अमेरिका ने सेक्शन 301
भारत समेत 17 देशों पर अमेरिका का 10% टैरिफ लागू
अमेरिका ने वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा बदलाव करते हुए भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन, कनाडा समेत 17 देशों से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी व्यापार कानून के Section 301 के तहत लिया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन देशों पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है, जिन पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने के आरोप हैं।
क्या है Section 301?
Section 301 अमेरिकी Trade Act, 1974 का एक प्रावधान है, जिसके तहत अमेरिका उन देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है जिन्हें वह अनुचित व्यापारिक व्यवहार या अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचाने वाला मानता है। इस बार अमेरिकी प्रशासन ने इसी कानून का इस्तेमाल करते हुए नए टैरिफ लागू किए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पहले लागू अस्थायी 10% वैश्विक टैरिफ की अवधि समाप्त हो रही थी।
भारत पर क्यों लगा 10% टैरिफ?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों की रोकथाम को लेकर की गई जांच के बाद भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया है। शुरुआती प्रस्ताव में भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक भारत द्वारा श्रम संबंधी कुछ नियमों में सुधार और आयात नियंत्रण संबंधी कदम उठाने के बाद यह राहत मिली।
किन देशों पर लागू हुआ फैसला?
भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, कनाडा, ब्रिटेन सहित कुल 17 देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। वहीं 43 अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला वैश्विक व्यापार को अधिक पारदर्शी बनाने और जबरन श्रम के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
किन वस्तुओं पर नहीं लगेगा टैरिफ?
अमेरिकी प्रशासन ने कुछ आवश्यक वस्तुओं को इस टैरिफ से बाहर रखा है। इनमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य उत्पाद और कुछ विशेष श्रेणी के उत्पाद शामिल हैं। इन छूटों का उद्देश्य अमेरिकी उपभोक्ताओं और उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ कम करना बताया गया है।
भारत पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ भारत के कुछ निर्यात क्षेत्रों पर असर डाल सकता है, खासकर उन उत्पादों पर जो अमेरिकी बाजार में बड़ी मात्रा में भेजे जाते हैं। हालांकि भारत को 12.5% के बजाय
10% की दर मिलने से संभावित नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता है। आगे भारत और
अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
क्या भारत सरकार की ओर से प्रतिक्रिया आई है?
भारत सरकार की ओर से आधिकारिक स्तर पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। इससे पहले भारत और
अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। माना जा रहा है कि
दोनों देश इस नए टैरिफ के प्रभाव और संभावित समाधान पर आगे भी चर्चा जारी रखेंगे।
आगे क्या हो सकता है?
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रभावित देश जबरन श्रम से जुड़े कानूनों और
उनके क्रियान्वयन को और मजबूत करते हैं, तो भविष्य में टैरिफ दरों की समीक्षा की जा सकती है।
दूसरी ओर यदि विवाद बढ़ता है तो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर इसका व्यापक प्रभाव भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका का यह फैसला केवल भारत ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है। 10 प्रतिशत टैरिफ से
कुछ भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन 12.5 प्रतिशत के प्रस्तावित शुल्क की तुलना में
यह अपेक्षाकृत कम है। आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और
दोनों देशों की नीतियां तय करेंगी कि इस निर्णय का वास्तविक आर्थिक असर कितना होगा।
FAQ
Q1. अमेरिका ने भारत पर 10% टैरिफ क्यों लगाया?
उत्तर: अमेरिका ने Section 301 जांच के बाद जबरन श्रम से जुड़े नियमों के पालन को आधार बनाते हुए भारत सहित 17 देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है।
Q2. Section 301 क्या है?
उत्तर: यह अमेरिकी Trade Act, 1974 का प्रावधान है, जिसके तहत अमेरिका अनुचित व्यापारिक व्यवहार के मामलों में दूसरे देशों पर व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है।
Q3. क्या भारत पर पहले 12.5% टैरिफ प्रस्तावित था?
उत्तर: हां, शुरुआती प्रस्ताव में 12.5% शुल्क की बात थी, लेकिन बाद में भारत को 10% श्रेणी में रखा गया।
Q4. किन देशों पर 10% टैरिफ लगाया गया है?
उत्तर: भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, कनाडा, ब्रिटेन सहित 17 देशों पर 10% टैरिफ लगाया गया है।
Q5. क्या सभी उत्पादों पर यह टैरिफ लागू होगा?
उत्तर: नहीं। तेल, गैस, उर्वरक और कुछ आवश्यक वस्तुओं को इस टैरिफ से छूट दी गई है।
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