तमिलनाडु में CM विजय
तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार के खिलाफ विपक्षी लामबंदी तेज होती दिखाई दे रही है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलागा वेत्री कझगम (TVK) ने पहली बार सरकार बनाई है, लेकिन अब उसके सामने विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिशों की चुनौती खड़ी हो गई है। मुख्य विपक्षी दल AIADMK ने TVK के खिलाफ गठबंधन को लेकर खुलकर संकेत दिए हैं और DMK को भी साथ आने का न्योता दिया है।
AIADMK महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी (EPS) ने कहा है कि उनकी पार्टी विजय की सरकार के खिलाफ है और यदि कोई अन्य दल इस मोर्चे में शामिल होना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से DMK से सवाल किया कि क्या वह इस गठबंधन का हिस्सा बनेगी।
इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि AIADMK और DMK वास्तव में एक साथ आएंगे। दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।
AIADMK ने DMK को क्यों दिया साथ आने का संकेत?
AIADMK की ओर से सामने आया प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति में DMK और AIADMK के बीच दशकों से सीधा मुकाबला रहा है। ऐसे में विजय की TVK के खिलाफ दोनों दलों के संभावित साथ आने की चर्चा अपने आप में बड़ा राजनीतिक बदलाव मानी जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी से जब पूछा गया कि क्या TVK के खिलाफ विपक्षी गठबंधन तैयार किया जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि AIADMK पहले से ही विजय की पार्टी के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अन्य दल इस गठबंधन में शामिल होना चाहता है तो उसके लिए रास्ता खुला है।
EPS ने इसी दौरान DMK को सीधे चुनौती देते हुए पूछा कि क्या वह उनके साथ आएगी। फिलहाल DMK की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक AIADMK के छह विधायक विजय के साथ चले गए। इसके बाद विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दिए।
वहीं TVK सरकार को समर्थन देने वाले दलों के साथ अपने गठबंधन को औपचारिक रूप देने की कोशिश कर रही है। 9 सितंबर को चेन्नई में TVK की सहयोगी पार्टियों की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें गठबंधन के स्वरूप, साझा न्यूनतम कार्यक्रम और गठबंधन के नाम जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
इस बैठक में कांग्रेस, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे सहयोगियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है, जबकि वाम दलों ने बैठक से दूरी बना ली है।
TVK के सामने गठबंधन को संभालने की चुनौती
एक तरफ विजय सरकार के खिलाफ AIADMK विपक्षी दलों को जोड़ने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर खुद TVK अपने समर्थक दलों के साथ रिश्ते मजबूत करने में जुटी है।
TVK की बैठक का उद्देश्य गठबंधन को अधिक औपचारिक रूप देना बताया जा रहा है। इसके लिए साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करने और गठबंधन की संचालन व्यवस्था तय करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन गठबंधन के भीतर भी कुछ मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे को लेकर है।
‘विजय फॉर पीएम’ से कांग्रेस असहज?
TVK के कुछ नेताओं की ओर से विजय को भविष्य में प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में पेश करने की मांग उठ रही है। इसे लेकर कांग्रेस के साथ मतभेद की स्थिति बनी है।
कांग्रेस पहले ही राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन के प्रमुख चेहरे के रूप में देखती रही है। ऐसे में विजय को प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने की मांग कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। TVK की ओर से हालांकि इसे व्यक्तिगत राय बताया गया है।
यही कारण है कि 9 सितंबर की बैठक को तमिलनाडु की राजनीति के साथ-साथ भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
DMK अभी क्यों है महत्वपूर्ण?
विजय सरकार के खिलाफ किसी बड़े विपक्षी मोर्चे के लिए DMK की भूमिका बेहद अहम हो सकती है। AIADMK और DMK दोनों ही राज्य की प्रमुख राजनीतिक ताकतें हैं। लेकिन दोनों के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक DMK नेता आरएस भारती ने जून में दोनों दलों के साथ आने की संभावना से इनकार किया था, हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि भविष्य में यदि दोनों दल साथ आते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा।
इसलिए EPS का ताजा बयान फिलहाल राजनीतिक चुनौती या संभावित रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसे अभी किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं माना जा सकता।
स्टालिन पहले ही कर चुके हैं विजय पर हमला
TVK सरकार को लेकर DMK भी लगातार आक्रामक रुख अपना रही है। अगस्त में एमके स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि DMK राजनीतिक वापसी करने में सक्षम है और पार्टी का ध्यान पूरे राज्य में जनता के बीच अपना आधार मजबूत करने पर है।
स्टालिन ने विजय पर विधानसभा को फिल्म के सेट की तरह इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया था। उनका कहना था कि DMK राजनीतिक हार के बाद निष्क्रिय बैठने वाली पार्टी नहीं है और वह जमीनी स्तर पर लगातार काम करती रहेगी।
हाल के दिनों में विधानसभा में विजय और DMK के बीच टकराव भी देखने को मिला है।
विजय द्वारा एक भाषण के दौरान किए गए
इशारे को लेकर DMK ने आपत्ति जताई। बाद में मुख्यमंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि
उनका इशारा जानबूझकर नहीं था और किसी को ठेस पहुंचाने का उनका उद्देश्य नहीं था।
वाम दलों ने TVK की बैठक से बनाई दूरी
विजय सरकार के सहयोगी दलों को एकजुट करने की TVK की कोशिशों के बीच
CPI और CPM जैसे वाम दलों का बैठक से दूर रहना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाम दलों ने 9 सितंबर को होने वाली TVK की बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।
इससे संकेत मिलता है कि TVK को अपने गठबंधन को पूरी तरह
एकजुट करने में अभी कुछ राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि कांग्रेस, VCK और IUML के बैठक में शामिल होने की संभावना है।
ऐसे में TVK अपने मौजूदा गठबंधन को अधिक संगठित रूप देने की कोशिश कर रही है।
क्या विजय सरकार गिरने का खतरा है?
