Harish Rawat Resigns
उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी के महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। यह फैसला उनके पूर्व ओएसडी और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के एक दिन बाद सामने आया है। रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी और कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस का भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कमजोर पड़े।
हरीश रावत का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता का संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर ED की कार्रवाई के बाद बढ़ी हलचल
इस पूरे मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय की उस कार्रवाई से हुई, जिसमें देहरादून में चंदन सिंह जीना समेत कई लोगों से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई। ED की जांच 2016 में हुई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UKSSSC की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है।
ED के मुताबिक, चंदन सिंह जीना के आवास से 32 लाख रुपये की नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोने के सिक्के और चेन तथा 12 लग्जरी घड़ियां बरामद की गईं। इसके अलावा जीना और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े बैंक खातों में मौजूद करीब 52.16 लाख रुपये की रकम फ्रीज किए जाने की बात भी सामने आई है। एजेंसी ने एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है, जिसकी फोरेंसिक जांच की जानी है।
जांच एजेंसी का दावा है कि बरामद नकदी और कथित तौर पर किए गए कुछ नकद खर्च ज्ञात आय के स्रोत से मेल नहीं खाते। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
हरीश रावत ने किन पदों से हटने का किया ऐलान?
हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए सरकारी पद से इस्तीफे का सवाल नहीं है। उन्होंने कांग्रेस में अपनी दो संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने की बात कही है।
इनमें उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य का पद शामिल है। रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी कदम की वजह से पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष पर सवाल उठे या उसे किसी तरह की राजनीतिक कमजोरी का सामना करना पड़े।
रावत ने अपने बयान में चंदन सिंह जीना के साथ अपने पुराने संबंध का भी उल्लेख किया। जीना उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान 2014 से 2017 के बीच ओएसडी के रूप में काम कर चुके हैं और बाद में उनके निजी सहायक भी रहे। रावत ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी साबित होती है तो वह इससे शर्मिंदा होंगे, लेकिन उन्होंने आरोपों पर अपना विश्वास नहीं जताया।
2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा मामला क्या है?
ED की मौजूदा कार्रवाई की जड़ 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं में है। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में OMR उत्तर पुस्तिकाओं के साथ कथित छेड़छाड़ और उन्हें प्रभावित करने के आरोपों की जांच की जा रही है।
ED के अनुसार, जांच में यह आरोप सामने आया कि सुरक्षित रखी गई OMR शीट से संबंधित जानकारी निकाली गई और कथित तौर पर कुछ शीट में उत्तरों के साथ बदलाव किए गए। एजेंसी ने निजी कंप्यूटर एजेंसी और कथित बिचौलियों से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी ली।
यह मामला पहले से ही उत्तराखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े विवादों के कारण संवेदनशील रहा है। अब ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के चलते इसका राजनीतिक असर भी दिखाई देने लगा है।
हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुई सरकारी भर्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके तीन साल के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि नियुक्तियों की प्रक्रिया में उनकी ओर से कोई चूक हुई हो तो वह इसके लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं।
2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए क्या मायने रखता है रावत का फैसला?
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे प्रमुख और अनुभवी चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे समय में जब राज्य में अगला विधानसभा चुनाव नजदीक है, उनके संगठनात्मक पद छोड़ने के फैसले का राजनीतिक असर स्वाभाविक रूप से चर्चा में रहेगा।
रावत ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि उन्हें लगता है कि उनके एक सहयोगी के खिलाफ कार्रवाई के जरिए एक राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि
वह नहीं चाहते कि उनके कारण पार्टी के संघर्ष पर कोई सवाल उठे।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ED की कार्रवाई और किसी व्यक्ति पर लगे आरोप
अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं।
जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और
जांच के परिणाम ही यह तय करेंगे कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल हरीश रावत के इस्तीफे ने उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर और राज्य की राजनीति में
नई चर्चा को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व
इस फैसले पर क्या रुख अपनाता है और
ED की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।
हरीश रावत इस्तीफा: मुख्य बातें
- पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के दो संगठनात्मक पदों से हटने का ऐलान किया।
- फैसला चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों पर ED की कार्रवाई के बाद आया।
- जीना पूर्व मुख्यमंत्री कार्यकाल में रावत के OSD रह चुके हैं।
- ED की कार्रवाई 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई।
- जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
- 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले रावत का फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
FAQ: हरीश रावत के इस्तीफे से जुड़े सवाल
1. हरीश रावत ने कांग्रेस के पदों से इस्तीफा क्यों दिया?
हरीश रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी
संघर्ष को किसी तरह की कमजोरी या सवालों का सामना करना पड़े।
उनका फैसला चंदन सिंह जीना से जुड़े ED कार्रवाई के बाद आया है।
2. हरीश रावत ने किन पदों से इस्तीफा दिया है?
उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और
कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का ऐलान किया है।
3. चंदन सिंह जीना कौन हैं?
चंदन सिंह जीना हरीश रावत के पूर्व ओएसडी रह चुके हैं और वर्तमान में
उनके निजी सहायक के रूप में काम कर रहे थे। ED ने उनके परिसर पर
2016 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलाशी ली।
4. ED की कार्रवाई में क्या मिला?
ED के अनुसार, जीना के परिसर से 32 लाख रुपये नकद,
करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां बरामद की गईं।
परिवार से जुड़े बैंक खातों में 52.16 लाख रुपये फ्रीज किए जाने की भी जानकारी दी गई है।
5. क्या हरीश रावत पर भी कोई आरोप साबित हुआ है?
नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में ED की कार्रवाई चंदन सिंह जीना और अन्य संबंधित परिसरों की जांच से जुड़ी है।
हरीश रावत ने अपने राजनीतिक पदों से हटने का निर्णय लिया है, जबकि मामले की जांच जारी है
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