राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व ADC मेजर ऋषभ
राष्ट्रपति के बेहद करीब रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले पूर्व एडीसी (Aide-de-Camp) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल इन दिनों अपने एक खुलासे को लेकर चर्चा में हैं। भारतीय सेना में करीब 12 साल सेवा देने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ लगभग तीन साल तक ADC के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी और निजी जिंदगी से जुड़े कई पहलुओं पर बात की है। सबसे ज्यादा ध्यान उनके उस खुलासे ने खींचा, जिसमें उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के ADC के रूप में काम करने के दौरान शादी को लेकर एक विशेष शर्त थी और इस वजह से वह वैवाहिक जीवन शुरू नहीं कर सके।
राज शमानी के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान ऋषभ सांब्याल ने बताया कि राष्ट्रपति के ADC की जिम्मेदारी सामान्य सैन्य पोस्टिंग से काफी अलग होती है। लगातार ड्यूटी, सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां, प्रोटोकॉल और राष्ट्रपति के साथ हर समय उपलब्ध रहने की जरूरत के कारण निजी जिंदगी के लिए बहुत कम जगह बचती है। उन्होंने इसे अपने करियर की सबसे बड़ी व्यक्तिगत कुर्बानियों में से एक बताया।
राष्ट्रपति के ADC रहते शादी क्यों नहीं कर सके ऋषभ सांब्याल?
ऋषभ सांब्याल ने बातचीत में बताया कि राष्ट्रपति के ADC के लिए शादी से जुड़ी एक शर्त होती है। उनके अनुसार, इस भूमिका में रहते हुए ADC शादी नहीं कर सकता। इसी वजह से वह अपने कार्यकाल के दौरान अविवाहित रहे।
उन्होंने यह भी बताया कि इस पोस्टिंग के दौरान परिवार से दूरी बनी रहती है और सामान्य व्यक्ति की तरह अपनी निजी जिंदगी जीना आसान नहीं होता। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति के साथ काम करते समय हर पल ड्यूटी को प्राथमिकता देनी पड़ती है और व्यक्तिगत योजनाओं के लिए बहुत सीमित समय बचता है।
ऋषभ ने इस अनुभव को केवल नौकरी की कठिनाई के रूप में नहीं बताया, बल्कि इसे उस जिम्मेदारी की कीमत के तौर पर देखा, जिसे उन्होंने देश की सेवा के दौरान स्वीकार किया था।
हालांकि, उनके बयान में जिस नियम या शर्त का जिक्र है, उसे उनके अनुभव और उनके द्वारा बताए गए ADC पद से जुड़े प्रावधान के रूप में समझना चाहिए। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में इस नियम का विस्तृत आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है।
सिर्फ नौकरी नहीं, निजी जिंदगी भी करनी पड़ती है पीछे
राष्ट्रपति के ADC की भूमिका देखने में भले ही प्रोटोकॉल से जुड़ी दिखाई देती हो, लेकिन इसके पीछे बेहद अनुशासित और लगातार सक्रिय रहने वाली दिनचर्या होती है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम, यात्राएं, आधिकारिक मुलाकातें और विभिन्न आयोजनों के दौरान ADC को लगातार तैयार रहना पड़ता है।
ऋषभ सांब्याल ने बताया कि इस जिम्मेदारी के दौरान उनके लिए सामान्य तरीके से बाहर जाना या अपनी पसंद के मुताबिक समय बिताना संभव नहीं था। परिवार और व्यक्तिगत संबंधों के लिए भी परिस्थितियां आसान नहीं थीं। उन्होंने कहा कि इस भूमिका में रहते हुए उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि निजी जीवन के लिए अलग से कोई दुनिया बची ही नहीं थी।
यही वजह है कि उनका शादी न करने वाला खुलासा सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर राष्ट्रपति के ADC की नौकरी में ऐसी कौन-सी जिम्मेदारियां होती हैं, जिनकी वजह से निजी जीवन इतना सीमित हो जाता है।
कैसे राष्ट्रपति के ADC बने ऋषभ सांब्याल?
ऋषभ सांब्याल ने बातचीत में यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह राष्ट्रपति के ADC बनेंगे। उन्हें इस पद के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी भी नहीं थी।
सेना में सेवा के दौरान उन्हें ADC पद के लिए चुना गया। इसके बाद उनकी जिम्मेदारी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों और प्रोटोकॉल से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण हो गई। वह मार्च 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के रूप में चुने गए थे।
राष्ट्रपति के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार दिखाई देने के कारण वह धीरे-धीरे लोगों के बीच भी पहचाने जाने लगे। उनकी वर्दी, व्यक्तित्व और राष्ट्रपति के साथ उनकी मौजूदगी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहती थीं।
हालांकि, कैमरों के सामने दिखाई देने वाली यह भूमिका असल में बहुत बड़ी जिम्मेदारी से जुड़ी थी। ADC को केवल राष्ट्रपति के पीछे चलने वाला अधिकारी समझना सही नहीं है। यह पद सैन्य अनुशासन, प्रोटोकॉल, समन्वय और सुरक्षा से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण कामों से जुड़ा है।
राष्ट्रपति के साथ रिश्ते को लेकर भी किया खास खुलासा
ऋषभ सांब्याल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ अपने संबंधों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति का व्यवहार उन्हें काफी आत्मीय लगता था और समय के साथ उनके बीच एक सहज संबंध बना।
उन्होंने बातचीत में राष्ट्रपति के व्यवहार की तुलना मां जैसी गर्मजोशी से की। उनका कहना था कि लंबे समय तक परिवार से दूर रहने के कारण राष्ट्रपति का स्नेह उन्हें अपनी मां की याद दिलाता था।
यही कारण है कि राष्ट्रपति के साथ बिताया गया समय उनके लिए केवल एक आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं था। उनके लिए यह अनुभव भावनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण रहा।
ADC की नौकरी में कितनी सतर्कता जरूरी होती है?
