दिल्ली HC जज नियुक्ति
दिल्ली HC जज नियुक्ति दिल्ली हाईकोर्ट में सिर्फ 3 वकील जज बने, बार एसोसिएशन ने CJI के सामने चिंता जताई। कमीशन प्रक्रिया पर सवाल, ज्यूडिशियरी में विवाद। पूरी स्टोरी, प्रभाव और अगले कदम जानें। लेटेस्ट कोर्ट न्यूज अपडेट।

Delhi हाईकोर्ट के विशाल बार से पिछले 17 महीनों में सिर्फ 3 वकीलों को जज बनाया गया है, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत के सामने गंभीर चिंता जताई है। बार ने कहा है कि इस तरह की नियुक्ति प्रक्रिया से बेंच और बार के बीच संतुलन बिगड़ रहा है और वकीलों को लग रहा है कि उच्च न्यायपालिका में बार से जज बनना अब एक अपवाद बन गया है, न कि सामान्य प्रक्रिया.
दिल्ली HC जज नियुक्ति : मामले की पृष्ठभूमि
- दिल्ली हाईकोर्ट में लगभग 47,000 अधिवक्ता सक्रिय रूप से अभ्यास कर रहे हैं,
- जो देश के सबसे बड़े बार में से एक है.
- हाल के समय में, इस विशाल बार से बहुत कम वकीलों को हाईकोर्ट के
- जज के रूप में पदोन्नत किया गया है।
- बीते 17 महीनों में दिल्ली हाईकोर्ट में बार से आए
- वकीलों में से केवल तीन को ही जज बनाया गया है,
- जिस पर बार एसोसिएशन ने गहरी चिंता जताई है.
इस मुद्दे को दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI जस्टिस सूर्यकांत के सम्मान में आयोजित अभिनंदन समारोह के दौरान सीधे उठाया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने इस अवसर पर आंकड़े पेश करते हुए कहा कि इतने बड़े बार से इतनी कम नियुक्तियां होना चिंताजनक है.
बार एसोसिएशन की चिंताएं
- DHCBA का मुख्य तर्क यह है कि उच्च न्यायपालिका में
- नियुक्तियों के दौरान बार से आने वाले अनुभवी वकीलों को
- अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है. बार का मानना है
- कि जो वकील लंबे समय तक अदालतों में काम करते हैं,
- उनके पास न्यायिक प्रणाली की गहरी समझ होती है,
- जो न्यायाधीश बनने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.
हरिहरन ने कहा कि बार से जजों की नियुक्ति अब एक सामान्य प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि एक अपवाद बन गई है. इससे बार के सदस्यों में निराशा और असहजता बढ़ रही है और बेंच व बार के बीच पारंपरिक संतुलन प्रभावित हो रहा है.
बेंच और बार के बीच संतुलन का महत्व
- बार एसोसिएशन ने जोर देकर कहा कि
- न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए नियुक्ति
- प्रक्रिया में बार की भूमिका और अनुभव को उचित महत्व दिया जाना आवश्यक है.
- जब बार से जज बनने के अवसर कम होते हैं,
- तो वकीलों को लगता है कि उनका योगदान न्यायपालिका में कम आंका जा रहा है.
इसके अलावा, बार ने यह भी कहा कि नियुक्ति और तबादले जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर बार को अंधेरे में रखा जाना उचित नहीं है. बार बराबर का भागीदार है और उसकी राय लेने से न्यायपालिका पर विश्वास बढ़ेगा.
CJI का रुख और आगे की उम्मीद
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के ऐतिहासिक योगदान की सराहना की और बार के साथ न्यायपालिका के गहरे संबंधों को याद किया. उन्होंने जस्टिस एच.आर. खन्ना के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय भी बार ने जेल में बंद वकील प्राण नाथ लेखी को अपना अध्यक्ष चुनकर संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई थी.
बार एसोसिएशन ने CJI से अपील की है कि नियुक्ति प्रक्रिया में बार की भागीदारी और पारदर्शिता बढ़ाई जाए, ताकि बेंच और बार के बीच विश्वास और संतुलन बना रहे. अब यह देखना होगा कि कॉलेजियम और सरकार इस चिंता को कितना गंभीरता से लेती है और भविष्य में बार से जजों की नियुक्ति को फिर से एक सामान्य और नियमित प्रक्रिया बनाया जा सकता है.
