जेएनयू पीएचडी दाखिला
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के पीएचडी दाखिले को लेकर आरक्षण व्यवस्था पर विवाद गहरा गया है। छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwBD) अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित आरक्षित सीटों का पर्याप्त आवंटन नहीं किया गया है। इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई गई है।
छात्र संगठनों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने कुल 711 नियमित पीएचडी सीटों का विज्ञापन जारी किया है, लेकिन आरक्षित वर्गों के लिए घोषित सीटों की संख्या निर्धारित अनुपात से कम है। इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लिया है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि विश्वविद्यालय के जवाब और संबंधित जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी। Hindustan Times+2
711 पीएचडी सीटों के आवंटन पर उठे सवाल
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने आरोप लगाया है कि JNU के पीएचडी प्रवेश सत्र 2026-27 के प्रॉस्पेक्टस में आरक्षण के नियमों के अनुरूप सीटों का आवंटन नहीं किया गया है।
संगठन के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने UGC-NET, UGC-NET-JRF और GATE के तीन माध्यमों से कुल 711 नियमित सीटें घोषित की हैं। इन सीटों में आरक्षित वर्गों की हिस्सेदारी को लेकर संगठन ने सवाल उठाए हैं।
SFI के दावों के अनुसार:
- अनुसूचित जनजाति (ST): 7.5 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से लगभग 53 सीटें होनी चाहिए थीं, जबकि प्रॉस्पेक्टस में 38 सीटें दिखाई गईं।
- अनुसूचित जाति (SC): 15 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार लगभग 107 सीटें बनती थीं, जबकि 103 सीटें दर्शाई गईं।
- दिव्यांग अभ्यर्थी (PwBD): संगठन ने लगभग 36 सीटों की जरूरत के मुकाबले केवल 17 सीटें आवंटित होने का आरोप लगाया है।
ये आंकड़े छात्र संगठनों के दावों पर आधारित हैं। इन्हें विश्वविद्यालय या किसी जांच आयोग का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। Hindustan Times+2
माइक्रो-यूनिट सीट आवंटन प्रणाली पर विवाद
इस विवाद की एक प्रमुख वजह सीटों के आवंटन की वह प्रक्रिया बताई जा रही है, जिसे छात्र संगठन माइक्रो-यूनिट प्रणाली कह रहे हैं। SFI का आरोप है कि आरक्षण की गणना विश्वविद्यालय की कुल सीटों के आधार पर करने के बजाय अलग-अलग विभागों, सेंटरों और विषयों के स्तर पर की जा रही है।
संगठन का कहना है कि कई विभागों में पीएचडी की सीटें बहुत कम होती हैं। ऐसे में जब सीटों को UGC-NET, NET-JRF और GATE जैसे अलग-अलग प्रवेश माध्यमों में बांटा जाता है, तो कुछ सेंटरों में आरक्षित वर्गों के लिए सीटें शून्य रह जाती हैं।
SFI ने दावा किया है कि मौजूदा प्रवेश सत्र में 29 सेंटर ऐसे हैं, जहां SC और ST दोनों वर्गों के लिए कोई सीट नहीं दिखाई गई है। संगठन का कहना है कि इससे आरक्षित वर्गों के योग्य अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। Hindustan Times+1
राष्ट्रीय आयोगों ने लिया संज्ञान, विश्वविद्यालय से मांगा जवाब
इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) की कार्रवाई भी चर्चा में है। SFI के अनुसार, संगठन ने 29 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद आयोग ने 8 अक्टूबर को JNU के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर मामले में जानकारी और की गई कार्रवाई का विवरण मांगा।
छात्र संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित समयसीमा में जवाब नहीं दिया गया।
इसके बाद 27 अक्टूबर को आयोग ने सात दिनों के भीतर जवाब देने के लिए रिमाइंडर जारी किया।
वहीं, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी मामले का संज्ञान लिया है। 30 अक्टूबर को सामने
आई जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जाति आयोग ने विश्वविद्यालय को कथित रूप से छूटी हुई आरक्षित
सीटों को दोबारा अधिसूचित करने या उनकी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को
पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। The Times of India+2
छात्र संगठनों ने शुरू किया विरोध, दाखिला प्रक्रिया में सुधार की मांग
आरक्षण विवाद को लेकर छात्र संगठनों का विरोध तेज हो गया है। बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BAPSA) ने
कथित तौर पर आरक्षित सीटों की कमी के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की है।
संगठन की मांग है कि विश्वविद्यालय पीएचडी की मौजूदा वाइवा-वोसी प्रक्रिया को रोककर संशोधित प्रवेश
अधिसूचना जारी करे। साथ ही आरक्षित वर्गों के लिए निर्धारित सीटों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक किया जाए।
छात्र संगठनों ने यह भी मांग की है कि पिछले वर्षों में खाली रह गई आरक्षित
सीटों की जानकारी सार्वजनिक हो और बैकलॉग सीटों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
अब इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन के आधिकारिक जवाब, आयोगों की आगे की
कार्रवाई और छात्र संगठनों की मांगों पर होने वाले निर्णय का इंतजार है। The Tribune+1
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. JNU में पीएचडी दाखिले को लेकर विवाद क्यों हुआ है?
छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि 2026-27 के पीएचडी दाखिले में SC, ST और दिव्यांग
अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित आरक्षित सीटों की संख्या कम दिखाई गई है।
2. JNU में कुल कितनी पीएचडी सीटें घोषित की गई हैं?
छात्र संगठनों के अनुसार, UGC-NET, UGC-NET-JRF और GATE के माध्यम से कुल 711 नियमित सीटें घोषित की गई हैं।
3. ST वर्ग के लिए कितनी सीटों की कमी का आरोप है?
SFI के अनुसार, ST वर्ग के लिए लगभग 53 सीटें होनी चाहिए थीं, जबकि प्रॉस्पेक्टस में 38 सीटें दिखाई गईं।
4. क्या राष्ट्रीय आयोगों ने मामले में कार्रवाई की है?
हां, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है।
5. छात्र संगठनों की मुख्य मांग क्या है?
छात्र संगठन स्वतंत्र जांच, आरक्षित सीटों का सही आवंटन,
संशोधित प्रवेश प्रॉस्पेक्टस और पारदर्शी दाखिला प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं
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