युवा वाहिनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन
सामाजिक न्याय की मांग को लेकर सक्रिय हुआ संगठन
गोरखपुर स्थित सामाजिक संगठन निषाद युवा वाहिनी ने निषाद समाज के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। संगठन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर निषाद समाज की विभिन्न उपजातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी किए जाने की मांग की है। इस मांग के बाद एक बार फिर निषाद समाज के आरक्षण और सामाजिक पहचान का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
कई उपजातियों को शामिल करने की मांग
ज्ञापन में निषाद, केवट, मल्लाह, धीवर, कश्यप, बिंद, तुरहा और अन्य पारंपरिक जलजीवी समुदायों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि इन जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति लंबे समय से कमजोर रही है और इन्हें संवैधानिक संरक्षण की आवश्यकता है।
ऐतिहासिक और सामाजिक आधार का दिया हवाला
निषाद युवा वाहिनी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि निषाद समाज का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। समाज के लोग परंपरागत रूप से नदियों, जल संसाधनों, मत्स्य पालन और नाव संचालन जैसे व्यवसायों से जुड़े रहे हैं। संगठन का दावा है कि समय के साथ आर्थिक और सामाजिक रूप से यह समाज पिछड़ता चला गया, इसलिए इसे विशेष संरक्षण दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री से सकारात्मक निर्णय की अपील
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि पश्चिम बंगाल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी निषाद समाज की उपजातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाए। संगठन का मानना है कि इससे लाखों लोगों को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
युवाओं के भविष्य का उठाया मुद्दा
संगठन ने कहा कि समाज के युवा आज भी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यदि समाज को अनुसूचित जाति का लाभ मिलता है तो युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रखी मांग
निषाद युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील चंद साहनी एडवोकेट के नेतृत्व में यह ज्ञापन भेजा गया है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज को उसके अधिकार दिलाने के लिए संगठन लगातार संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
समाज में बढ़ी चर्चा
ज्ञापन सार्वजनिक होने के बाद निषाद समाज और अन्य सामाजिक संगठनों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कई लोगों ने इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है। समाज के लोगों का कहना है कि
लंबे समय से चली आ रही मांग पर अब ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।
संगठन चलाएगा जनजागरण अभियान
निषाद युवा वाहिनी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस मांग को लेकर
व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। संगठन प्रदेश के विभिन्न जिलों में समाज के
लोगों को जागरूक करने और उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।
सरकार के फैसले पर टिकी नजर
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। यदि इस मांग पर सकारात्मक
निर्णय लिया जाता है तो इसका प्रभाव प्रदेश के लाखों निषाद समाज के लोगों पर पड़ सकता है।
फिलहाल ज्ञापन के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का दौर शुरू हो गया है।
निषाद युवा वाहिनी द्वारा मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन सामाजिक न्याय और समान
अधिकारों की मांग को लेकर उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
संगठन ने निषाद समाज की विभिन्न उपजातियों को अनुसूचित जाति का
प्रमाण पत्र जारी करने की मांग कर सरकार का ध्यान
इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। आने वाले दिनों में
इस विषय पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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