BRICS Summit 2026
भारत में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत भी होगी। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, रणनीतिक सहयोग और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
पुतिन की इस यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। रूस ने भी संकेत दिया है कि यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में भारत की कोशिशों का वह स्वागत करेगा।
*पुतिन के एजेंडे में Su-57 फाइटर जेट
पुतिन की भारत यात्रा में रक्षा सहयोग सबसे अहम विषयों में से एक हो सकता है। रूसी पक्ष के मुताबिक Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान से जुड़ा प्रस्ताव दोनों देशों के एजेंडे में है।
रूस की ओर से कहा गया है कि भारत इस विमान से जुड़ी तकनीक में रुचि रखता है और दोनों देशों के बीच इस विषय पर बातचीत जारी है। खास बात यह है कि भारत केवल विमान खरीदने के बजाय तकनीकी सहयोग और निर्माण क्षमता से जुड़े विकल्पों पर भी विचार करना चाहता है।
यदि Su-57 को लेकर कोई महत्वपूर्ण समझ बनती है तो यह भारत-रूस रक्षा साझेदारी के लिए बड़ा कदम माना जा सकता है। भारत पहले से ही रूसी मूल की कई रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल करता है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से सैन्य-तकनीकी सहयोग रहा है।
ब्रह्मोस मिसाइल को और ताकतवर बनाने पर चर्चा
पुतिन और मोदी की बातचीत में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम भी महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है। रूस ने बताया है कि भारत और रूस संयुक्त रूप से ब्रह्मोस की क्षमताओं को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं।
दोनों देश इस मिसाइल प्रणाली में नई क्षमताएं जोड़ने और उसे अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान रक्षा सहयोग के व्यापक एजेंडे में ब्रह्मोस अपग्रेड भी चर्चा का हिस्सा बन सकता है।
यूक्रेन युद्ध पर भी होगी अहम बातचीत
पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है। इस वजह से मोदी-पुतिन वार्ता में यूक्रेन का मुद्दा भी प्रमुख रहने की संभावना है।
रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि रूस संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और भारत की किसी भी ऐसी पहल का स्वागत करेगा जो युद्ध को समाप्त करने में मदद कर सके।
भारत का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में भी पुतिन के साथ बातचीत के दौरान संघर्षों के समाधान में संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया था।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच क्यों अहम है पुतिन का भारत दौरा?
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। पश्चिमी देशों और रूस के संबंधों में तनाव बढ़ा है, जबकि भारत ने रूस के साथ अपने पारंपरिक रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखते हुए सभी पक्षों से बातचीत का रास्ता अपनाया है।
भारत की स्थिति यह रही है कि युद्ध का समाधान सैन्य टकराव से नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से निकलना चाहिए। यही वजह है कि पुतिन की भारत यात्रा को केवल द्विपक्षीय संबंधों के नजरिए से नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी देखा जा रहा है।
हाल ही में भारत और रूस के शीर्ष अधिकारियों के बीच यूक्रेन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की बैठक में भी यूक्रेन, ईरान, अफगानिस्तान और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
BRICS को लेकर रूस ने भारत के रुख का किया समर्थन
BRICS को लेकर भी भारत और रूस के बीच कई मुद्दों पर समानता दिखाई दे रही है। रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा है कि BRICS किसी पश्चिमी देश के खिलाफ बनाया गया मंच नहीं है, बल्कि सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए है।
भारत भी BRICS को किसी विशेष देश के खिलाफ राजनीतिक गठबंधन के रूप में पेश करने से बचता रहा है। नई दिल्ली का जोर आर्थिक सहयोग, विकास, बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर है।
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस साल भारत की अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है।
अमेरिका के टैरिफ मुद्दे पर भी रूस मुखर
BRICS सम्मेलन से पहले रूस और अमेरिका के बीच आर्थिक तनाव का मुद्दा भी चर्चा में है। रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अमेरिकी 100 प्रतिशत टैरिफ को गैरकानूनी और अस्वीकार्य बताया है।
हालांकि रूस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह BRICS को डॉलर के खिलाफ अभियान के रूप में नहीं देखता। क्रेमलिन की ओर से कहा गया है कि रूस विभिन्न स्वीकार्य भुगतान माध्यमों के लिए खुला है और वह किसी खास मुद्रा को राजनीतिक हथियार बनाने के पक्ष में नहीं है।
क्या शी जिनपिंग भी आएंगे दिल्ली?
