UPI MDR Rule
UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों और कारोबारियों के लिए अहम खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की समयसीमा दिवाली के बाद तक टाल दी है। पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर 2026 से लागू करने की योजना थी। अब नई तारीख की घोषणा अलग से की जाएगी।
इस बदलाव को लेकर आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब ₹2,000 से ज्यादा का UPI भुगतान करने पर अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, MDR व्यापारियों के भुगतान स्वीकार करने से जुड़ा शुल्क है। इसे आम ग्राहकों पर अलग से नहीं लगाया जाना है। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर भी मुफ्त रहेंगे।
क्या है UPI MDR का नया नियम?
MDR का पूरा नाम Merchant Discount Rate है। यह वह शुल्क है जो व्यापारी के डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने वाली भुगतान व्यवस्था से जुड़ी संस्थाओं को दिया जाता है।
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर ₹2,000 से अधिक की राशि के लिए 0.4 प्रतिशत MDR लागू हो सकता है। ₹75,000 या उससे अधिक के संबंधित ट्रांजैक्शन पर शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 निर्धारित की गई है।
हालांकि, यह नियम सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं होगा। अलग-अलग व्यापारी श्रेणियों और निर्धारित छूट के आधार पर शुल्क की पात्रता तय होगी।
दिवाली के बाद लागू होगा नियम, नई तारीख का इंतजार
NPCI की UPI एवं सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए MDR व्यवस्था लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला किया।
पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाली थी। अब इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू करने की योजना है। इसकी सटीक तारीख अलग से घोषित की जाएगी।
त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ जाते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था को लागू करने से पहले कारोबारियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।
क्या ₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट करने पर ग्राहक को देना होगा शुल्क?
यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार, MDR व्यापारी भुगतान व्यवस्था का शुल्क है, जिसे सीधे ग्राहक से अतिरिक्त UPI चार्ज के रूप में वसूलने की अनुमति नहीं है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर ₹5,000 का UPI भुगतान करता है, तो प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR की गणना के अनुसार व्यापारी पर ₹20 का शुल्क बन सकता है, बशर्ते वह ट्रांजैक्शन संबंधित नियमों के अंतर्गत आता हो।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक को ₹5,020 देना होगा। ग्राहक के लिए UPI भुगतान पर अलग से MDR जोड़कर वसूली नहीं की जानी चाहिए।
कौन-कौन से UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे?
सरकारी जानकारी के अनुसार, कई तरह के डिजिटल भुगतान इस शुल्क से बाहर रहेंगे।
- व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान: परिवार, मित्र या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजना मुफ्त रहेगा, चाहे राशि कितनी भी हो।
- ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान: निर्धारित ढांचे के अनुसार इन पर MDR नहीं लगेगा।
- छोटे कारोबारियों को छूट: लागू छोटे-व्यापारी श्रेणी के तहत UPI QR कोड से महीने में
- ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से छूट जारी रहेगी।
- आम ग्राहकों पर अलग शुल्क नहीं: MDR को ग्राहक से अतिरिक्त
- UPI चार्ज के रूप में वसूलने की अनुमति नहीं है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी UPI ट्रांजैक्शन इस बदलाव से अप्रभावित रहने का अनुमान है।
₹75,000 या उससे ज्यादा के भुगतान पर क्या होगा?
चुनिंदा व्यापारी भुगतानों के लिए प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR की अधिकतम सीमा
₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है, जब भुगतान राशि ₹75,000 या उससे अधिक हो।
इसका अर्थ है कि पात्र ट्रांजैक्शन पर शुल्क की गणना निर्धारित दर और अधिकतम सीमा के अनुसार होगी।
हालांकि, कुछ विशेष क्षेत्रों और व्यापारी श्रेणियों के लिए अलग दरें लागू हो सकती हैं।
क्या जरूरी सेवाओं और छोटे कारोबारियों पर भी लगेगा शुल्क?
सरकार के सितंबर में जारी ढांचे में कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था बताई गई है। रेलवे, दूरसंचार,
बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी इनपुट जैसे कुछ आवश्यक क्षेत्रों में ₹2,000 से ऊपर के पात्र
भुगतान पर प्रति ट्रांजैक्शन ₹5 का निर्धारित MDR बताया गया है।
इसी तरह, पूंजी बाजार से जुड़े कुछ भुगतानों के लिए 0.02 प्रतिशत की दर और
अधिकतम ₹300 की सीमा का प्रावधान बताया गया है।
इन श्रेणियों में शुल्क की अंतिम पात्रता संबंधित आधिकारिक नियमों और लागू कार्यान्वयन निर्देशों के अनुसार तय होगी।
UPI व्यवस्था में बदलाव क्यों किया जा रहा है?
UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को तेजी से लोकप्रिय बनाया है। छोटे दुकानदारों से
लेकर बड़े कारोबारियों तक, QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करना आम हो गया है।
लेकिन डिजिटल भुगतान की बढ़ती संख्या के साथ भुगतान नेटवर्क, बैंकों और तकनीकी
सेवाओं के संचालन की लागत भी महत्वपूर्ण विषय बन गई है। MDR ढांचे का
उद्देश्य पात्र व्यापारी भुगतानों से जुड़े भुगतान तंत्र की लागत को साझा करना और
व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना बताया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका मकसद आम नागरिकों के रोजमर्रा के UPI भुगतान पर शुल्क लगाना नहीं है।
ग्राहकों और व्यापारियों को क्या करना चाहिए?
ग्राहकों को फिलहाल सामान्य UPI भुगतान करते समय किसी नए शुल्क को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
व्यक्ति से व्यक्ति ट्रांसफर और निर्धारित सीमा तक व्यापारी भुगतान मुफ्त बने रहेंगे।
व्यापारियों को अपनी भुगतान सेवा प्रदाता कंपनी से लागू MDR दरों, पात्रता और
छूट के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। नई तारीख की घोषणा के बाद
संबंधित नियमों की पुष्टि करना भी जरूरी होगा।
निष्कर्ष: UPI MDR व्यवस्था को दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है। चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर
शुल्क लगाने का प्रस्ताव बरकरार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर ₹2,000 से अधिक के
UPI भुगतान पर ग्राहक को अतिरिक्त पैसे देने होंगे। नई तारीख और लागू नियमों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
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