RSS शताब्दी वर्ष के विजयादशमी
नागपुर, 20 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर महाराष्ट्र के नागपुर में विजयादशमी उत्सव का आयोजन किया। इस विशेष कार्यक्रम में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन किया। इसके बाद उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों की भागीदारी, संगठनात्मक अनुशासन और संघ की पुरानी परंपराएं प्रमुख आकर्षण रहीं।
नागपुर में आयोजित हुआ RSS का विशेष विजयादशमी कार्यक्रम
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वार्षिक विजयादशमी उत्सव इस बार ऐतिहासिक महत्व रखता है। वर्ष 1925 में विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में स्थापित हुए इस संगठन ने 2025 में अपने 100 वर्ष पूरे किए थे। वर्ष 2026 का आयोजन शताब्दी समारोहों के समापन से जुड़ा रहा।
नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम में संघ की परंपराओं के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठान और संगठनात्मक गतिविधियां संपन्न हुईं। विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन और पथ संचलन जैसे आयोजन संघ के वार्षिक कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
मोहन भागवत ने किया पारंपरिक शस्त्र पूजन
कार्यक्रम के दौरान RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया। भारतीय परंपरा में विजयादशमी को शक्ति, साहस, कर्तव्य और धर्म की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। इसी सांस्कृतिक मान्यता के अनुरूप शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया।
संघ के इस आयोजन में शस्त्र पूजन को संगठन की परंपरा और अनुशासन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक विधियों का पालन किया गया और स्वयंसेवकों ने उत्सव में भाग लिया।
संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को दी श्रद्धांजलि
शस्त्र पूजन से पहले डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर स्थित स्मृति मंदिर में संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की। हेडगेवार ने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी।
संघ की स्थापना का उद्देश्य समाज को संगठित करना, अनुशासन को प्रोत्साहित करना और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना बताया जाता है। हर साल विजयादशमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम संगठन के इतिहास और संस्थापक की विरासत को याद करने का अवसर भी होता है।
शताब्दी वर्ष के समापन पर विशेष महत्व
RSS के लिए वर्ष 2025 और 2026 का समय संगठन की ऐतिहासिक यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है। स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने के बाद शताब्दी समारोहों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से संगठन ने अपनी विचारधारा, सामाजिक गतिविधियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को सामने रखा।
संघ की गतिविधियों में शाखाओं का संचालन, स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण, सामाजिक सेवा और विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रम शामिल हैं। संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार, समाज में एकता, नागरिक कर्तव्य और राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा देना इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
विजयादशमी पर पथ संचलन भी रहा प्रमुख आकर्षण
विजयादशमी के अवसर पर RSS द्वारा पथ संचलन आयोजित करने की परंपरा भी रही है। इसमें स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर
अनुशासित तरीके से संचलन करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों को संगठन अपनी एकजुटता,
प्रशिक्षण और सामूहिक अनुशासन प्रदर्शित करने का माध्यम मानता है।
नागपुर का विजयादशमी उत्सव संघ की स्थापना से जुड़ा होने के कारण विशेष महत्व रखता है।
इस अवसर पर देशभर में संगठन की शाखाओं और इकाइयों द्वारा भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कार्यक्रम में कई प्रमुख अतिथियों की मौजूदगी
नागपुर में आयोजित समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख लोगों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम से संबंधित जानकारी के अनुसार, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़,
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और
अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित कई अतिथि इस आयोजन से जुड़े रहे।
वरिष्ठ पत्रकार संजय गुप्ता को भी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
इस आयोजन में संघ प्रमुख का संबोधन भी महत्वपूर्ण रहा। विजयादशमी पर दिया जाने वाला
उनका वार्षिक भाषण संगठन की विचारधारा, सामाजिक मुद्दों और
राष्ट्रीय विषयों पर संघ का दृष्टिकोण सामने रखने का प्रमुख अवसर माना जाता है।
RSS का इतिहास और स्थापना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम
हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में की थी। संगठन ने समय के साथ
देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी शाखाओं का विस्तार किया। इसके स्वयंसेवक सामाजिक सेवा, राहत कार्य,
शिक्षा और सामुदायिक गतिविधियों सहित कई क्षेत्रों में कार्य करते हैं।
संघ के समर्थक इसे सामाजिक संगठन और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा आंदोलन मानते हैं,
जबकि इसकी विचारधारा और सार्वजनिक भूमिका पर देश में विभिन्न प्रकार की
राजनीतिक तथा सामाजिक बहस भी होती रही है। इसलिए संगठन के कार्यक्रमों को
उसके ऐतिहासिक संदर्भ और समकालीन सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य, दोनों के नजरिए से देखा जाता है।
निष्कर्ष
नागपुर में आयोजित RSS का विजयादशमी उत्सव संगठन के शताब्दी समारोहों के समापन के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।
डॉ. मोहन भागवत द्वारा शस्त्र पूजन, संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को
श्रद्धांजलि और स्वयंसेवकों की भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष पहचान दी।
इस आयोजन के जरिए संघ ने अपनी ऐतिहासिक परंपराओं और
संगठनात्मक गतिविधियों को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया।
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