गीडा प्रदूषण और स्थानीय समस्याओं
गीडा प्रदूषण मुद्दे पर प्रस्तावित था सपा का प्रदर्शन
Samajwadi Party द्वारा गीडा क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण, गिरते जलस्तर और स्थानीय समस्याओं को लेकर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन से पहले प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। बुधवार को होने वाले प्रदर्शन से पहले मंगलवार देर रात पुलिस ने पार्टी के कई नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया। इस कार्रवाई के बाद समाजवादी पार्टी ने प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
काजल निषाद समेत कई नेता नजरबंद
प्रशासन की कार्रवाई के तहत Kajal Nishad, पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी, पूर्व विधायक यशपाल रावत, जिला महासचिव रामनाथ यादव, जिला उपाध्यक्ष गीरीश यादव और सहजनवा विधानसभा अध्यक्ष मनीष कमांडो को उनके घरों में ही रोक दिया गया।
बताया जा रहा है कि अलग-अलग थानों की पुलिस मंगलवार देर रात नेताओं के घर पहुंची और उन्हें बाहर निकलने से मना कर दिया। वहीं सपा जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम को भी रोका गया था, लेकिन लखनऊ में कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी देने के बाद उन्हें जाने दिया गया।
गीडा में प्रदूषण और मजदूरों के शोषण का मुद्दा
सपा नेताओं का कहना है कि गीडा क्षेत्र की फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और राख के कारण आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा क्षेत्र में लगातार गिरते जलस्तर, मजदूरों से आठ घंटे के बजाय 12 घंटे तक काम कराने और किसानों की जमीन का सर्किल रेट बढ़ाने जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया जाना था।
पार्टी ने सोशल मीडिया के जरिए कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से बड़ी संख्या में धरने में शामिल होने की अपील की थी। प्रशासन ने इसी को देखते हुए एहतियातन कदम उठाते हुए नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया।
देर रात घर पहुंची पुलिस
जानकारी के मुताबिक Gorakhpur के रामगढ़ताल थाने की महिला पुलिस देर रात काजल निषाद के आवास पहुंची और उन्हें घर में ही रोक दिया। वहीं सहजनवा और गीडा थाना पुलिस ने यशपाल रावत, रामनाथ यादव,
गीरीश यादव और मनीष कमांडो समेत अन्य नेताओं को बाहर निकलने नहीं दिया।
सपा नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी वैध कारण के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है।
“तानाशाही के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी”
हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद सपा नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और
फेसबुक पर प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध जताया। काजल निषाद ने
एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “यह खौफ अच्छा है, होना भी चाहिए।
अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने से शासन-प्रशासन में जो डर है,
वह साफ दिखाई दे रहा है। इस तानाशाही के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।”
वहीं जिला महासचिव रामनाथ यादव ने कहा कि धरना-प्रदर्शन की सूचना पहले ही प्रशासन को दी जा चुकी थी,
इसके बावजूद नेताओं को घरों में नजरबंद करना लोकतंत्र के खिलाफ है।
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर उठाया कदम
सूत्रों के अनुसार प्रशासन का मानना था कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के
जुटने से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से पहले ही एहतियातन कार्रवाई की गई। हालांकि प्रशासन की ओर से
इस मामले में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
धरने से पहले हुई इस कार्रवाई के बाद जिले का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
सपा कार्यकर्ता प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं, जबकि
भाजपा समर्थक इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं।
