अरावली खनन मामला
अरावली खनन मामला अरावली पर SC का U-टर्न! नवंबर 2025 के खनन प्रतिबंध फैसले पर लगाई स्टे, नई लीज पर रोक जारी लेकिन केंद्र से सस्टेनेबल माइनिंग प्लान रिपोर्ट मांगी। पर्यावरण संरक्षण vs खनन का नया ट्विस्ट, ICFRE कमेटी सिफारिशें। दिल्ली-हरियाणा-राजस्थान प्रभावित, पूरी डिटेल्स और कोर्ट निर्देश जानें।

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों पर खनन और निर्माण पर अपने ही नवंबर 2024 के फैसले पर स्टे लगा दी है। यह U-टर्न हरियाणा, राजस्थान और गुजरात की सरकारों को राहत देता है, जहां खनन लीज पर रोक लगी थी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नई गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया, जिससे पर्यावरण बनाम विकास की बहस में नया मोड़ आ गया।
अरावली विवाद का बैकग्राउंड
- अरावली श्रृंखला दिल्ली-NCR को प्रदूषण से बचाने वाली ‘फेफड़े’ है, जो 692 वर्ग किमी में फैली है।
- 2024 के नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने खनन, निर्माण और रेत खनन पर पूर्ण रोक लगा दी थी।
- यह फैसला पर्यावरण संगठनों की याचिका पर आया,
- जो अवैध अतिक्रमण और जंगल कटाई का आरोप लगाते थे।
- हरियाणा सरकार ने महेंद्रगढ़, नूह और गुरुग्राम में 48 खनन साइट्स बंद होने से करोड़ों का नुकसान बताया।
अरावली खनन मामला : नवंबर फैसले की मुख्य बातें
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि अरावली ‘नो डेवलपमेंट जोन’ है। कोर्ट ने सैटेलाइट इमेजरी से 12,000 एकड़ में अवैध निर्माण पकड़े और राज्यों को डिमोलिशन का आदेश दिया। खनन लीज रद्द करने और फॉरेस्ट क्लीयरेंस पर सवाल उठाए गए। पर्यावरणविदों ने इसे ऐतिहासिक बताया, लेकिन राज्यों ने आर्थिक तबाही का रोना रोया।
सुप्रीम कोर्ट का अचानक U-टर्न
दिसंबर 2025 में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर ही स्टे दे दिया। जस्टिस भूषण गवई और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने हरियाणा की अपील पर केंद्र को ‘अरावली मास्टर प्लान’ तैयार करने को कहा। कोर्ट ने माना कि पुराना फैसला ‘ओवरब्रॉड’ था और राज्यों की चिंताओं को सुना। अब खनन पर आंशिक राहत मिली, लेकिन सशर्त- कोई नया खनन नहीं, पुरानी लीज की समीक्षा होगी।youtube
राज्यों और केंद्र की दलीलें
हरियाणा ने कहा कि खनन बंद से निर्माण उद्योग ठप, 50,000 नौकरियां गईं। राजस्थान ने 200+ लीज प्रभावित बताईं। केंद्र सरकार ने नोटिफाइड ‘प्रोटेक्टेड एरिया’ सिर्फ 21% ही होने का हवाला दिया। कोर्ट ने डेमार्केशन कमिटी बनाई, जो GPS सर्वे करेगी। पर्यावरण मंत्रालय को 6 महीने में रिपोर्ट सौंपनी होगी।
पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
- एनजीओ जैसे अरावली बचाओ ने U-टर्न को ‘झटका’ बताया,
- कहा इससे ग्रीन कवर 10% कम हो सकता है।
- विशेषज्ञ चेताते हैं कि अरावली बिना दिल्ली का तापमान 4 डिग्री बढ़ेगा।
- सोशल मीडिया पर #SaveAravalli ट्रेंड कर रहा।
- हरियाणा CM नायब सिंह सैनी ने इसे ‘न्यायोचित’ कहा।
- राजनीतिक रूप से BJP शासित राज्य राहत से खुश, विपक्ष ने केंद्र पर दबाव का आरोप लगाया।
भविष्य का नया ट्विस्ट और सबक
यह स्टे खनन को सीमित राहत देता है, लेकिन मास्टर प्लान से सख्त नियम बन सकते हैं। कोर्ट ने ईको-सेंसिटिव जोन बढ़ाने का संकेत दिया। विकास और पर्यावरण का बैलेंस जरूरी, वरना जलवायु परिवर्तन बिगड़ेगा। अरावली जैसे क्षेत्रों पर SC के फैसले न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। सरकारों को सस्टेनेबल मॉडल अपनाना होगा, ताकि कंक्रीट जंगल हरे न रह जाएं।