BRICS Summit 2026 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी भी
इस बैठक को और महत्वपूर्ण बना रही है। हालांकि उपलब्ध
रिपोर्ट के अनुसार उनकी उपस्थिति को लेकर उस समय तक अंतिम पुष्टि नहीं हुई थी।
अगर मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग एक ही मंच पर मौजूद होते हैं तो
यह भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षण होगा। खासकर भारत-चीन संबंधों और
रूस-चीन साझेदारी को देखते हुए इस बैठक पर दुनिया की नजर रहेगी।
भारत-रूस संबंधों में रक्षा के साथ ऊर्जा भी महत्वपूर्ण
मोदी-पुतिन बातचीत केवल रक्षा तक सीमित नहीं रहने वाली है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार,
आर्थिक सहयोग, अंतरिक्ष और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी संबंध लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
31 अगस्त को बिश्केक में मोदी और पुतिन की मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा,
ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी। दोनों नेताओं ने
भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई थी।
भारत के लिए पुतिन दौरे का क्या मतलब?
पुतिन की यात्रा भारत के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। एक तरफ
नई दिल्ली रूस के साथ पुराने रणनीतिक संबंधों को मजबूत रखना चाहती है,
वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों में भी संतुलन बनाए हुए है।
BRICS की अध्यक्षता के दौरान भारत के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि वह
अलग-अलग भू-राजनीतिक मत रखने वाले देशों को एक मंच पर सहयोग के लिए साथ लेकर चले।
पुतिन की यात्रा इसी व्यापक कूटनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती है।
निष्कर्ष
व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा सिर्फ BRICS सम्मेलन में उनकी भागीदारी तक सीमित नहीं रहने वाली है।
Su-57 फाइटर जेट, ब्रह्मोस मिसाइल, रक्षा सहयोग, ऊर्जा,
व्यापार और यूक्रेन युद्ध जैसे कई मुद्दे मोदी-पुतिन वार्ता को बेहद महत्वपूर्ण बना सकते हैं।
भारत की ओर से जहां संवाद और कूटनीति के जरिए यूक्रेन संघर्ष के समाधान पर जोर रहने की उम्मीद है,
वहीं रूस भारत के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को और मजबूत करने का इच्छुक दिखाई दे रहा है।
ऐसे में 12-13 सितंबर का BRICS Summit 2026 भारत की
विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति, दोनों के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकता है।
FAQ: पुतिन के भारत दौरे से जुड़े सवाल
1. व्लादिमीर पुतिन भारत कब आ रहे हैं?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आ रहे हैं।
2. मोदी-पुतिन मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?
रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, रणनीतिक सहयोग, Su-57 फाइटर जेट,
ब्रह्मोस मिसाइल के अपग्रेड और यूक्रेन संघर्ष जैसे मुद्दे बातचीत में प्रमुख हो सकते हैं।
3. क्या भारत Su-57 फाइटर जेट खरीदेगा?
Su-57 को लेकर भारत और रूस के बीच बातचीत चल रही है। रूसी पक्ष ने
इसे एजेंडे में शामिल बताया है, लेकिन किसी अंतिम डील की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
4. BRICS Summit 2026 कहां होगा?
18वां BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।
5. यूक्रेन युद्ध पर भारत का क्या रुख है?
भारत लगातार संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की बात करता रहा है।
6. क्या शी जिनपिंग BRICS Summit में आएंगे?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी की संभावना जताई गई है,
हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में उस समय तक उनकी भागीदारी की अंतिम पुष्टि नहीं बताई गई थी।
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