PM Modi SCO Summit 2026
PM Modi SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा जहां आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के लिए कोई जगह न हो। SCO शिखर सम्मेलन में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसर भारत की प्राथमिकताओं में रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन से पहले क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भारत का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा है कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों का पूरी तरह समाधान किया जाना जरूरी है। प्रधानमंत्री के मुताबिक ये समस्याएं केवल किसी एक देश की सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति, स्थिरता और विकास के लिए गंभीर चुनौती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा पर हैं। इस दौरान वह पहले ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव से मुलाकात करेंगे और इसके बाद किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
SCO Summit में भारत का क्या रहेगा फोकस?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा से पहले भारत की प्राथमिकताओं का संकेत देते हुए कहा कि SCO के मंच पर भारत सुरक्षा, कनेक्टिविटी और नए अवसरों पर आधारित क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।
SCO एशिया के महत्वपूर्ण देशों को एक साझा मंच उपलब्ध कराता है। ऐसे में भारत के लिए यह संगठन आतंकवाद से मुकाबले के साथ-साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, डिजिटल संपर्क और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक और निर्णायक कार्रवाई की जरूरत पर जोर देता रहा है। प्रधानमंत्री के ताजा संदेश में भी इसी नीति की झलक दिखाई देती है।
आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद पर सख्त रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने के लिए प्रयास करेगा जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उनका मानना है कि इन चुनौतियों का असर केवल सुरक्षा व्यवस्था पर नहीं पड़ता, बल्कि आर्थिक विकास और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ता है।
जब किसी क्षेत्र में आतंकवाद या उग्रवाद का खतरा बढ़ता है तो निवेश, व्यापार और पर्यटन जैसी आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। इसके अलावा देशों के बीच विश्वास और सहयोग का माहौल कमजोर हो सकता है। इसलिए भारत इन मुद्दों को क्षेत्रीय विकास के साथ जोड़कर देखता है।
SCO के मंच पर भारत आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर देता रहा है। अप्रैल 2026 में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भी भारत ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से बिना किसी अपवाद के मुकाबला करने तथा आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया था।
29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में रहेंगे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के पहले चरण में 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। यह यात्रा उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही है।
दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। खास तौर पर व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयास हुए हैं। मध्य एशिया में भारत की बढ़ती भागीदारी के लिहाज से उज्बेकिस्तान एक महत्वपूर्ण साझेदार है। प्रधानमंत्री की यह यात्रा इसी व्यापक रणनीतिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने का अवसर मानी जा रही है।
शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र भी जाएंगे
ताशकंद यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थित महात्मा गांधी केंद्र का दौरा भी करेंगे।
इन स्थानों का दौरा भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और
जनस्तरीय संबंधों को दर्शाता है। दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीति और व्यापार तक सीमित नहीं हैं,
बल्कि इनके पीछे लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संपर्क भी हैं।
प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के संदर्भ में इन संबंधों के महत्व को रेखांकित किया है।
ऐसे दौरे दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर रिश्तों को मजबूत करने में भी भूमिका निभा सकते हैं।
बिश्केक में 26वें SCO Summit में होंगे शामिल
उज्बेकिस्तान के बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे।
वहां वह किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सद्यर जापारोव के निमंत्रण पर 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
भारत वर्ष 2017 से इस संगठन का सदस्य है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक सहयोग से
जुड़े मुद्दों पर संगठन के भीतर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
बिश्केक में होने वाला सम्मेलन भारत के लिए कई
महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखने का अवसर होगा।
आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के अलावा संपर्क व्यवस्था, व्यापार,
निवेश और विकास से जुड़े विषय भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
मध्य एशिया के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को भारत की मध्य एशिया नीति के संदर्भ में भी
महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों में व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा,
डिजिटल संपर्क और रणनीतिक सहयोग की भूमिका लगातार बढ़ी है।
भारत के लिए मध्य एशिया भौगोलिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
इस क्षेत्र के साथ बेहतर संपर्क भारत के व्यापारिक हितों को बढ़ावा दे सकता है।
साथ ही ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दों पर भी सहयोग की संभावनाएं हैं।
इसी वजह से प्रधानमंत्री की यात्रा में द्विपक्षीय बैठकों के साथ SCO का बहुपक्षीय मंच भी महत्वपूर्ण रहेगा।
सुरक्षा के साथ विकास पर भी जोर
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश में केवल आतंकवाद विरोधी नीति ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के साथ
विकास को जोड़ने की सोच भी दिखाई देती है। भारत का मानना है कि शांतिपूर्ण और स्थिर क्षेत्र में ही व्यापार,
निवेश तथा कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
SCO के माध्यम से भारत सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। डिजिटल तकनीक,
ऊर्जा, परिवहन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में बेहतर तालमेल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
ऐसे में प्रधानमंत्री का सुरक्षा, संपर्क और अवसर पर आधारित रोडमैप SCO के
व्यापक एजेंडे के साथ भारत की प्राथमिकताओं को जोड़ता है।
क्यों महत्वपूर्ण है PM Modi का SCO संदेश?
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया है जब एशिया और दुनिया के कई
हिस्सों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। आतंकवाद और उग्रवाद के अलावा क्षेत्रीय तनाव तथा देशों के
बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर रही है।
भारत SCO के मंच का इस्तेमाल क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और आतंकवाद के
खिलाफ साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहता है। प्रधानमंत्री का ताजा
बयान इसी दिशा में भारत की प्राथमिकता को स्पष्ट करता है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा केवल दो देशों के
साथ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। इसमें मध्य एशिया के साथ भारत की
रणनीतिक भागीदारी, SCO के भीतर क्षेत्रीय सहयोग और आतंकवाद के
खिलाफ सामूहिक प्रयास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। बिश्केक में होने वाला SCO शिखर सम्मेलन
भारत को इन विषयों पर अपनी नीति और प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच देगा।
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