नोएडा STF की जांच में हाईटेक नकल गिरोह
नोएडा, 21 अगस्त 2026: प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक के खिलाफ चल रही जांच में नोएडा एसटीएफ को बड़ा सुराग मिला है। पूछताछ में सामने आया है कि हाईटेक तरीके से नकल कराने वाला गिरोह केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं था, बल्कि उसके तार परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं और तकनीकी सिस्टम से भी जुड़े होने की आशंका है। जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों को परीक्षा केंद्रों के कंप्यूटर सिस्टम, निगरानी व्यवस्था और तकनीकी ढांचे की जानकारी थी।
एसटीएफ के अनुसार, 31 जुलाई को गिरफ्तार किए गए आरोपी लोकेश से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। आरोपी के पास से 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन बरामद की गई थीं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कितनी प्रतियोगी परीक्षाओं में किया गया और इस पूरे नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे।
परीक्षा केंद्रों की अंदरूनी जानकारी जुटाता था नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि गिरोह की कार्यप्रणाली केवल अभ्यर्थियों को नकल कराने तक सीमित नहीं थी। नेटवर्क से जुड़े लोगों को परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, कंप्यूटर सिस्टम और निगरानी तंत्र की जानकारी होने की बात सामने आई है।
इस जानकारी का इस्तेमाल ऑनलाइन परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने के लिए किया जाता था। एसटीएफ अब यह जांच कर रही है कि क्या परीक्षा केंद्रों के अंदर मौजूद कर्मचारियों, तकनीकी स्टाफ या पूर्व कर्मचारियों में से किसी का इस नेटवर्क से संपर्क था।
जांच एजेंसी का फोकस उन परीक्षा केंद्रों पर भी है जहां पहले किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या नकल की शिकायत सामने आई थी। अधिकारियों द्वारा संदिग्ध केंद्रों के कर्मचारियों और आरोपियों के बीच संभावित संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन ने खोले कई राज
पूछताछ में आरोपी लोकेश की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उसके पास से बरामद 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन ने जांच को नया मोड़ दिया है।
एसटीएफ को जानकारी मिली है कि लोकेश वर्ष 2017 से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार कर अलग-अलग राज्यों में सक्रिय नकल गिरोहों को उपलब्ध करा रहा था। जरूरत के हिसाब से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग-अलग प्रकार के उपकरण तैयार किए जाते थे।
जांच के मुताबिक यह किसी एक परीक्षा या एक शहर तक सीमित व्यवस्था नहीं थी। अब तक की जांच में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में नेटवर्क के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है।
सात-आठ साल से चल रहे नेटवर्क की आशंका
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लंबे समय से आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिछले सात से आठ वर्षों में यह नेटवर्क कितनी परीक्षाओं तक पहुंचा।
जांच का एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि इस नेटवर्क की मदद से कितने अभ्यर्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित लाभ लेने की कोशिश की। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में सक्रिय नकल गिरोहों तक उपकरण पहुंचाने वाले लोगों और उनके संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
यदि जांच में किसी परीक्षा केंद्र के कर्मचारी या तकनीकी स्टाफ की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
22 मई को सामने आया था हाईटेक नकल का मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत 22 मई 2026 को नोएडा के नॉलेज पार्क क्षेत्र स्थित एक परीक्षा केंद्र में हुई जांच से जुड़ी है। उस समय एसएससी की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान हाईटेक तरीके से नकल कराने का मामला सामने आया था।
जांच में प्रॉक्सी सर्वर और तकनीकी माध्यमों से परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने की कोशिश का पता चला था। इस मामले में शुरुआत में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
इसके बाद इंद्रजीत उर्फ योगी की गिरफ्तारी और पूछताछ के दौरान अलवर निवासी लोकेश का नाम सामने आया। आगे की जांच में लोकेश से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दूसरे राज्यों में सक्रिय नेटवर्क की जानकारी एसटीएफ के सामने आई।
दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा भी जांच के दायरे में
अब एसटीएफ की जांच का दायरा एसएससी परीक्षा से आगे बढ़ गया है। पूछताछ में सामने आए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा समेत अन्य प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में हुआ या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी उपकरणों की सप्लाई से संबंधित तारीखों और अलग-अलग राज्यों में आयोजित ऑनलाइन परीक्षाओं की तारीखों का मिलान कर रही है। यदि किसी उपकरण की सप्लाई और किसी परीक्षा की तारीख के बीच सीधा संबंध मिलता है तो उस परीक्षा को लेकर जांच और तेज की जा सकती है।
पांच राज्यों में छह से अधिक गिरोहों तक पहुंची स्क्रीन?
