इटली में
रोम। यूरोपीय देश इटली में बढ़ती महंगाई, कम वेतन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश की कमी तथा सैन्य खर्च बढ़ाने के विरोध में 30 अक्टूबर 2026 को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। देशभर के 40 से अधिक शहरों में हजारों छात्र, कर्मचारी, किसान, ट्रक चालक और ट्रेड यूनियन से जुड़े लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की आर्थिक और रक्षा नीतियों पर सवाल उठाते हुए आम लोगों के जीवन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं पर अधिक खर्च करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कुछ शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। ट्यूरिन में पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। रोम में संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे कुछ प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की। हालांकि, देश के अधिकांश हिस्सों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। Reuters+2
यह विरोध प्रदर्शन 24 घंटे की देशव्यापी आम हड़ताल के दौरान आयोजित किया गया था। इसका आह्वान ट्रेड यूनियन संगठन USB ने किया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग थी कि सरकार महंगाई के अनुरूप वेतन बढ़ाए, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं के लिए बजट बढ़ाए तथा हथियारों और सैन्य गतिविधियों पर होने वाले खर्च की समीक्षा करे।
40 से अधिक शहरों में प्रदर्शन, छात्र और कर्मचारी एक साथ आए
30 अक्टूबर को इटली के कई प्रमुख शहरों में विरोध मार्च निकाले गए। इनमें रोम, मिलान, ट्यूरिन, नेपल्स, बोलोग्ना, वेनिस, जेनोआ और पालेर्मो जैसे शहर शामिल रहे।
प्रदर्शन में विश्वविद्यालयों और स्कूलों के छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए। उनके साथ शिक्षक, ट्रक चालक, टैक्सी चालक, किसान, बंदरगाह कर्मचारी और दूसरे क्षेत्रों के श्रमिक भी मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आम परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। मकान का किराया, बिजली-पानी के बिल, ईंधन और जरूरी सामान की कीमतें बढ़ने से लोगों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर, वेतन में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने के कारण उनकी खरीदने की क्षमता प्रभावित हो रही है।
आयोजक ट्रेड यूनियन ने दावा किया कि देशभर में 10 लाख से 15 लाख लोगों ने हड़ताल और प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। हालांकि, प्रशासन की ओर से प्रतिभागियों की कोई आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई थी। इसलिए यह आंकड़ा आयोजक संगठन का अनुमान है। AFP+2
ट्यूरिन में पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल
प्रदर्शन के दौरान ट्यूरिन में तनाव की स्थिति देखने को मिली। यहां कुछ छात्र और वामपंथी कार्यकर्ता प्रशासनिक भवन के आसपास लगाए गए सुरक्षा घेरे की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन और बल प्रयोग किया।
रोम में प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशन के पास से मार्च शुरू किया और कोलोसियम के आसपास से होते हुए आगे बढ़े। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर कूड़ेदान रखकर आग लगा दी। बाद में एक समूह ने संसद की ओर जाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान आठ लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।
मिलान में भी प्रदर्शनकारियों ने शहर की रिंग रोड पर मार्च किया और विश्वविद्यालय के आसपास प्रदर्शन किया। जेनोआ में करीब 15 हजार बंदरगाह कर्मचारियों, छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने बंदरगाह क्षेत्र में पहुंचकर हथियारों की ढुलाई के विरोध में आवाज उठाई। Reuters+2
महंगाई, महंगे किराये और शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों में नाराजगी
इटली के प्रदर्शनों में छात्रों की भागीदारी खास तौर पर चर्चा में रही। छात्र संगठनों का कहना है कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की जरूरत है। कई शिक्षण संस्थानों में भवनों की खराब स्थिति, सुविधाओं की कमी और शिक्षा पर पर्याप्त सरकारी खर्च नहीं होने की शिकायतें उठाई गईं।
विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सामने महंगे किराये की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। रोम में एक छात्रा ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि एक कमरे का किराया लगभग 1,200 यूरो तक पहुंच सकता है। ऐसे में पढ़ाई का खर्च उठाना विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए मुश्किल हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि शिक्षा और आवास के लिए अधिक बजट उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, छात्रावासों और सस्ती आवास सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है। AFP+2
सैन्य खर्च और हथियारों की ढुलाई के खिलाफ भी उठी आवाज
इटली में हुए प्रदर्शनों का एक प्रमुख मुद्दा सरकार की रक्षा और सैन्य खर्च से जुड़ी नीतियां भी रहीं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार सैन्य तैयारियों और हथियारों पर खर्च बढ़ाने के बजाय शिक्षा,
स्वास्थ्य, आवास और रोजगार जैसी जरूरतों को प्राथमिकता दे।
कई प्रदर्शनकारियों ने हथियारों की ढुलाई में बंदरगाहों के इस्तेमाल का भी विरोध किया। जेनोआ बंदरगाह पर
बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और युद्ध क्षेत्रों में हथियार भेजने से जुड़ी गतिविधियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
यह विरोध केवल इटली तक सीमित नहीं रहा। भूमध्यसागर और यूरोप के कई बंदरगाहों पर श्रमिक संगठनों ने
हथियारों के व्यापार और बंदरगाहों के सैन्य इस्तेमाल के खिलाफ एकजुटता दिखाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि
सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग युद्ध और हथियारों के बजाय लोगों की
बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में होना चाहिए।
मेलोनी सरकार पर बढ़ा दबाव, पहले भी हो चुके हैं प्रदर्शन
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार को पिछले कुछ समय से महंगाई,
ईंधन की कीमतों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
अक्टूबर के मध्य में मिलान में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा,
तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं।
इसके बाद सरकार ने सार्वजनिक सभाओं और प्रदर्शनों से जुड़े नियमों को सख्त किया।
30 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी, ताकि दोबारा हिंसा न हो।
इस बीच, सरकार ने ईंधन की बढ़ती कीमतों से प्रभावित ट्रक चालकों, किसानों और
मछुआरों के लिए 17.52 करोड़ यूरो के सहायता पैकेज पर भी सहमति जताई थी। इसके अतिरिक्त
2027 के प्रस्तावित बजट में युवाओं और परिवारों के लिए सहायता से जुड़े
उपायों पर चर्चा चल रही है। इनमें 30 वर्ष से कम उम्र के कर्मचारियों के लिए
सालाना 2,500 यूरो के संभावित बोनस का प्रस्ताव भी शामिल है। AFP+2
फिलहाल इटली में महंगाई, रोजगार, शिक्षा और सैन्य खर्च को लेकर असंतोष बना हुआ है।
30 अक्टूबर की देशव्यापी हड़ताल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि
आम नागरिकों और युवाओं की आर्थिक चिंताएं सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं।
आने वाले दिनों में सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. इटली में 30 अक्टूबर 2026 को प्रदर्शन क्यों हुए?
इटली में बढ़ती महंगाई, कम वेतन, महंगे किराये, शिक्षा में कम निवेश और
सैन्य खर्च बढ़ाने के विरोध में प्रदर्शन हुए।
2. इटली में प्रदर्शन कितने शहरों में हुए?
प्रदर्शन 40 से अधिक शहरों में आयोजित किए गए।
इनमें रोम, मिलान, ट्यूरिन, जेनोआ और नेपल्स जैसे प्रमुख शहर शामिल थे।
3. क्या प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया?
हां, ट्यूरिन में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
रोम में भी पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे समूह को रोकने के लिए कार्रवाई की।
4. प्रदर्शन में कितने लोगों ने हिस्सा लिया?
आयोजक ट्रेड यूनियन USB ने 10 लाख से 15 लाख लोगों की भागीदारी का अनुमान लगाया था।
हालांकि, प्रशासन ने आधिकारिक संख्या जारी नहीं की।
5. इटली के छात्र किस बात का विरोध कर रहे हैं?
छात्र बेहतर स्कूल और विश्वविद्यालय, शिक्षा के लिए अधिक बजट, सस्ते आवास और
युवाओं के लिए रोजगार के बेहतर अवसरों की मांग कर रहे हैं।
6. इटली में किस ट्रेड यूनियन ने आम हड़ताल का आह्वान किया था?
USB यानी Unione Sindacale di Base ने 30 अक्टूबर को 24 घंटे की देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया था
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