निठारी मामले से जुड़े
नोएडा के चर्चित निठारी मामले से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक उसका शव भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय की दुकान के भीतर मिला। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौत की अंतिम वजह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद होने की जानकारी नहीं है।
सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था और वहां चाय की दुकान चला रहा था। पुलिस ने उसके परिजनों को घटना की सूचना दे दी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
भूपतवाला में चाय की दुकान के अंदर मिला शव
पुलिस के अनुसार सुरेंद्र कोली का शव उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में मिला। वह जिस स्थान पर रह रहा था, वहीं चाय का छोटा कारोबार भी करता था।
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। फोरेंसिक टीम भी घटनास्थल की जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच शुरुआती चरण में है। इसलिए मौत की परिस्थितियों और संभावित कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाएगा।
कई महीनों से हरिद्वार में रह रहा था कोली
उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र का रहने वाला था। जेल से रिहा होने के बाद वह कुछ समय पहले हरिद्वार आया था।
हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में उसने चाय की दुकान शुरू की थी। इसी दुकान में उसका शव मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर घटना की जानकारी पुलिस तक पहुंची।
निठारी मामले में कैसे सामने आया था नाम?
सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी क्षेत्र में सामने आए कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने तथा हत्या के मामलों की जांच के दौरान प्रमुखता से सामने आया था।
नोएडा के सेक्टर-31 स्थित एक मकान के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ी। इसी मामले में मकान के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए।
इस मामले ने देशभर में व्यापक ध्यान खींचा और इसके बाद लंबे समय तक अदालतों में कानूनी कार्यवाही चलती रही।
सुप्रीम कोर्ट से 2025 में मिली थी राहत
सुरेंद्र कोली की कानूनी स्थिति बाद के वर्षों में बदल गई थी। 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में उसे बरी किया था। इसके बाद जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन मामलों में बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा।
इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी से जुड़े अंतिम लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया तथा उसे बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद उसे जेल से रिहा करने का निर्देश दिया गया था।
इसलिए वर्तमान घटना की रिपोर्टिंग में यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि मौत के समय उसके खिलाफ निठारी मामले में कोई कायम दोषसिद्धि नहीं थी।
अंतिम मामले में भी क्यों हुआ था बरी?
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 के फैसले में सुरेंद्र कोली की उस दोषसिद्धि को भी समाप्त कर दिया था,
जो निठारी से जुड़े अंतिम लंबित मामले में बनी हुई थी।
अदालत ने साक्ष्यों और जांच की प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करते हुए उसे बरी किया।
फैसले के बाद अदालत ने कहा था कि यदि दोषसिद्धि ऐसे साक्ष्य पर
आधारित हो जिसे अदालत स्वीकार्य नहीं मानती, तो उसे कायम रखना उचित नहीं होगा।
हरिद्वार की घटना की पुलिस कर रही जांच
अब पुलिस का ध्यान हरिद्वार में हुई मौत की परिस्थितियों पर है। घटनास्थल की जांच,
फोरेंसिक परीक्षण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के मुताबिक मौके पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में यह भी जांच का विषय होगा कि
घटना से पहले उसकी गतिविधियां कैसी थीं और मौत से जुड़े अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य क्या संकेत देते हैं।
आत्महत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं
प्रारंभिक पुलिस आकलन में मौत आत्महत्या जैसी प्रतीत हो रही है, लेकिन इसके पीछे की वजह
फिलहाल स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी पारिवारिक विवाद,
आर्थिक परेशानी या अन्य कारण को निश्चित रूप से मौत की वजह बताना अभी उचित नहीं होगा।
जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के बाद ही परिस्थितियों की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।
करीब दो दशक पुराना मामला फिर चर्चा में
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद वर्ष 2006 में सामने आया
निठारी मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
यह मामला लंबे समय तक अदालतों में चला और अलग-अलग मुकदमों में अलग-अलग स्तरों पर फैसले आते रहे।
कोली की कानूनी यात्रा में भी कई महत्वपूर्ण मोड़ आए। शुरुआती दौर में उसे
कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा भी सुनाई गई थी।
बाद में सजा में बदलाव हुआ और अंततः विभिन्न मामलों में अदालतों से बरी होने के बाद
2025 में अंतिम लंबित मामले में भी सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली।
अब आगे क्या होगा?
हरिद्वार पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
परिवार के सदस्यों को घटना की जानकारी दी जा चुकी है।
मौत की परिस्थितियों से जुड़े किसी भी निष्कर्ष के लिए जांच पूरी होना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी है।
निष्कर्ष
निठारी मामले से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में मौत हो गई।
उसका शव चाय की दुकान के अंदर मिला। पुलिस की शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है,
लेकिन मौत की अंतिम वजह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
गौर करने वाली बात यह है कि निठारी से जुड़े मामलों में सुरेंद्र कोली को 2025 तक सुप्रीम कोर्ट से
राहत मिल चुकी थी और अंतिम लंबित मामले में भी उसे बरी कर दिया गया था।
अब हरिद्वार में हुई उसकी मौत की परिस्थितियों की जांच पुलिस कर रही है।
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