Rabri Lalu BJP Attack
Rabri Lalu BJP Attack राबड़ी देवी के सरकारी आवास से रातों‑रात सामान हटाए जाने पर भाजपा ने लालू परिवार पर निशाना साधा। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार छिपाने की चाल बताया है।

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। पटना स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास से अचानक स्टाफ को खाली करवाए जाने की खबर सामने आई है, जिससे राज्य की राजनीतिक गर्मी एक बार फिर बढ़ गई है। इस घटना ने न केवल जनता के बीच चर्चा को जन्म दिया है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी इस मामले को राजनीतिक रंग देते हुए लालू यादव और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
Rabri Lalu BJP Attack क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार, राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में लंबे समय से कई कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और सहयोगी तैनात थे। पिछले कुछ दिनों से उन कर्मचारियों को अचानक आवास खाली करने के आदेश मिले। बताया जा रहा है कि यह निर्देश प्रशासनिक स्तर पर जारी किए गए, जिसके बाद जल्दी-जल्दी में स्टाफ को अपनी सेवाएँ बंद करनी पड़ीं।
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है कि आवास से कर्मचारियों को हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, लेकिन भाजपा ने इसे तुरंत एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए लालू परिवार पर “बदले की राजनीति” का आरोप लगाया है।
भाजपा का हमला
- भाजपा नेताओं ने इस घटना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
- पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि लालू परिवार को जब भी सत्ता से बाहर किया जाता है,
- तब वे सरकारी व्यवस्थाओं का दुरुपयोग कर कर्मचारियों और अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं।
- भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी पर भी सवाल उठाया है।
- पार्टी का कहना है कि
- “जब राबड़ी आवास से सरकारी स्टाफ को तत्काल हटाने की कार्रवाई हुई, तब सरकार की भूमिका क्या थी?”
कुछ भाजपा नेताओं ने यह तक कहा कि यह कार्रवाई या तो शासन-प्रशासन की गड़बड़ी का परिणाम है या किसी “राजनीतिक समझौते” का हिस्सा।
राजद का पलटवार
- भाजपा के आरोपों पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से भी जवाबी हमला हुआ है।
- राजद प्रवक्ताओं ने साफ कहा कि भाजपा बेवजह इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है।
- उनका कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक कार्रवाई है, न कि कोई राजनीतिक निर्णय।
- राजद नेताओं ने यहां तक कहा कि भाजपा को बिहार के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की आदत हो गई है,
- इसलिए वे ऐसे मामूली मामलों को भी विवाद का रूप देने लगती है।
आम जनता की प्रतिक्रिया
- इस पूरे घटनाक्रम पर आम जनता भी बंटी दिख रही है।
- कुछ लोग मानते हैं कि सरकारी नियमों के तहत अगर कोई परिवर्तन या स्टाफ की अदला-बदली होती है,
- तो यह सामान्य प्रक्रिया है।
- वहीं कई लोगों का कहना है कि बिहार की राजनीति में लालू यादव परिवार का प्रभाव इतना मजबूत है,
- कि उनके सरकारी आवास से स्टाफ का अचानक हटना “सिर्फ प्रशासनिक मसला” नहीं हो सकता।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तेज़ प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। ट्विटर और फेसबुक पर #RabriAwas, #LaluFamily, और #BiharPolitics जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रभाव
- इस घटना को बिहार की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
- हाल ही में राज्य में प्रशासनिक फेरबदल,
- गठबंधन की खींचतान और भ्रष्टाचार के आरोपों ने माहौल पहले से ही गर्म कर रखा है।
- ऐसे में राबड़ी देवी आवास से स्टाफ का अचानक हटना,
- विपक्ष को एक नया मुद्दा दे गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और राजद दोनों ही इस घटनाक्रम को अपने-अपने तरीके से पेश कर रहे हैं। भाजपा इसे लालू परिवार के “प्रशासनिक प्रभाव” का उदाहरण बता रही है, तो राजद इसे “भाजपा की साजिश” के रूप में प्रचारित कर रही है।
निष्कर्ष
- राबड़ी देवी आवास से स्टाफ हटाने का मामला भले प्रशासनिक स्तर का हो,
- लेकिन इसका राजनीतिक असर गहरा है।
- बिहार की जनता पहले से ही बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई से परेशान है,
- और इस तरह की घटनाएँ राज्य की राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ाती हैं।
देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस पर क्या आधिकारिक बयान देती है और क्या वाकई यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय था या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक योजना छिपी हुई है।
