भारत में Guardian-1 एंटी-ड्रोन सिस्टम
ड्रोन के बढ़ते खतरे के बीच भारत में एंटी-ड्रोन तकनीक को लेकर एक अहम समझौता हुआ है। भारतीय कंपनी Paras Defence and Space Technologies ने अमेरिकी रक्षा तकनीक कंपनी Powerus की सहायक कंपनी Tandem Defense LLC के साथ Guardian-1 Interceptor के लिए लाइसेंसिंग समझौता किया है।
इस समझौते के तहत Paras Defence को भारत में Guardian-1 तकनीक का इस्तेमाल करके इसके उत्पादों के निर्माण और व्यावसायीकरण का विशेष अधिकार मिला है। यह समझौता जून 2026 में हुआ था और इसकी शुरुआती अवधि 12 महीने रखी गई है। आपसी सहमति से इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
क्या है Guardian-1 एंटी-ड्रोन सिस्टम?
Guardian-1 एक हाई-स्पीड, बैटरी से चलने वाला काउंटर-ड्रोन इंटरसेप्टर सिस्टम है। इसे कम लागत वाले ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से निपटने के लिए विकसित किया गया है।
ड्रोन तकनीक के सैन्य इस्तेमाल में तेजी आने के साथ ऐसे सिस्टम की जरूरत बढ़ी है। Guardian-1 को ऐसे हवाई खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है, जिनका इस्तेमाल निगरानी, हमले या महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।
Paras Defence को क्या मिला अधिकार?
लाइसेंसिंग समझौते के अनुसार Paras Defence को भारत में Guardian-1 की लाइसेंस प्राप्त बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल करने का विशेष अधिकार दिया गया है।
कंपनी इस तकनीक के आधार पर भारत में उत्पादों का निर्माण और उनका व्यावसायीकरण कर सकेगी। उपलब्ध विवरण के अनुसार लाइसेंस exclusive, non-transferable और non-sublicensable है।
यानी भारत के घरेलू बाजार के लिए इस तकनीक के निर्माण और व्यावसायिक इस्तेमाल में Paras Defence की विशेष भूमिका रहेगी।
समझौते की अवधि कितनी है?
Guardian-1 से संबंधित लाइसेंसिंग समझौते की शुरुआती अवधि 12 महीने है। दोनों पक्षों की सहमति होने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
समझौते के तहत Paras Defence को लाइसेंस फीस का भुगतान करना होगा और भारत में उत्पादों की बिक्री से होने वाले शुद्ध मुनाफे में हिस्सा भी साझा करना होगा।
भारत में ही होगा निर्माण
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विदेशी तकनीक को भारत में निर्माण और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
Paras Defence Guardian-1 से संबंधित उत्पादों को भारतीय बाजार के लिए तैयार और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाएगी। इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी तकनीक के साथ स्थानीय उत्पादन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
क्या भारतीय सेना ने Guardian-1 का ऑर्डर दिया है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार Paras Defence और Powerus के बीच लाइसेंसिंग समझौता हुआ है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि भारतीय सशस्त्र बलों ने Guardian-1 के लिए खरीद ऑर्डर भी दे दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार अभी तक भारतीय सैन्य बलों की ओर से इस सिस्टम के लिए किसी ऑर्डर की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ट्रंप परिवार से Powerus का क्या संबंध है?
Powerus एक अमेरिकी ड्रोन और रक्षा तकनीक कंपनी है। कंपनी के कॉरपोरेट ढांचे से जुड़े निवेश रिकॉर्ड में Donald Trump Jr. और Eric Trump को notable investors के रूप में बताया गया है।
कंपनी से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा है कि ट्रंप परिवार के निवेशक कंपनी के संचालन में शामिल नहीं हैं और उनके पास परिचालन नियंत्रण नहीं है। Donald Trump Jr. के प्रतिनिधि ने भी उन्हें passive investor बताया है।
इसलिए खबर में “ट्रंप से जुड़ी कंपनी” कहे जाने का संदर्भ मुख्य रूप से कंपनी से जुड़े निवेश संबंधों से है, न कि यह कि Donald Trump या उनके परिवार के सदस्य कंपनी के दैनिक संचालन को नियंत्रित करते हैं।
पाकिस्तान से हुए समझौते के बाद क्यों चर्चा में है भारत का सौदा?
