Trump Carney Board Peace
Trump Carney Board Peace डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडाई पीएम मार्क कार्नी के दावोस भाषण के बाद ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से कनाडा को निकाल बाहर किया। ट्रंप ने कहा- सबसे प्रतिष्ठित लीडर्स बोर्ड में जगह नहीं! अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा।

दुनिया की राजनीति में अक्सर छोटी-छोटी घटनाएं बड़े बदलावों का संकेत देती हैं। जनवरी 2026 में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वैश्विक मंच पर शब्दों की ताकत कितनी बड़ी हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यहां अपने नए अंतरराष्ट्रीय पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा की, लेकिन इसी दौरान कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के एक भाषण ने सब कुछ बदल दिया। ट्रंप ने कार्नी के बयानों से इतना आहत महसूस किया कि उन्होंने कनाडा को इस बोर्ड में शामिल होने का दिया गया न्योता वापस ले लिया। यह घटना न सिर्फ अमेरिका-कनाडा संबंधों में नई दरार पैदा कर रही है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी गहरे सवाल खड़े कर रही है।
Trump Carney Board Peace: ‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है?
ट्रंप ने दावोस में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का चार्टर साइन किया। यह बोर्ड मूल रूप से गाजा में इजरायल-हमास युद्ध के बाद शांति स्थापित करने और पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया था, लेकिन ट्रंप ने इसे वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक स्थायी मंच के रूप में पेश किया। ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन होंगे। इसमें शामिल होने वाले देशों को 1 बिलियन डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रंप का दावा है कि यह संयुक्त राष्ट्र से ज्यादा प्रभावी और तेज निर्णय लेने वाला संगठन होगा। कई पश्चिमी देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया, लेकिन शुरुआत में कनाडा को न्योता भेजा गया था और कार्नी ने सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई थी।
मार्क कार्नी का दावोस भाषण: ट्रंप के लिए चुनौती
- मार्क कार्नी, जो पहले बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर रह चुके हैं,
- अब कनाडा के प्रधानमंत्री हैं।
- दावोस में उनके भाषण ने खासी सुर्खियां बटोरीं।
- उन्होंने कहा कि अमेरिका-नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था का युग खत्म हो चुका है
- और यह “रूपचर” (rupture) अब वापस नहीं आएगा।
- कार्नी ने चेतावनी दी कि महाशक्तियां आर्थिक सहयोग को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं,
- टैरिफ और आर्थिक दबाव से छोटे देशों को नियंत्रित करने की कोशिश हो रही है।
- उन्होंने मध्यम शक्ति वाले देशों (middle powers) से
- एकजुट होने का आह्वान किया ताकि वे महाशक्तियों के दबाव से बच सकें।
यह भाषण ट्रंप के लिए सीधा हमला था, क्योंकि ट्रंप अक्सर कनाडा को अमेरिका पर निर्भर बताते हैं। ट्रंप ने अपने दावोस भाषण में जवाब दिया, “कनाडा अमेरिका की वजह से जीवित है। वे हमें बहुत फ्रीबिज देते हैं, लेकिन कृतज्ञ नहीं हैं। मैंने आपके प्रधानमंत्री का भाषण सुना, वे कृतज्ञ नहीं लगे।” ट्रंप ने यहां तक कहा कि अमेरिका का गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम कनाडा की भी रक्षा करेगा।
ट्रंप का पलटवार: न्योता वापस
कार्नी के भाषण के कुछ दिनों बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, “प्रिय प्रधानमंत्री कार्नी, कृपया इस पत्र को प्रमाण मानें कि बोर्ड ऑफ पीस कनाडा के शामिल होने के न्योते को वापस ले रहा है। यह सबसे प्रतिष्ठित लीडर्स बोर्ड होगा।” ट्रंप ने कहा कि कनाडा अमेरिका के प्रति कृतज्ञ नहीं है। यह फैसला बोर्ड के चार्टर साइनिंग के ठीक बाद आया, जिससे साफ है कि कार्नी का भाषण ही मुख्य वजह था।
कनाडा की ओर से अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, लेकिन ओटावा पहले ही बोर्ड में शामिल होने के डिटेल्स पर सवाल उठा चुका था। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है, जहां वे असहमति बर्दाश्त नहीं करते।
अमेरिका-कनाडा संबंधों पर असर
- अमेरिका और कनाडा दुनिया के सबसे करीबी सहयोगी रहे हैं—
- NAFTA/USMCA, NORAD, साझा सीमा।
- लेकिन ट्रंप के पहले कार्यकाल से ही टैरिफ,
- व्यापार युद्ध और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर तनाव रहा है।
- अब कार्नी के नेतृत्व में कनाडा ज्यादा स्वतंत्र रुख अपना रहा है।
- कार्नी का भाषण छोटे-मध्यम देशों के लिए एकजुटता का संदेश था,
- जो ट्रंप की एकध्रुवीय दुनिया के विपरीत है।
यह घटना वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ रही है—क्या ट्रंप का बोर्ड संयुक्त राष्ट्र का विकल्प बनेगा? क्या कनाडा जैसे सहयोगी देश अब अलग रास्ता चुनेंगे? भारत समेत कई देशों ने बोर्ड में शामिल होने से इनकार किया है।
ट्रंप का यह फैसला दिखाता है कि व्यक्तिगत अहंकार और राजनीतिक मतभेद कितनी जल्दी अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। दावोस 2026 अब सिर्फ आर्थिक मंच नहीं रहा, बल्कि शक्ति संघर्ष का नया मैदान बन गया है। क्या यह शुरुआत है एक नए वैश्विक व्यवस्था की, जहां पुराने सहयोगी भी दुश्मन बन सकते हैं? समय ही बताएगा।
