CBSE के On-Screen Marking
CBSE के नए On-Screen Marking सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
CBSE के 2026 बोर्ड रिजल्ट के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बोर्ड द्वारा पहली बार बड़े स्तर पर लागू किए गए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। छात्रों का आरोप है कि धुंधली स्कैन कॉपियां, पोर्टल क्रैश, पेमेंट फेलियर और तकनीकी गड़बड़ियों ने उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर दिया।
सोशल मीडिया पर हजारों छात्र अपने कम नंबरों और खराब मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कई छात्रों ने इसे “डिजिटल फेलियर” और “रिजल्ट डिजास्टर” तक बता दिया।
“धुंधली कॉपियों में कैसे देते नंबर?”
CBSE एग्जामिनर्स ने भी सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। कुछ शिक्षकों का कहना है कि कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन की गई कॉपियां ठीक से दिखाई नहीं दे रही थीं। कई बार एक पेज खुलने में काफी समय लग जाता था और कई उत्तर पढ़ना बेहद मुश्किल हो रहा था।
एक एग्जामिनर ने दावा किया कि कई बार “विवेक” के आधार पर नंबर देने पड़े क्योंकि कॉपी के हिस्से साफ दिखाई ही नहीं दे रहे थे। इस खुलासे के बाद छात्रों और अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।
पोर्टल क्रैश और पेमेंट फेलियर से बढ़ी परेशानी
रिजल्ट के बाद जब छात्र री-इवैल्यूएशन और कॉपी देखने के लिए CBSE पोर्टल पर पहुंचे तो वहां भी भारी तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। कई छात्रों ने शिकायत की कि पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था, पेमेंट फेल हो रही थी और स्कैन कॉपियां डाउनलोड नहीं हो पा रही थीं।
कुछ मामलों में छात्रों को चार विषयों की कॉपी के लिए लाखों रुपये की फीस दिखाई देने लगी, जिससे सोशल मीडिया पर मीम्स और गुस्सा दोनों बढ़ गए।
कम नंबर आने पर छात्रों में नाराजगी
कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें उम्मीद से काफी कम नंबर मिले हैं। कुछ छात्रों ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने JEE Main में अच्छा स्कोर किया लेकिन CBSE बोर्ड में बेहद कम अंक आए।
छात्रों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में कई उत्तरों को सही तरीके से जांचा ही नहीं गया। इसी वजह से अब OSM सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
CBSE ने क्या सफाई दी?
CBSE ने अपने On-Screen Marking सिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता, सटीकता और तेजी लाने के लिए शुरू की गई थी। बोर्ड का कहना है कि OSM सिस्टम मूल्यांकन को अधिक आधुनिक और कुशल बनाता है।
हालांकि लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।
IIT मद्रास और IIT कानपुर के विशेषज्ञों को तकनीकी
समस्याएं सुधारने के लिए शामिल किए जाने की खबर भी सामने आई है।
हैकिंग और सुरक्षा को लेकर भी बढ़ी चिंता
इस विवाद के बीच एक साइबर रिसर्चर ने OSM पोर्टल में
सुरक्षा खामियों का दावा किया, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
हालांकि CBSE ने स्पष्ट किया कि असली मूल्यांकन पोर्टल हैक नहीं हुआ था
और वायरल दावा केवल टेस्ट प्लेटफॉर्म से जुड़ा था।
फिर भी इस घटना ने डिजिटल सुरक्षा और छात्रों के डेटा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा #CBSEFail
इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर CBSE OSM सिस्टम को लेकर हजारों पोस्ट वायरल हो रहे हैं।
छात्र “Our Future Is Not A Game” और “CBSEFail” जैसे हैशटैग चला रहे हैं।
कई वीडियो में छात्र धुंधली कॉपियां और गलत मार्किंग दिखाकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
क्या बदलेगा CBSE का डिजिटल सिस्टम?
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन भविष्य की जरूरत है, लेकिन इतनी बड़ी परीक्षा प्रणाली में
तकनीकी तैयारी और बैकअप व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी है। अगर समय रहते समस्याओं को
ठीक नहीं किया गया तो लाखों छात्रों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
CBSE का On-Screen Marking सिस्टम आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था,
लेकिन शुरुआती तकनीकी गड़बड़ियों ने इसे विवादों में ला दिया है। धुंधली कॉपियां,
पोर्टल फेलियर और कम नंबरों की शिकायतों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि CBSE और शिक्षा मंत्रालय इस संकट को
कैसे संभालते हैं और क्या आने वाले समय में छात्रों को राहत मिल पाएगी।
read this post :आगरा को बुलेट ट्रेन की सौगात! दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर से जुड़ेगा शहर