Powerus ने सितंबर 2026 में पाकिस्तान के साथ भी रक्षा क्षेत्र में एक समझौते और
ड्रोन सिस्टम से संबंधित शुरुआती ऑर्डर की जानकारी दी है। पाकिस्तान से
संबंधित ऑर्डर की कीमत और तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
भारत का Guardian-1 लाइसेंसिंग समझौता इससे पहले जून 2026 में किया गया था।
यानी भारत से संबंधित समझौता पाकिस्तान वाले हालिया घटनाक्रम से पहले हुआ था।
दोनों समझौतों की प्रकृति भी अलग है। भारत में Guardian-1 के निर्माण और व्यावसायीकरण के
अधिकार से संबंधित लाइसेंसिंग व्यवस्था है, जबकि पाकिस्तान से जुड़ा समझौता ड्रोन और
मानवरहित प्रणालियों से संबंधित सहयोग तथा शुरुआती ऑर्डर से जुड़ा बताया गया है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है एंटी-ड्रोन तकनीक?
आधुनिक युद्ध में छोटे और अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। इनका उपयोग
निगरानी से लेकर हमले तक के लिए किया जा सकता है।
ऐसे में बड़े और महंगे हथियारों के बजाय कम लागत वाले
ड्रोन को रोकने वाली तकनीक की जरूरत भी बढ़ रही है।
Guardian-1 जैसे इंटरसेप्टर सिस्टम इसी तरह के हवाई खतरों से निपटने के लिए विकसित किए गए हैं।
भारत में इसके निर्माण का विकल्प मिलने से देश में
काउंटर-ड्रोन तकनीक के उत्पादन और आपूर्ति की क्षमता बढ़ सकती है।
भारत के रक्षा उद्योग को मिल सकता है फायदा
विदेशी तकनीक के लाइसेंस के साथ भारत में उत्पादन शुरू करने से स्थानीय
रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को फायदा मिलने की संभावना है। इसके साथ ही
भारतीय कंपनी को तकनीक के व्यावसायिक इस्तेमाल और बाजार विकास का अनुभव भी मिलेगा।
हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि Guardian-1 का
भारतीय बाजार में कितना उपयोग होता है, उत्पादन कितनी तेजी से बढ़ता है और
भविष्य में इसे सरकारी या निजी सुरक्षा संस्थानों से कितने ऑर्डर मिलते हैं।
Guardian-1 समझौते की प्रमुख बातें
- भारतीय कंपनी: Paras Defence and Space Technologies
- अमेरिकी पक्ष: Tandem Defense LLC
- मूल तकनीक: Powerus
- सिस्टम: Guardian-1 Interceptor
- तकनीक: हाई-स्पीड, बैटरी आधारित काउंटर-ड्रोन सिस्टम
- भारत में अधिकार: निर्माण और व्यावसायीकरण
- लाइसेंस: विशेष अधिकार
- शुरुआती अवधि: 12 महीने
- अवधि बढ़ाने का विकल्प: दोनों पक्षों की सहमति से
- भारतीय सेना के खरीद ऑर्डर की सार्वजनिक पुष्टि: अभी नहीं
- Powerus से जुड़े निवेशकों में Donald Trump Jr. और Eric Trump का नाम: कंपनी रिकॉर्ड/रिपोर्टों में उल्लेखित
- पाकिस्तान के साथ Powerus का अलग रक्षा सहयोग: सितंबर 2026 में सामने आया।
निष्कर्ष
Guardian-1 के लिए हुआ लाइसेंसिंग समझौता भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में
काउंटर-ड्रोन तकनीक के स्थानीय उत्पादन की दिशा में एक नया घटनाक्रम है। Paras Defence को भारत में
इस तकनीक के निर्माण और व्यावसायीकरण का विशेष अधिकार मिला है।
हालांकि इसे अभी भारतीय सेना की खरीद डील के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फिलहाल मुख्य तथ्य यह है कि Guardian-1 तकनीक को
भारत में बनाने और बाजार में उतारने के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था तैयार हुई है।
आगे इसकी वास्तविक उपयोगिता और प्रभाव उत्पादन, परीक्षण तथा संभावित खरीद पर निर्भर करेगा।
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