चीन
चीन और अमेरिका के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा एक बार फिर चर्चा में है। चीन के सरकारी प्रसारण से जुड़े एक वीडियो में रेगिस्तानी इलाके में अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत जैसे दिखने वाले विशाल नकली लक्ष्य पर मिसाइल हमला होता दिखाई दे रहा है। वीडियो में मिसाइल लॉन्च होने के बाद लक्ष्य पर जोरदार विस्फोट का दृश्य नजर आता है। सोशल मीडिया पर इस मिसाइल की पहचान चीन की DF-26B एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में की जा रही है, जिसे अक्सर ‘कैरियर किलर’ कहा जाता है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद अमेरिका की नौसैनिक सुरक्षा और चीन की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, वीडियो की तारीख, मिसाइल का सटीक प्रकार और परीक्षण के वास्तविक परिणाम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। कुछ रक्षा विश्लेषणों के अनुसार, यह फुटेज दिसंबर 2024 में प्रसारित हुए पुराने वीडियो से भी मेल खाता है। इसलिए इसे बिल्कुल नया परीक्षण मानने से पहले सावधानी जरूरी है।
क्या दिखाया गया है चीन के मिसाइल हमले वाले वीडियो में?
वीडियो में सबसे पहले एक रेगिस्तानी इलाके से मिसाइल को लॉन्च होते दिखाया गया है। इसके बाद एक छोटे दृश्य में रेल पटरी पर रखे जहाज के आकार के लक्ष्य का नजारा दिखाई देता है। फिर वीडियो में विमानवाहक पोत जैसी संरचना पर मिसाइल के गिरने और बड़े विस्फोट का दृश्य सामने आता है।
यह लक्ष्य किसी वास्तविक अमेरिकी युद्धपोत के बजाय परीक्षण के लिए तैयार किया गया नकली मॉडल बताया जा रहा है। चीन के शिनजियांग क्षेत्र के तकलामकान रेगिस्तान में पिछले कई वर्षों से अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों जैसे दिखने वाले लक्ष्य बनाए जाने की जानकारी सामने आती रही है।
इन मॉडलों का उद्देश्य सैन्य परीक्षण और हथियारों की क्षमता का आकलन करना हो सकता है। कुछ लक्ष्यों को रेल प्रणाली पर रखा गया है, जिससे जहाज की गति जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया जा सके। हालांकि, किसी स्थिर या सीमित गति वाले नकली लक्ष्य को निशाना बनाना खुले समुद्र में लगातार दिशा और गति बदल रहे वास्तविक युद्धपोत को मार गिराने के बराबर नहीं है।
DF-26B मिसाइल क्या है और इसे ‘कैरियर किलर’ क्यों कहते हैं?
DF-26 चीन की सड़क से ले जाई जा सकने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है। यह ठोस ईंधन से संचालित दो चरणों वाली मिसाइल है। इसके अलग-अलग संस्करण पारंपरिक और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम माने जाते हैं।
इसकी अनुमानित मारक दूरी लगभग 4,000 किलोमीटर बताई जाती है, हालांकि अलग-अलग आकलनों में इसकी क्षमता को लेकर कुछ अंतर मिलता है। DF-26B को इसका एंटी-शिप संस्करण माना जाता है, जिसका संभावित उद्देश्य समुद्र में मौजूद बड़े सैन्य जहाजों को निशाना बनाना है।
इसे ‘कैरियर किलर’ कहे जाने की वजह इसकी लंबी दूरी और विमानवाहक पोत जैसे बड़े नौसैनिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की कथित क्षमता है। अमेरिका के विमानवाहक पोत उसकी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन पोतों के साथ युद्धपोतों, पनडुब्बियों और अन्य सुरक्षा प्रणालियों का समूह भी तैनात रहता है।
यदि किसी देश के पास लंबी दूरी से ऐसे समूहों को खतरे में डालने वाली प्रभावी मिसाइल प्रणाली हो, तो इससे समुद्र में उसकी सैन्य रणनीति प्रभावित हो सकती है। लेकिन किसी मिसाइल की वास्तविक क्षमता का आकलन केवल प्रचार वीडियो से नहीं किया जा सकता। इसके लिए लक्ष्य की गति, मिसाइल की गाइडेंस प्रणाली, सेंसर, सटीकता और वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में परीक्षण के प्रमाण जरूरी होते हैं।
तकलामकान रेगिस्तान में क्यों बनाए जा रहे अमेरिकी युद्धपोतों के मॉडल?
