Iran America War
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब एक और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान ने जॉर्डन स्थित उस एयर बेस को निशाना बनाया है, जहां अमेरिकी सैन्य विमान और सैनिक तैनात हैं। इस हमले में कई अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 8 F-15 फाइटर जेट्स को हल्का नुकसान हुआ, जबकि एक A-10 Thunderbolt को गंभीर क्षति पहुंची है।
यह हमला ऐसे वक्त हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से हमले और जवाबी हमलों का सिलसिला तेज हो गया है। इससे पहले अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री रास्तों से जुड़े ठिकानों पर दबाव बढ़ाया है।
जॉर्डन के एयर बेस पर ईरान का मिसाइल हमला
ईरान ने जॉर्डन के मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। यह एयर बेस अमेरिका के लिए मध्य पूर्व में एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र माना जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार हमले के दौरान अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को रोकने की कोशिश की। जॉर्डन की सेना के मुताबिक करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक किया गया, जिनमें से 18 को इंटरसेप्ट कर लिया गया, जबकि दो खुले इलाकों में गिरीं।
इसके बावजूद कुछ मिसाइलों के प्रभाव से अमेरिकी सैन्य विमानों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है।
करीब 8 F-15 विमानों को नुकसान
CBS से सामने आई जानकारी के अनुसार ईरानी हमले में लगभग आठ अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमानों को हल्का नुकसान हुआ। हालांकि, इन विमानों को बाद में दोबारा सेवा में लगाया गया। यानी नुकसान के बावजूद अमेरिकी वायुसेना के इन विमानों को ऑपरेशन से पूरी तरह बाहर नहीं किया गया।
यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस को क्षेत्र में अमेरिकी एयर ऑपरेशंस के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है।
A-10 Thunderbolt को पहुंची गंभीर क्षति
हमले में एक A-10 Thunderbolt II, जिसे अमेरिकी सेना में ‘Warthog’ के नाम से जाना जाता है, को अपेक्षाकृत ज्यादा नुकसान हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक विमान का एक विंग गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ और उसके बाद विमान को सेवा से बाहर करना पड़ा। एयर एंड स्पेस फोर्सेज मैगजीन ने भी इस नुकसान की पुष्टि करते हुए बताया कि एक A-10 को गंभीर क्षति और करीब आठ F-15E Strike Eagles को हल्का नुकसान हुआ।
यह नुकसान इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आम तौर पर सैन्य एयर बेस अत्यधिक सुरक्षा और एयर डिफेंस सिस्टम से घिरे होते हैं।
अमेरिकी एयर डिफेंस ने दागीं दर्जनों पैट्रियट मिसाइलें
ईरानी मिसाइल हमले के दौरान अमेरिकी और सहयोगी एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेना ने 30 से अधिक पैट्रियट मिसाइलें दागीं।
इनका मकसद आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करना था। हालांकि बड़ी संख्या में मिसाइलों को रोके जाने के बावजूद अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचना यह संकेत देता है कि कुछ प्रोजेक्टाइल बेस तक पहुंचने में सफल रहे।
अब इस हमले के बाद अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने क्षेत्रीय एयर बेस और वहां मौजूद सैन्य संसाधनों की सुरक्षा बढ़ाने की है।
अमेरिका ने पहले ईरानी तेल टैंकरों को बनाया था निशाना
ईरान का यह हमला अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है।
अमेरिकी सेना ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। वॉशिंगटन ने इसे अमेरिकी नौसैनिक पोतों पर ईरानी हमलों के जवाब के रूप में बताया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिकी सैन्य ठिकाने के अलावा समुद्र में कई जहाजों को निशाना बनाने का दावा भी किया है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी जहाजों पर किए गए हमले सफल नहीं हुए।
होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना जंग का बड़ा केंद्र
अमेरिका-ईरान टकराव का एक बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भी केंद्रित है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री टकराव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चिंता बढ़ी है। ताजा घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इससे दुनिया के कई देशों में महंगे ईंधन और महंगाई का खतरा बढ़ सकता है।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच जंग और बढ़ेगी?