ऋषभ सांब्याल पहले भी ADC की ट्रेनिंग और जिम्मेदारियों के बारे में बात कर चुके हैं। उनके अनुसार, इस भूमिका में आसपास की छोटी-छोटी चीजों पर भी नजर रखना जरूरी होता है।
ADC की ट्रेनिंग में ऑब्जर्वेशन यानी आसपास की गतिविधियों को तेजी से पहचानने की
क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कठिन परिस्थितियों में भी
अधिकारी को अपने आसपास होने वाली गतिविधियों पर ध्यान बनाए रखना होता है।
राष्ट्रपति के साथ किसी कार्यक्रम में मौजूद रहते हुए ADC को प्रोटोकॉल से जुड़े कामों के
साथ-साथ कई स्तरों पर समन्वय करना पड़ता है। यही वजह है कि
इस पद पर जिम्मेदारी और अनुशासन दोनों का स्तर काफी ऊंचा होता है।
12 साल की सैन्य सेवा के बाद लिया प्रीमैच्योर रिटायरमेंट
ऋषभ सांब्याल ने भारतीय सेना में करीब 12 साल तक सेवा की। राष्ट्रपति के ADC के तौर पर करीब
तीन साल की जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट लेने का फैसला किया।
रिटायरमेंट के फैसले को लेकर भी उन्होंने बताया कि यह कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं था।
उन्होंने इस पर काफी समय तक विचार किया। उनके अनुसार,
परिवार और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों ने भी इस फैसले में भूमिका निभाई।
राष्ट्रपति के ADC का कार्यकाल उनके सैन्य करियर का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
अब सेवा से बाहर आने के बाद वह अपने अनुभवों के जरिए युवाओं को प्रेरित करने और
देश के लिए अलग तरीके से काम करने की योजनाओं पर भी विचार कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही है ऋषभ सांब्याल की कहानी?
ऋषभ सांब्याल की कहानी लोगों के बीच इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आम तौर पर
राष्ट्रपति के ADC को केवल औपचारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के साथ खड़े
अधिकारी के रूप में देखा जाता है। लेकिन उनके अनुभव से पता चलता है कि
इस पद के पीछे कितनी व्यक्तिगत और पेशेवर जिम्मेदारियां होती हैं।
शादी और परिवार से दूरी की बात सामने आने के बाद लोगों की
दिलचस्पी उनके निजी जीवन को लेकर बढ़ गई।
हालांकि, उनके बयान का मूल संदेश केवल शादी न कर पाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने यह बताने की
कोशिश की कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था के साथ काम करने वाली
ऐसी जिम्मेदारी में व्यक्तिगत सुविधा और ड्यूटी के बीच किस तरह संतुलन बनाना पड़ता है।
ऋषभ सांब्याल की कहानी से जुड़े 5 बड़े तथ्य
- ऋषभ सिंह सांब्याल भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी हैं।
- उन्होंने करीब 12 साल तक सेना में सेवा दी।
- वह लगभग तीन साल तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC रहे।
- उन्होंने बताया कि ADC के कार्यकाल में शादी को लेकर विशेष शर्त थी।
- उन्होंने निजी जिंदगी और परिवार से दूरी को अपनी बड़ी व्यक्तिगत कुर्बानियों में शामिल बताया।
FAQ: ऋषभ सांब्याल और राष्ट्रपति के ADC पद से जुड़े सवाल
1. ऋषभ सांब्याल कौन हैं?
ऋषभ सिंह सांब्याल भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी हैं। वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के
ADC के तौर पर करीब तीन साल तक सेवा दे चुके हैं।
2. ऋषभ सांब्याल ने शादी क्यों नहीं की?
उनके अनुसार, राष्ट्रपति के ADC के तौर पर सेवा करते समय शादी को लेकर एक विशेष शर्त होती है।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से वह उस कार्यकाल में शादी नहीं कर सके।
3. क्या ऋषभ सांब्याल अभी शादीशुदा हैं?
उपलब्ध हालिया बातचीत में ऋषभ सांब्याल ने खुद कहा कि वह अविवाहित हैं।
4. ऋषभ सांब्याल कितने समय तक राष्ट्रपति के ADC रहे?
उन्होंने लगभग तीन साल तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के रूप में सेवा की।
5. ऋषभ सांब्याल ने सेना क्यों छोड़ी?
उन्होंने करीब 12 साल की सेवा के बाद प्रीमैच्योर रिटायरमेंट लिया।
उनके बयानों के अनुसार, इस फैसले में व्यक्तिगत और पारिवारिक जिम्मेदारियों की भी भूमिका रही।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति के पूर्व ADC मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का खुलासा यह बताता है कि देश के
सर्वोच्च संवैधानिक पद के साथ काम करने वाली जिम्मेदारियों के पीछे
व्यक्तिगत जीवन का कितना बड़ा त्याग छिपा हो सकता है। उन्होंने बताया कि ADC के तौर पर
सेवा करते समय शादी और सामान्य निजी जिंदगी के लिए परिस्थितियां बेहद सीमित थीं।
करीब 12 साल सेना में सेवा और लगभग तीन साल राष्ट्रपति के
ADC के रूप में बिताने के बाद अब उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट लिया है।
उनके अनुभव ने राष्ट्रपति के ADC की भूमिका को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है और
यह भी दिखाया है कि वर्दी के पीछे सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कई निजी त्याग भी जुड़े होते हैं
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