ग्राम पंचायतों का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई की शाम समाप्त हो जाएगा। इसके बाद गांव की सरकार का पूरा ढांचा बदल सकता है। पंचायत संचालन को लेकर अब शासन स्तर पर नई व्यवस्था तैयार करने की चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार फिलहाल तीन बड़े विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें राजस्थान मॉडल को अपनाने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में प्रदेशभर के लाखों ग्रामीणों और हजारों ग्राम प्रधानों की नजर अब सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
शासन किन तीन विकल्पों पर कर रहा विचार?
विभागीय सूत्रों के अनुसार पंचायत संचालन के लिए तीन प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है।
पहला विकल्प यह है कि मौजूदा ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में तीन या छह सदस्यीय समिति बनाई जाए, जिसे पंचायत संचालन की जिम्मेदारी दी जाए।
दूसरे विकल्प में एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाकर पंचायतों का संचालन कराने पर विचार किया जा रहा है।
तीसरे विकल्प के तहत ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और पंचायत सहायक को मिलाकर एक समिति गठित करने का प्रस्ताव है, जो पंचायतों का कार्य संभाल सकती है।
क्या अपनाया जाएगा राजस्थान मॉडल?
सूत्रों का कहना है कि सरकार राजस्थान मॉडल पर भी विचार कर सकती है।
इस मॉडल के तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में समिति बनाकर पंचायत संचालन जारी रखा जा सकता है। हालांकि वित्तीय अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों के पास रहने की संभावना जताई जा रही है।
राजस्थान मॉडल की चर्चा के बाद ग्राम प्रधान संगठनों में भी हलचल बढ़ गई है।
27 मई से लागू हो सकती है नई व्यवस्था
वर्ष 2021 में हुए पंचायत चुनावों के बाद ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 26 मई को हुई थी। इसी आधार पर मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक 27 मई से नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। शासन की ओर से सोमवार को इस संबंध में बड़ा आदेश जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रधानों ने उठाई कार्यकाल बढ़ाने की मांग
प्रदेशभर में कई ग्राम प्रधान संगठन लगातार कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन ने हाल ही में लखनऊ में धरना देकर सरकार से मांग की थी कि या तो प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए या फिर पंचायत संचालन का अधिकार प्रधानों की अध्यक्षता वाली समिति को दिया जाए।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि पंचायतों के विकास कार्य अभी अधूरे हैं और अचानक व्यवस्था बदलने से ग्रामीण विकास प्रभावित हो सकता है।
विकास कार्यों में अचानक बढ़ी तेजी
कार्यकाल समाप्त होने से पहले कई जिलों में विकास कार्यों को
तेजी से पूरा करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
Moradabad जिले की 643 ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग और पांचवें वित्त आयोग की बची हुई
राशि से तेजी से काम कराए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक करोड़ों रुपये के विकास कार्यों को अंतिम समय में पूरा करने की
कोशिश चल रही है ताकि पंचायतों का कामकाज अधूरा न रहे।
महिला प्रधानों की भी बड़ी संख्या
Moradabad जिले की 643 ग्राम पंचायतों में से 335 ग्राम प्रधान महिलाएं हैं।
ऐसे में नई पंचायत व्यवस्था का असर बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधियों पर भी पड़ने वाला है।
ग्रामीण राजनीति में बढ़ी हलचल
गांवों में पंचायत व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावित
नई व्यवस्था को लेकर ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य और ग्रामीण लगातार बैठकों में चर्चा कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत व्यवस्था में बदलाव आने वाले पंचायत और
निकाय चुनावों की दिशा भी तय कर सकता है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंचायत व्यवस्था को बिना रुकावट जारी रखने की है।
यदि समय रहते स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुए तो ग्रामीण विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि शासन स्तर पर लगातार बैठकों का दौर जारी है।
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही
गांव की सरकार का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार तीन प्रस्तावों में से किस विकल्प को मंजूरी देती है
और क्या राजस्थान मॉडल को वास्तव में लागू किया जाएगा।
आने वाले 24 घंटे प्रदेश की पंचायत राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं
read this post :चीन ने लॉन्च किया नया स्पेस मिशन, अंतरिक्ष में बढ़ी ड्रैगन की ताकत! दुनिया की नजर मिशन पर
