ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में
28 सितंबर 2026: ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट में एक और अमेरिकी मानवरहित अंडरवॉटर व्हीकल यानी पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन को कब्जे में लिया है। ईरान ने इसे REMUS 600 बताया और आरोप लगाया कि यह निगरानी या जासूसी गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
हालांकि, अमेरिकी सैन्य कमान CENTCOM ने ईरान के इस दावे को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसके सभी सक्रिय ड्रोन सिस्टम उसके नियंत्रण में हैं। ऐसे में फिलहाल घटना को लेकर दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से अलग हैं।
ईरान ने क्या दावा किया?
IRGC की नौसेना के मुताबिक, उसके बलों ने खुफिया जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं से जुड़े एक समन्वित अभियान के दौरान अमेरिकी अंडरवॉटर व्हीकल को पकड़ा।
ईरानी पक्ष ने दावा किया कि यह ड्रोन होर्मुज स्ट्रेट में निगरानी गतिविधि कर रहा था। IRGC के अनुसार, वाहन अब उसके विशेषज्ञों के कब्जे में है और उससे जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
ईरान की ओर से जारी फुटेज में भी एक अंडरवॉटर वाहन दिखाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो में दिख रहा उपकरण वास्तव में अमेरिकी सैन्य ड्रोन ही है।
REMUS 600 क्या है?
REMUS 600 एक ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV) है, यानी ऐसा पानी के नीचे चलने वाला वाहन जिसे विभिन्न मिशनों के लिए बिना प्रत्यक्ष चालक के संचालित किया जा सकता है।
इस तरह के सिस्टम का इस्तेमाल समुद्र के भीतर निगरानी, समुद्री तल का सर्वेक्षण, अंडरवॉटर निरीक्षण और माइन-काउंटरमेजर जैसी गतिविधियों में किया जा सकता है। REMUS 600 की अधिकतम ऑपरेशनल गहराई करीब 600 मीटर तक बताई जाती है।
हालांकि, ईरान के शुरुआती दावे में वाहन को REMUS 600 बताया गया था, जबकि बाद की रिपोर्टों में IRGC ने इसे Mk 18 Mod 2 Kingfish के रूप में भी पहचानने की बात कही। इस पहचान में बदलाव के कारण उपकरण की सही पहचान को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
अमेरिका ने ईरान के दावे को किया खारिज
ईरान के दावे के बाद अमेरिकी सैन्य कमान ने इसे खारिज किया। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सभी ऑपरेशनल ड्रोन एसेट्स पर नियंत्रण बनाए हुए है। इसका मतलब है कि अमेरिकी पक्ष ईरान द्वारा किसी सक्रिय अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को कब्जे में लेने की बात स्वीकार नहीं कर रहा है।
इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान ने जिस अंडरवॉटर सिस्टम को दिखाया है, वह अमेरिकी सैन्य संपत्ति है या नहीं।
इस महीने दूसरी बार ड्रोन कब्जे का दावा
यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने सितंबर 2026 में अमेरिकी अंडरवॉटर सिस्टम को कब्जे में लेने का दावा किया है।
इससे पहले 8 सितंबर को IRGC ने एक अन्य अमेरिकी अंडरवॉटर वाहन को कब्जे में लेने की बात कही थी। उस समय ईरान ने वाहन की पहचान Dive-LD के रूप में की थी। यह सिस्टम अमेरिकी रक्षा तकनीक कंपनी Anduril से जुड़ा बताया गया था।
अमेरिकी पक्ष ने उस पिछली घटना को भी अलग तरीके से पेश किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि वह वाहन पहले ही खराब हो चुका था और घटना से पहले से ही ऑपरेशनल स्थिति में नहीं था।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है।
दुनिया के ऊर्जा कारोबार के लिए इसकी रणनीतिक अहमियत बहुत अधिक है। यहां सैन्य गतिविधियों या जहाजों की आवाजाही में किसी भी बड़े व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर असर पड़ सकता है।
इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव केवल दोनों देशों के बीच
सैन्य विवाद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
होर्मुज को लेकर ईरान का रुख
IRGC ने अपने बयान में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कड़ा रुख दोहराया है। ईरानी पक्ष ने कहा है कि वह कथित तौर पर
खतरनाक गतिविधियों और बिना अनुमति वाली आवाजाही के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा।
दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच इस जलमार्ग को लेकर कूटनीतिक और
सैन्य तनाव पहले से बना हुआ है। हालिया घटनाक्रमों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है।
क्या ईरान ने सच में अमेरिकी ड्रोन पकड़ा?
अभी इस सवाल का स्वतंत्र और निर्णायक जवाब उपलब्ध नहीं है।
ईरान का दावा: IRGC का कहना है कि उसने अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को पकड़ लिया है और
उससे डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
अमेरिका का दावा: CENTCOM का कहना है कि उसके सभी सक्रिय ड्रोन उसके नियंत्रण में हैं।
इसलिए खबर को फिलहाल ईरान के दावे और अमेरिकी खंडन के रूप में देखना उचित है।
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं हुई है कि
अमेरिकी सैन्य ड्रोन वास्तव में ईरान के कब्जे में गया है।
आगे क्या हो सकता है?
यदि दोनों देशों के बीच अंडरवॉटर ड्रोन और समुद्री निगरानी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी रहते हैं, तो
होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल ड्रोन की वास्तविक पहचान,
उसके संचालन की स्थिति और कथित कब्जे की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर है
FAQ
1. ईरान ने किस अमेरिकी ड्रोन को पकड़ने का दावा किया है?
ईरान के IRGC ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट में एक
अमेरिकी ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल को कब्जे में लिया है और इसे REMUS 600 बताया है।
2. क्या अमेरिका ने ईरान के दावे की पुष्टि की है?
नहीं। अमेरिकी CENTCOM ने ईरान के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि
उसके सभी ऑपरेशनल ड्रोन एसेट्स उसके नियंत्रण में हैं।
3. REMUS 600 क्या है?
REMUS 600 एक स्वायत्त अंडरवॉटर व्हीकल है, जिसका इस्तेमाल समुद्र के भीतर निगरानी,
सर्वेक्षण, निरीक्षण और अन्य समुद्री मिशनों में किया जा सकता है।
4. ईरान ने इससे पहले कब अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन पकड़ने का दावा किया था?
ईरान ने इससे पहले 8 सितंबर 2026 को एक अन्य अमेरिकी अंडरवॉटर
वाहन को कब्जे में लेने का दावा किया था। उसे Dive-LD बताया गया था।
5. क्या ईरान के कब्जे में अमेरिकी ड्रोन होने की स्वतंत्र पुष्टि हुई है?
अभी नहीं। ईरान का दावा और अमेरिकी खंडन दोनों सामने हैं,
लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
6. होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी
बड़े सैन्य या समुद्री व्यवधान का असर ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
7. ईरान और अमेरिका के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है?
होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य गतिविधियां, समुद्री आवाजाही और निगरानी अभियानों को लेकर
दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। हालिया ड्रोन विवाद ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है
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