सोनम वांगचुक
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने ‘चलो संसद’ मार्च से पहले कहा है कि वे अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने और प्रभावित छात्रों की आवाज़ को संसद तक पहुंचाने के उद्देश्य से है।
क्या हैं सोनम वांगचुक की तीन शर्तें?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सोनम वांगचुक ने कहा कि वे अनशन समाप्त करेंगे यदि:
- केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे।
- यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो प्रमुख राजनीतिक दल यह आश्वासन दें कि उनके उठाए गए मुद्दों पर संसद में गंभीर चर्चा होगी।
- उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके आवागमन, अभिव्यक्ति और संचार की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए हैं तथा इन प्रतिबंधों को हटाया जाए।
क्या है पूरा मामला?
हाल के महीनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों के बीच व्यापक असंतोष देखने को मिला। इसी मुद्दे को लेकर Cockroach Janata Party (CJP) ने आंदोलन शुरू किया, जिसके समर्थन में सोनम वांगचुक ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की। आंदोलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।
‘चलो संसद’ मार्च से बढ़ा आंदोलन
दिल्ली में आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च में बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की भी खबरें सामने आईं। विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिए, जबकि सरकार की ओर से सीमित स्तर पर संवाद की पहल की गई।
वांगचुक की सेहत और आंदोलन
रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार सुनिश्चित करना है।
सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार की ओर से इस आंदोलन पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है।
हालांकि कुछ मंत्रियों और प्रतिनिधियों द्वारा आंदोलनकारियों से बातचीत की पहल की गई है। आंदोलन से
जुड़ी मांगों और आरोपों पर अंतिम निर्णय या आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक का अनशन और ‘चलो संसद’ अभियान शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा
अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और
आंदोलनकारी पक्ष के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।
FAQ
प्रश्न 1: सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
उत्तर: उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर जवाबदेही, संसद में मुद्दों पर चर्चा का आश्वासन और
अपने अनुसार लगाए गए प्रतिबंध हटाने जैसी तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं।
प्रश्न 2: आंदोलन किस मुद्दे को लेकर है?
उत्तर: आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग से जुड़ा है।
प्रश्न 3: क्या सरकार ने मांगें मान ली हैं?
उत्तर: अभी तक सरकार की ओर से सभी मांगों को स्वीकार किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रश्न 4: ‘चलो संसद’ मार्च क्यों चर्चा में है?
उत्तर: इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक शामिल हुए तथा यह शिक्षा
संबंधी मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया।
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