AIADMK की ओर से विपक्षी दलों को साथ आने का न्योता निश्चित रूप से
विजय सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती है, लेकिन केवल गठबंधन की
घोषणा या विपक्षी एकता की चर्चा से सरकार गिरना तय नहीं होता।
सरकार की स्थिरता विधानसभा में उसके वास्तविक संख्याबल, विधायकों के समर्थन और गठबंधन के भीतर
एकजुटता पर निर्भर करेगी। ऐसे में फिलहाल ‘विजय सरकार गिरने वाली है’ कहना जल्दबाजी होगी।
हां, अगर AIADMK, DMK और अन्य विपक्षी दल किसी साझा रणनीति पर वास्तव में सहमत होते हैं और
पर्याप्त संख्या में विधायक उनके साथ आते हैं, तो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।
9 सितंबर की बैठक पर टिकी नजरें
अब सभी की नजरें TVK की 9 सितंबर की बैठक पर हैं। इस बैठक में गठबंधन को लेकर
कई महत्वपूर्ण फैसले होने की संभावना है। दूसरी तरफ AIADMK का
DMK को साथ आने का खुला न्योता राजनीतिक माहौल को और दिलचस्प बना रहा है।
यदि DMK इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है तो यह तमिलनाडु की राजनीति में
बेहद असामान्य राजनीतिक समीकरण होगा। वहीं यदि DMK दूरी बनाए रखती है तो
AIADMK को TVK विरोधी मोर्चे के लिए दूसरे दलों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री विजय के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती दिखाई दे रही है।
एक ओर उन्हें अपनी सरकार और TVK के गठबंधन को मजबूत रखना है,
वहीं दूसरी ओर AIADMK उनके खिलाफ व्यापक विपक्षी एकता की कोशिश कर रही है।
EPS का DMK को दिया गया न्योता इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
हालांकि DMK की ओर से अभी इस पर कोई अंतिम सहमति सामने नहीं आई है।
इसलिए आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या वर्षों से एक-दूसरे के विरोधी रहे
AIADMK और DMK, विजय की TVK सरकार के खिलाफ किसी साझा मंच पर आते हैं या
तमिलनाडु की राजनीति में यह सिर्फ एक सियासी दबाव बनाने की रणनीति साबित होती है।
FAQ: विजय सरकार और विपक्षी गठबंधन
1. तमिलनाडु में विजय सरकार के खिलाफ कौन-कौन से दल लामबंद हो रहे हैं?
AIADMK ने विजय की TVK सरकार के खिलाफ गठबंधन की संभावना जताई है और
DMK समेत अन्य दलों को साथ आने का न्योता दिया है।
2. क्या DMK और AIADMK साथ आ गए हैं?
नहीं। अभी दोनों दलों के बीच औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है।
AIADMK ने DMK को साथ आने का खुला न्योता दिया है।
3. ईके पलानीस्वामी ने क्या कहा?
EPS ने कहा कि AIADMK TVK के खिलाफ है और यदि अन्य दल साथ आना चाहते हैं तो
उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने DMK से भी साथ आने को लेकर सवाल किया।
4. TVK की 9 सितंबर की बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
बैठक में सहयोगी दलों के बीच गठबंधन को औपचारिक स्वरूप देने,
साझा न्यूनतम कार्यक्रम और गठबंधन के नाम सहित कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
5. क्या कांग्रेस विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानती है?
TVK के कुछ नेताओं ने विजय को 2029 के लिए संभावित PM चेहरा बनाने की मांग की है,
लेकिन कांग्रेस की स्थिति इससे अलग है और वह
राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन के प्रमुख चेहरे के रूप में देखती है।
6. क्या विजय सरकार अभी खतरे में है?
अभी ऐसा कोई अंतिम तथ्य सामने नहीं है जिससे सरकार के तत्काल गिरने की पुष्टि हो।
विपक्षी एकता की कोशिश जरूर सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती है।
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