जांच के दौरान एसटीएफ के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल आया है कि बरामद और तैयार किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आखिर किन-किन लोगों और गिरोहों तक पहुंचे।
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पांच राज्यों में सक्रिय छह से अधिक गिरोहों तक
ये स्क्रीन कैसे पहुंचीं। इसके लिए उपकरणों की सप्लाई चेन,
आरोपियों के संपर्क और अलग-अलग राज्यों में मौजूद नेटवर्क की जांच की जा रही है।
साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि 92 TFT स्क्रीन के अलावा लोकेश ने कितने
अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार किए और किन लोगों या गिरोहों को उपलब्ध कराए।
परीक्षा केंद्रों की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस खुलासे के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी
सवाल उठ रहे हैं। ऑनलाइन परीक्षाओं में कंप्यूटर सिस्टम और सर्वर सुरक्षा की
महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि किसी बाहरी नेटवर्क को परीक्षा केंद्र की तकनीकी
व्यवस्था की जानकारी मिलती है तो परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
इसी वजह से एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि
संदिग्ध लोगों को परीक्षा केंद्रों की अंदरूनी जानकारी किस
माध्यम से मिली। क्या यह जानकारी किसी कर्मचारी ने उपलब्ध कराई या आरोपियों ने किसी अन्य तरीके से सि
स्टम और निगरानी व्यवस्था की जानकारी हासिल की, यह जांच का अहम हिस्सा है।
एसटीएफ के सामने कई बड़े सवाल
जांच आगे बढ़ने के साथ एसटीएफ के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। इनमें सबसे प्रमुख
यह है कि 2017 से अब तक कितनी परीक्षाओं में इस नेटवर्क के उपकरणों का इस्तेमाल हुआ।
इसके अलावा पांच राज्यों में नेटवर्क का वास्तविक विस्तार कितना है, परीक्षा केंद्रों के
अंदर कितने लोगों से संपर्क था, कितनी भर्ती परीक्षाएं प्रभावित हुईं और कितने
उम्मीदवारों ने इस व्यवस्था का लाभ उठाया—इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार जांच में जिस भी व्यक्ति की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता के लिए बड़ा खतरा
प्रतियोगी परीक्षाओं में मेहनत करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा की निष्पक्षता
सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी संगठित नेटवर्क के जरिए कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ
मिलता है तो इससे पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
नोएडा में सामने आया मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच केवल अभ्यर्थियों तक
सीमित नहीं रही है। परीक्षा केंद्रों की तकनीकी व्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक
उपकरणों की सप्लाई और संभावित अंदरूनी संपर्कों की जांच भी की जा रही है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि लंबे समय से कई राज्यों में इस तरह का नेटवर्क सक्रिय था,
तो इससे जुड़े अन्य मामलों की भी दोबारा पड़ताल हो सकती है।
फिलहाल एसटीएफ की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों,
परीक्षा केंद्रों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
FAQs
1. नोएडा STF की जांच में क्या बड़ा खुलासा हुआ?
जांच में सामने आया है कि हाईटेक नकल कराने वाले गिरोह के तार परीक्षा केंद्रों की
व्यवस्था और तकनीकी सिस्टम से जुड़े होने की आशंका है।
2. आरोपी के पास से क्या बरामद हुआ?
आरोपी लोकेश के पास से 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन बरामद की गई थीं।
3. यह नेटवर्क कितने राज्यों में फैला होने की जानकारी मिली है?
अब तक की जांच में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में नेटवर्क होने की जानकारी सामने आई है।
4. आरोपी लोकेश की क्या भूमिका बताई गई है?
जांच के अनुसार लोकेश इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार कर अलग-अलग राज्यों में सक्रिय नकल गिरोहों को उपलब्ध कराता था।
5. हाईटेक नकल का मामला कब सामने आया था?
22 मई 2026 को नॉलेज पार्क क्षेत्र के एक परीक्षा केंद्र में ऑनलाइन परीक्षा के दौरान
हाईटेक नकल का मामला सामने आया था।
6. क्या अन्य भर्ती परीक्षाएं भी जांच के दायरे में हैं?
हां। दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा समेत कई अन्य प्रतियोगी और भर्ती
परीक्षाओं में इन उपकरणों के संभावित इस्तेमाल की जांच की जा रही है।
7. STF अब किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
एसटीएफ यह पता लगा रही है कि 2017 से अब तक कितनी परीक्षाओं में उपकरणों का इस्तेमाल हुआ,
कितने गिरोह और लोग नेटवर्क से जुड़े हैं तथा क्या परीक्षा केंद्रों के अंदर भी आरोपियों के संपर्क मौजूद थे।
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