जॉर्डन में अमेरिकी एयर बेस पर हमला क्षेत्रीय संघर्ष के विस्तार का संकेत माना जा रहा है।
अब तक टकराव मुख्य रूप से ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगियों के बीच अलग-अलग मोर्चों पर दिखाई दे रहा था,
लेकिन जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगी देश की जमीन पर
मौजूद सैन्य ठिकाने के प्रभावित होने से स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि ईरानी हमलों का जवाब दिया जाएगा।
दूसरी तरफ ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई की धमकी दे रहा है।
इस वजह से आने वाले दिनों में जॉर्डन, खाड़ी क्षेत्र, हॉर्मुज और
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
जॉर्डन क्यों बना महत्वपूर्ण निशाना?
जॉर्डन अमेरिका का करीबी क्षेत्रीय सहयोगी है और वहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी लंबे समय से है।
मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस अमेरिकी अभियानों के लिए महत्वपूर्ण एयरपावर हब के तौर पर इस्तेमाल होता है।
ईरान की ओर से इस बेस को निशाना बनाए जाने को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है
क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि संघर्ष अब केवल
ईरान और अमेरिकी सैन्य संसाधनों के बीच सीमित नहीं रह गया है।
अमेरिकी सैनिकों की मौत की खबर नहीं
अब तक सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक इस हमले में किसी अमेरिकी सैनिक की मौत की सूचना नहीं है।
जॉर्डन की ओर से भी मिसाइलों को बड़े पैमाने पर इंटरसेप्ट किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि सैन्य विमानों को हुए नुकसान के बाद अमेरिकी सेना के लिए एयर
बेस की सुरक्षा और मजबूत करना प्राथमिकता बन सकता है।
आगे क्या होगा?
जॉर्डन में अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचाने वाला यह हमला अमेरिका-ईरान
संघर्ष में एक अहम घटनाक्रम है। एक तरफ ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय हितों पर दबाव बढ़ा रहा है,
वहीं अमेरिका जवाबी कार्रवाई की नीति पर कायम दिखाई दे रहा है।
अगर दोनों देशों के बीच हमलों का यह सिलसिला जारी रहता है तो इसका
असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमत, वैश्विक व्यापार,
समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जॉर्डन एयर बेस पर हमले के
बाद अमेरिका ईरान के खिलाफ और बड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा? आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा इसी जवाब पर काफी हद तक निर्भर कर सकती है।
FAQ: ईरान-अमेरिका युद्ध और जॉर्डन एयर बेस हमला
1. ईरान ने जॉर्डन में किस अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया?
ईरान ने जॉर्डन के मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस, जिसे अल-अज्राक एयर बेस के
नाम से भी जाना जाता है, को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया।
2. ईरानी हमले में कितने अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त हुए?
रिपोर्टों के मुताबिक करीब 8 F-15 विमानों को हल्का नुकसान हुआ, जबकि एक A-10 Thunderbolt को गंभीर क्षति पहुंची।
3. क्या A-10 विमान पूरी तरह नष्ट हो गया?
रिपोर्ट के अनुसार A-10 को गंभीर नुकसान पहुंचा और उसका एक विंग क्षतिग्रस्त हुआ।
इसे गंभीर रूप से प्रभावित विमान बताया गया है।
4. क्या हमले में अमेरिकी सैनिक मारे गए?
उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में इस हमले में किसी अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।
5. अमेरिका ने कितनी पैट्रियट मिसाइलें दागीं?
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी बलों ने हमले के दौरान 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें दागीं।
6. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है?
हालिया तनाव में अमेरिकी कार्रवाई से ईरानी तेल टैंकरों को नुकसान,
ईरानी जवाबी मिसाइल हमले और हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों को लेकर बढ़ता टकराव प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
7. क्या इस संघर्ष का असर भारत पर भी पड़ सकता है?
अगर हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो
कच्चे तेल की कीमत, शिपिंग लागत और आयात खर्च बढ़ सकता है। इससे भारत समेत
तेल आयात करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव पड़ने की संभावना रहती है।
