सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय
देश की सर्वोच्च अदालत में अवकाशकालीन कार्यवाही के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने स्पष्ट कहा कि उनके समक्ष अवकाशकालीन या आंशिक कार्य दिवसों के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मौखिक मेंशनिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि युवा वकीलों को आगे आने और अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलना चाहिए।
वरिष्ठ वकीलों को लेकर अपनाया सख्त रुख
सुनवाई के दौरान जब एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने मामले का उल्लेख करने का प्रयास किया तो न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके न्यायालय में अवकाशकालीन अवधि के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मेंशनिंग की अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यवस्था वह पिछले कई वर्षों से लागू कर रहे हैं।
युवा वकीलों को अवसर देने पर जोर
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य युवा अधिवक्ताओं और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड को अवसर प्रदान करना है। उनका मानना है कि अदालत में तत्काल सुनवाई की मांग रखना और कानूनी तर्क प्रस्तुत करना युवा वकीलों के लिए सीखने और अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उठाए सवाल
कार्यवाही के दौरान कुछ वरिष्ठ वकीलों ने यह तर्क दिया कि कई मामलों में वे पहले से पक्षकारों की ओर से पेश हो रहे हैं और अचानक इस व्यवस्था को लागू करने से व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। हालांकि न्यायमूर्ति नाथ ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया और कहा कि यह प्रक्रिया लंबे समय से उनके न्यायालय में लागू है।
आंशिक कार्य दिवसों में चल रही है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में 1 जून से 12 जुलाई 2026 तक आंशिक कार्य दिवसों की व्यवस्था लागू की गई है। इस अवधि में नियमित न्यायालयी कार्य सीमित रूप से संचालित किए जाते हैं और विशेष अवकाशकालीन बेंच केवल जरूरी मामलों की सुनवाई करती हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष बेंचों का गठन भी किया है।
कानूनी जगत में शुरू हुई चर्चा
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की इस टिप्पणी के बाद कानूनी समुदाय में बहस शुरू हो गई है।
कुछ लोग इसे युवा वकीलों को प्रोत्साहित करने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि
सभी बेंचों में एक समान प्रक्रिया होनी चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
पहले भी उठ चुका है यह मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौखिक मेंशनिंग को लेकर पहले भी
कई बार चर्चा हो चुकी है। पिछले वर्षों में अदालत ने मेंशनिंग और तत्काल सूचीकरण की
प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए कई प्रशासनिक बदलाव किए थे।
न्यायपालिका में सुधार की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया में
अधिक अवसर और संतुलन लाने का प्रयास है। इससे युवा अधिवक्ताओं को अदालत में
सीधे अपनी बात रखने और अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष भी अवकाशकालीन अवधि के दौरान जरूरी मामलों की
सुनवाई के लिए कई विशेष बेंच गठित की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को जरूरी मामलों में
न्यायिक राहत उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ द्वारा अवकाशकालीन बेंच में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की
मौखिक मेंशनिंग और पेशी पर रोक संबंधी टिप्पणी ने कानूनी जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। अदालत का कहना है कि
इससे युवा वकीलों को अवसर मिलेगा और न्यायिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। आने वाले समय में
यह व्यवस्था न्यायिक कार्यप्रणाली पर कितना प्रभाव डालती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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