विमान के स्केच की कॉपी FBI अधिकारियों तक भी पहुंची थी।
फिर FBI ने जांच आगे क्यों नहीं बढ़ाई?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश पुलिस से बरामद सामग्री हासिल करने के लिए सैन डिएगो स्थित FBI अधिकारियों ने कई बार प्रयास किया। लेकिन जांच से जुड़े अधिकारियों को सभी सामग्री समय पर नहीं मिल पाई।
कुछ पूर्व अधिकारियों का मानना है कि यदि ये सुराग जांचकर्ताओं को उसी समय पूरी तरह उपलब्ध हो जाते, तो अल-बायूमी के संपर्कों और 9/11 के अपहरणकर्ताओं के बीच संबंधों की कड़ियों को पहले जोड़ा जा सकता था।
हालांकि, इससे यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि FBI ने जानबूझकर 9/11 की साजिश को छिपाया।
उपलब्ध रिपोर्ट मुख्य रूप से जांच में संभावित चूक, सूचनाओं के आदान-प्रदान की कमी और
सुरागों के पर्याप्त तरीके से आगे न बढ़ने पर सवाल उठाती है।
क्या उमर अल-बायूमी पर कभी आरोप लगा?
नहीं। उमर अल-बायूमी पर 9/11 हमले में भूमिका को लेकर कोई आपराधिक आरोप तय नहीं हुआ।
उसने लगातार किसी भी आतंकी गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया है।
इसी तरह सऊदी अरब ने भी 9/11 हमले में अपनी सरकार या आधिकारिक तंत्र की
भूमिका से इनकार किया है। इसलिए अल-बायूमी से जुड़े नए खुलासों को आरोप और जांच
संबंधी दावों के रूप में देखना जरूरी है, न कि किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के तौर पर।
25 साल बाद भी क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
9/11 हमले में करीब 3,000 लोगों की जान गई थी और इसने पूरी दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था बदल दी।
अमेरिका ने इसके बाद आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान शुरू किया।
इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों का एक वर्ग यह जानना चाहता है कि
हमले के पीछे मौजूद हर व्यक्ति और हर
संभावित मददगार की भूमिका पूरी तरह सामने आए। हाल के वर्षों में सामने आए रिकॉर्ड और दस्तावेजों ने
खासकर सऊदी नागरिकों और अधिकारियों से जुड़े पुराने सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
नई जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सवाल उठाती है कि
अमेरिकी एजेंसियों के पास उस समय कौन-कौन से सुराग थे और अलग-अलग
देशों की जांच एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान कितना प्रभावी था।
क्या इसका मतलब 9/11 में सऊदी सरकार की भूमिका साबित हो गई?
ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा।
नई रिपोर्ट में उमर अल-बायूमी के कथित सऊदी संपर्कों और अल-कायदा से जुड़े लोगों के
साथ उसके संबंधों पर सवाल उठाए गए हैं। लेकिन किसी व्यक्ति के संबंधों या
संपर्कों से सीधे तौर पर पूरी सऊदी सरकार की संलिप्तता साबित नहीं होती।
सऊदी अरब लंबे समय से ऐसे आरोपों से इनकार करता रहा है।
9/11 से संबंधित आधिकारिक जांचों में भी सऊदी सरकार की
संस्थागत भूमिका को लेकर अलग-अलग स्तर पर निष्कर्ष सामने आए हैं। इसलिए इस मुद्दे पर तथ्य,
आरोप और राजनीतिक दावों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
9/11 हमले के 25 साल बाद उमर अल-बायूमी से जुड़ी नई वीडियो फुटेज और पुराने
जांच रिकॉर्ड ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अल-बायूमी के
अनवर अल-अवलाकी से संपर्क, सऊदी अधिकारियों से कथित संबंध, 9/11 के दो अपहरणकर्ताओं से
उसका जुड़ाव और ब्रिटेन में बरामद सामग्री—ये सभी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण कड़ियां रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि उस समय उपलब्ध संभावित सुरागों को पूरी तरह जोड़ने में
अमेरिकी जांच एजेंसियां क्यों सफल नहीं हुईं। हालांकि, मौजूदा जानकारी के आधार पर अल-बायूमी या सऊदी
सरकार को 9/11 की साजिश के लिए दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। आगे सामने
आने वाले दस्तावेज और आधिकारिक जांच ही इन सवालों पर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर दे सकते हैं।
FAQ
1. उमर अल-बायूमी कौन था?
उमर अल-बायूमी सऊदी नागरिक था, जो 1990 के दशक में अमेरिका आया था।
9/11 हमले के बाद उसका नाम हमले में शामिल दो अपहरणकर्ताओं से संपर्क के कारण जांच में आया।
2. उमर अल-बायूमी का अल-कायदा से क्या कनेक्शन बताया गया है?
नई रिपोर्ट में उसके अनवर अल-अवलाकी के साथ संपर्क और पेंटबॉल गतिविधियों की वीडियो का उल्लेख है।
हालांकि, यह अपने आप में 9/11 की साजिश में उसकी भूमिका का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
3. क्या उमर अल-बायूमी पर 9/11 हमले का आरोप लगा था?
उस पर 9/11 हमले में कोई आपराधिक आरोप तय नहीं हुआ।
वह आतंकी गतिविधियों में अपनी भूमिका से इनकार करता रहा है।
4. क्या सऊदी सरकार 9/11 हमले में शामिल थी?
इस संबंध में लंबे समय से आरोप और विवाद रहे हैं, लेकिन सऊदी अरब ने अपनी सरकार या
अधिकारियों की भूमिका से इनकार किया है। उपलब्ध
नए खुलासे को सऊदी सरकार की संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
5. FBI पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में बरामद कुछ सामग्री और अन्य सुराग अमेरिकी जांचकर्ताओं तक पूरी तरह या
समय पर नहीं पहुंच सके। इसी वजह से जांच में संभावित चूक को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
6. 9/11 हमले में कितने लोगों की मौत हुई थी?
अमेरिकी FBI के अनुसार 11 सितंबर 2001 के हमलों में 2,976 लोगों की मौत हुई थी।
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