चीन के शिनजियांग क्षेत्र में स्थित तकलामकान रेगिस्तान में अमेरिकी युद्धपोतों से मिलते-जुलते मॉडल और परीक्षण ढांचे पहले भी सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दिए हैं। इनमें विमानवाहक पोत और अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक युद्धपोतों जैसी संरचनाएं शामिल बताई गई हैं।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मॉडल हथियारों की जांच, निशाना साधने की क्षमता और अलग-अलग युद्ध परिस्थितियों का अभ्यास करने के लिए उपयोगी हो सकते हैं। रेल पर लगाए गए लक्ष्य के जरिए चलते हुए जहाज जैसी स्थिति तैयार करने की कोशिश भी की जा सकती है।
इन परीक्षण स्थलों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि चीन अपनी समुद्री सीमाओं के आसपास विदेशी नौसेनाओं की गतिविधियों को सीमित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। सैन्य भाषा में इसे एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल यानी A2/AD रणनीति कहा जाता है। इसका उद्देश्य संभावित विरोधी सेनाओं के लिए किसी क्षेत्र में प्रवेश करना और
वहां लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाना कठिन बनाना है।
हालांकि, किसी परीक्षण केंद्र में बनाए गए नकली जहाज पर हमला सफल होने का अर्थ
यह नहीं है कि वास्तविक युद्ध में हर बार ऐसा ही परिणाम मिलेगा।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा
अमेरिका और चीन के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र, ताइवान और दक्षिण चीन सागर को लेकर
रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लंबे समय से जारी है। दोनों देश अपनी नौसैनिक ताकत,
मिसाइल प्रणाली, निगरानी तकनीक और रक्षा क्षमताओं को लगातार विकसित कर रहे हैं।
चीन की लंबी दूरी की मिसाइलें अमेरिकी नौसेना के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती हैं। दूसरी ओर,
अमेरिका अपने विमानवाहक पोतों, मिसाइल रक्षा प्रणालियों, पनडुब्बियों और सहयोगी देशों के साथ
सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान देता रहा है।
यदि भविष्य में ताइवान या पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है, तो लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें महत्वपूर्ण
भूमिका निभा सकती हैं। लेकिन किसी भी संघर्ष का परिणाम केवल एक मिसाइल प्रणाली पर निर्भर नहीं करेगा।
खुफिया जानकारी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, हवाई सुरक्षा, नौसैनिक रक्षा और सैन्य रणनीति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होंगी।
फिलहाल वायरल वीडियो को चीन की मिसाइल क्षमता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
लेकिन इसकी वास्तविक तारीख और परीक्षण से जुड़ी तकनीकी जानकारियां स्पष्ट होने तक इसे नए और
निर्णायक सैन्य परीक्षण का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. चीन के वायरल वीडियो में क्या दिखाया गया है?
वीडियो में रेगिस्तानी इलाके में मिसाइल लॉन्च होने और अमेरिकी विमानवाहक पोत
जैसे दिखने वाले नकली लक्ष्य पर विस्फोट का दृश्य दिखाई देता है।
2. DF-26B मिसाइल क्या है?
DF-26B को चीन की DF-26 मिसाइल प्रणाली का एंटी-शिप संस्करण माना जाता है।
इसका संभावित उद्देश्य समुद्र में मौजूद बड़े युद्धपोतों को निशाना बनाना है।
3. DF-26 मिसाइल की मारक दूरी कितनी है?
इसके परिवार की मिसाइलों की अनुमानित मारक दूरी लगभग 4,000 किलोमीटर बताई जाती है।
अलग-अलग स्रोतों में अनुमान अलग हो सकते हैं।
4. DF-26B को कैरियर किलर क्यों कहा जाता है?
इसे यह नाम इसलिए दिया जाता है क्योंकि इसे लंबी दूरी से विमानवाहक पोत
जैसे बड़े नौसैनिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम माना जाता है।
5. क्या चीन ने असली अमेरिकी विमानवाहक पोत को निशाना बनाया है?
नहीं। उपलब्ध वीडियो में रेगिस्तान में बने विमानवाहक पोत जैसे नकली लक्ष्य को निशाना बनाते दिखाया गया है,
वास्तविक अमेरिकी युद्धपोत को नहीं।
6. क्या यह नवंबर 2026 का नया मिसाइल परीक्षण है?
इसकी पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध विश्लेषण में वीडियो के कुछ
दृश्य दिसंबर 2024 में सामने आए फुटेज से मिलते-जुलते बताए गए हैं।
7. क्या यह मिसाइल वास्तविक युद्ध में चलते हुए जहाज को मार सकती है?
इसकी वास्तविक क्षमता का आकलन करने के लिए चलते हुए लक्ष्य पर परीक्षण, गाइडेंस तकनीक और
स्वतंत्र तकनीकी प्रमाण जरूरी हैं। केवल नकली लक्ष्य पर हमले का वीडियो निर्णायक प्रमाण नहीं है।
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