पटना में गंगा का जलस्तर
बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राजधानी पटना के निचले इलाकों में गंगा का पानी तेजी से फैल रहा है। इसका असर अब रिहायशी इलाकों के साथ-साथ कारोबार और कृषि से जुड़ी गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। पटना के दीदारगंज चेक पोस्ट के पास स्थित ट्रैक्टर यार्ड पूरी तरह पानी में डूब गया है। यार्ड में खड़े सैकड़ों ट्रैक्टर और फार्म मशीनरी बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
बाढ़ के पानी से घिरे ट्रैक्टर यार्ड की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद पटना में गंगा के बढ़ते खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिस जगह कुछ दिन पहले तक बड़ी संख्या में नए ट्रैक्टर कतार में खड़े दिखाई देते थे, वहां अब चारों तरफ मटमैला पानी नजर आ रहा है।
गंगा का पानी बढ़ा तो डूब गया पूरा ट्रैक्टर यार्ड
दीदारगंज का ट्रैक्टर यार्ड गंगा नदी के किनारे निचले क्षेत्र में स्थित है। नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैलने के बाद यार्ड तक पहुंच गया। देखते ही देखते यार्ड का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया और वहां खड़ी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर पानी में फंस गए।
सामने आए दृश्यों में कई ट्रैक्टरों के पहिए और निचले हिस्से पानी में डूबे दिखाई दे रहे हैं। यार्ड में मौजूद फार्म मशीनरी भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई है। इससे कारोबारी नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
यह दृश्य सिर्फ एक यार्ड के डूबने की तस्वीर नहीं है, बल्कि यह बताता है कि गंगा का बढ़ता जलस्तर किस तरह पटना के निचले इलाकों में तेजी से फैल रहा है।
पटना में गंगा ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड
पटना में बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा गंगा के जलस्तर से लगाया जा सकता है। गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच चुका है। यह स्तर वर्ष 2016 में दर्ज किए गए पिछले उच्चतम स्तर से करीब 5 सेंटीमीटर अधिक बताया गया है।
गंगा के जलस्तर में इस बढ़ोतरी का असर पटना के दियारा और निचले इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। कई जगह घरों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों तक पानी पहुंच चुका है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है।
घर-दुकान से लेकर स्कूल तक पानी की चपेट में
बिहार में बाढ़ का असर केवल पटना तक सीमित नहीं है। राज्य के कई जिलों में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती और पुनपुन जैसी नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है।
पटना के दानापुर-दियारा क्षेत्र में पानी घरों, दुकानों और स्कूलों तक पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। कई स्थानों पर लोगों की आवाजाही के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में SDRF की नावों, जवानों और गोताखोरों की तैनाती की है।
वहीं नवगछिया के मदरौनी जैसे इलाकों में भी बाढ़ का असर बेहद गंभीर है। वहां कई घरों में कई फीट तक पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है और लोग नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंच रहे हैं।
बिहार में लगातार बढ़ रहा बाढ़ का दायरा
बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार व्यापक होती जा रही है। 9 सितंबर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ का असर 14 जिलों और 491 पंचायतों तक पहुंच गया है और करीब 35.89 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं। भागलपुर, पटना समेत कई इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इससे पहले 8 सितंबर को राज्य के 13 जिलों में करीब 29 लाख से ज्यादा लोगों के
प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी। यानी बहुत कम समय में बाढ़ का प्रभाव और बढ़ा है।
सैकड़ों ट्रैक्टर पानी में डूबने से कारोबारियों की चिंता बढ़ी
दीदारगंज ट्रैक्टर यार्ड के डूबने से यहां मौजूद मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
ट्रैक्टर और कृषि मशीनें काफी महंगी होती हैं और लंबे समय तक पानी में रहने से इंजन, इलेक्ट्रिकल
सिस्टम और दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान हो सकता है।
हालांकि वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन पानी उतरने और मशीनों की जांच के बाद ही हो सकेगा।
फिलहाल यार्ड के आसपास पानी भरा होने के कारण
मशीनों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
यार्ड में मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों के लिए भी बाढ़ के अचानक बढ़ते पानी ने मुश्किल पैदा की।
प्रशासन और स्थानीय स्तर पर लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी जा रही है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने
संवेदनशील इलाकों पर निगरानी बढ़ा दी है। घाटों और नदी के
आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। SDRF की टीमें और नावें तैनात रखी गई हैं ताकि
जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा सके।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों से नदी और तेज बहाव वाले पानी के करीब नहीं जाने की
अपील की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों को
सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की है।
गंगा के साथ दूसरी नदियां भी उफान पर
बिहार में सिर्फ गंगा ही चिंता का कारण नहीं है। कोसी, गंडक,
बागमती और पुनपुन समेत कई नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हुई है।
इन नदियों के आसपास बसे गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
पटना के अलावा भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और अन्य जिलों में भी बाढ़ का
असर दिखाई दे रहा है। भागलपुर में गंगा का पानी नेशनल हाईवे-80 तक पहुंचने की
रिपोर्ट सामने आई है, जिससे सड़क यातायात पर भी असर पड़ा है।
आगे कैसी है स्थिति?
बिहार में बाढ़ की स्थिति फिलहाल पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कुछ इलाकों में
पानी घटने के संकेत मिले हैं, लेकिन बड़ी आबादी अभी भी प्रभावित है। करीब 36 लाख लोगों के
बाढ़ से प्रभावित होने की ताजा जानकारी इस संकट की गंभीरता को दिखाती है।
पटना के दीदारगंज में ट्रैक्टर यार्ड का जलमग्न होना बाढ़ की व्यापकता का एक बड़ा उदाहरण है।
नदी का पानी अब उन इलाकों तक पहुंच रहा है जहां सामान्य दिनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलती हैं।
निष्कर्ष
पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और कारोबारियों के लिए खतरा कितना बड़ा हो सकता है।
दीदारगंज में सैकड़ों ट्रैक्टरों का पानी में डूबना बाढ़ की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना,
राहत एवं बचाव अभियान को लगातार जारी
रखना और जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर बनाए रखना है। आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर और
मौसम की स्थिति पर ही तय होगा कि पटना समेत बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं।
read this post :BRICS Summit 2026: भारत आ रहे पुतिन, Su-57 से यूक्रेन युद्ध तक कई बड़े मुद्दों पर होगी बात; मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर
