इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी इन दिनों एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के करीब पहुंच गई हैं। सितंबर 2026 में उनका कार्यकाल चार साल पूरा कर लेगा और इसके साथ ही वह 1946 में इटली गणराज्य की स्थापना के बाद सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने वाली नेता बन जाएंगी। मौजूदा रिकॉर्ड सिल्वियो बर्लुस्कोनी और अन्य लंबे कार्यकाल वाले नेताओं के संदर्भ में चर्चा में रहा है, जबकि ऐतिहासिक रूप से बेनिटो मुसोलिनी का कार्यकाल इससे कहीं लंबा था।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मेलोनी की राजनीतिक यात्रा उस समय शुरू हुई थी जब उनकी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर बहुत सीमित समर्थन हासिल था। उनकी पार्टी लंबे समय तक लगभग 3 प्रतिशत वोट के आसपास सिमटी रही, लेकिन कुछ ही वर्षों में मेलोनी ने इटली की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बना ली।
3 प्रतिशत वोट से प्रधानमंत्री पद तक का सफर
जॉर्जिया मेलोनी की राजनीतिक कहानी इटली की पारंपरिक सत्ता राजनीति से अलग रही है। उन्होंने 2012 में ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। शुरुआत में पार्टी को व्यापक जनसमर्थन हासिल नहीं हुआ और कई वर्षों तक उसका वोट शेयर बेहद कम रहा।
इसके बावजूद मेलोनी ने संगठन को मजबूत करने और अपनी राजनीतिक पहचान बनाने पर लगातार काम किया। उनकी स्पष्ट राजनीतिक भाषा और इटली के राष्ट्रीय हितों पर जोर देने वाली राजनीति ने धीरे-धीरे उन्हें मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाया।
31 साल की उम्र में बनी थीं मंत्री
मेलोनी ने बेहद कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बना ली थी। महज 31 वर्ष की उम्र में वह इटली की सबसे युवा मंत्रियों में शामिल हुईं। इसके बाद उन्होंने विपक्ष की राजनीति में भी अपनी भूमिका मजबूत की।
2022 में हुए आम चुनावों के बाद उनकी पार्टी के नेतृत्व में गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर मिला और जॉर्जिया मेलोनी इटली की प्रधानमंत्री बनीं। वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री भी हैं।
सितंबर में बनेगा नया रिकॉर्ड
मेलोनी के मौजूदा कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में राजनीतिक स्थिरता को भी गिना जा रहा है। इटली की राजनीति में सरकारों का अपेक्षाकृत जल्दी बदलना कोई असामान्य बात नहीं रही है। ऐसे माहौल में मेलोनी का लगातार लगभग चार साल तक प्रधानमंत्री बने रहना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सितंबर 2026 में चार वर्ष का लगातार कार्यकाल पूरा करने के बाद वह इटली गणराज्य के दौर में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगी।
अवैध प्रवासन के खिलाफ सख्त रुख
प्रधानमंत्री बनने के बाद मेलोनी सरकार ने अवैध प्रवासन के मुद्दे को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा। उनकी सरकार ने अवैध प्रवासियों से संबंधित नीतियों को सख्त करने और हिरासत की अवधि बढ़ाने जैसे कदम उठाए।
प्रवासन का मुद्दा इटली के लिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि भूमध्यसागर के रास्ते यूरोप पहुंचने वाले प्रवासियों का दबाव लंबे समय से देश की राजनीति में बड़ा विषय रहा है। मेलोनी ने चुनावों से लेकर सरकार चलाने तक इस मुद्दे पर अपने सख्त रुख को बनाए रखा है।
न्याय व्यवस्था और संविधान में बदलाव पर जोर
मेलोनी सरकार के एजेंडे में न्याय व्यवस्था से जुड़े सुधार और संवैधानिक बदलाव भी शामिल रहे हैं। उनकी सरकार का लक्ष्य इटली की राजनीतिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और सरकार की स्थिरता बढ़ाने से जुड़े सुधारों को आगे बढ़ाना रहा है।
हालांकि इन सुधारों को लेकर इटली की राजनीति में समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले हैं। विपक्षी दलों ने कई प्रस्तावों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार इन्हें राजनीतिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम बताती रही है।
यूरोपीय संघ में इटली के हितों पर जोर
मेलोनी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद यूरोपीय संघ के भीतर इटली के राष्ट्रीय हितों को प्रमुखता देने की कोशिश की है। उनका राजनीतिक दृष्टिकोण यूरोप के साथ सहयोग बनाए रखने के साथ-साथ इटली की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान पर भी जोर देता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर मेलोनी ने इटली की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश की है। इसी वजह से वह यूरोपीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली नेता के रूप में उभरी हैं।
सरोगेसी पर भी कड़ा कानून
मेलोनी सरकार की सामाजिक नीतियों में सरोगेसी को लेकर लिया गया फैसला भी चर्चा में रहा है। इटली ने विदेशों में कराई गई सरोगेसी को लेकर भी कड़ा कानूनी रुख अपनाया है।
सरकार का तर्क रहा है कि सरोगेसी महिलाओं के शरीर के व्यावसायीकरण और बच्चों के व्यापार जैसी चिंताओं को जन्म दे सकती है। इस मुद्दे पर मेलोनी सरकार की नीति को लेकर इटली के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस हुई है।
ट्रंप के साथ रिश्तों पर भी चर्चा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मेलोनी के संबंध भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर चर्चा का विषय रहे हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में मेलोनी ने स्वीकार किया कि उन्हें उम्मीद थी कि ट्रंप के साथ काम करना आसान होगा, लेकिन परिस्थितियां उनकी अपेक्षा के मुताबिक नहीं रहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेताओं के बीच कई सप्ताह से बातचीत नहीं हुई थी।
मेलोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इटली की विदेश नीति व्यक्तिगत रिश्तों के
आधार पर तय नहीं होती और पश्चिमी देशों की एकता उनके लिए महत्वपूर्ण है।
मुसोलिनी के रिकॉर्ड से अलग है यह उपलब्धि
मेलोनी के नए रिकॉर्ड की चर्चा करते समय बेनिटो मुसोलिनी का नाम भी सामने आता है।
मुसोलिनी लगभग 20 साल 8 महीने तक इटली के प्रधानमंत्री रहे थे।
हालांकि उनका कार्यकाल 1946 में स्थापित इटली गणराज्य से पहले के फासीवादी शासन के दौर का था।
इसलिए मेलोनी का रिकॉर्ड इटली गणराज्य के 1946 के बाद वाले दौर के संदर्भ में देखा जा रहा है।
इसी अवधि में लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं में सिल्वियो बर्लुस्कोनी प्रमुख रहे हैं।
कभी सिर्फ 3 प्रतिशत वोट तक सीमित थी पार्टी
मेलोनी की राजनीतिक यात्रा का सबसे दिलचस्प पहलू उनकी पार्टी का शुरुआती प्रदर्शन है।
ब्रदर्स ऑफ इटली को अपने शुरुआती वर्षों में बड़ा जनसमर्थन नहीं मिला था। रिपोर्ट के
मुताबिक पार्टी करीब सात वर्षों तक लगभग 3 प्रतिशत वोट के स्तर पर बनी रही।
धीरे-धीरे पार्टी का प्रभाव बढ़ा और मेलोनी खुद इटली की दक्षिणपंथी राजनीति का प्रमुख चेहरा बन गईं।
2022 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान भी तेजी से बढ़ी।
क्यों महत्वपूर्ण है मेलोनी का रिकॉर्ड?
मेलोनी का संभावित रिकॉर्ड केवल व्यक्तिगत राजनीतिक उपलब्धि नहीं है।
यह इटली की उस राजनीतिक व्यवस्था में स्थिर सरकार की ओर भी संकेत करता है,
जहां द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सरकारों में बार-बार बदलाव देखने को मिले हैं।
लगातार चार साल के करीब सत्ता में रहना मेलोनी के नेतृत्व, गठबंधन प्रबंधन और राजनीतिक
रणनीति की मजबूती को दर्शाता है। आने वाले समय में उनकी सरकार के आर्थिक, सामाजिक और
विदेश नीति से जुड़े फैसले इस रिकॉर्ड के राजनीतिक महत्व को और प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
जॉर्जिया मेलोनी की कहानी इटली की राजनीति में एक असाधारण राजनीतिक उभार की कहानी है।
जिस पार्टी को कभी सीमित समर्थन और करीब 3 प्रतिशत वोट के लिए
जाना जाता था, उसी पार्टी की नेता आज इटली की प्रधानमंत्री हैं और सितंबर 2026 में
गणराज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं।
उनकी सरकार की पहचान अवैध प्रवासन पर सख्त नीति, राष्ट्रीय हितों पर जोर, न्याय और संवैधानिक
सुधारों की कोशिश तथा यूरोपीय और वैश्विक मंच पर इटली की भूमिका को मजबूत करने के प्रयासों से बनी है।
अब मेलोनी के सामने चुनौती इस राजनीतिक स्थिरता को आगे भी बनाए रखने की है।
FAQ
सवाल 1: जॉर्जिया मेलोनी कौन हैं?
जवाब: जॉर्जिया मेलोनी इटली की प्रधानमंत्री हैं और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं।
सवाल 2: जॉर्जिया मेलोनी कब प्रधानमंत्री बनी थीं?
जवाब: वह 2022 में इटली की प्रधानमंत्री बनी थीं।
सवाल 3: मेलोनी कौन सा रिकॉर्ड बनाने वाली हैं?
जवाब: सितंबर 2026 में चार साल का लगातार कार्यकाल पूरा करने के बाद वह 1946 में
इटली गणराज्य की स्थापना के बाद सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने वाली नेता बन जाएंगी।
सवाल 4: मेलोनी की पार्टी का नाम क्या है?
जवाब: उनकी पार्टी का नाम ब्रदर्स ऑफ इटली (Fratelli d’Italia) है।
सवाल 5: क्या मेलोनी की पार्टी को शुरुआत में बड़ा समर्थन मिला था?
जवाब: नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती वर्षों में पार्टी करीब 3 प्रतिशत वोट के आसपास सीमित रही थी।
सवाल 6: मेलोनी की सरकार की प्रमुख नीति क्या रही है?
जवाब: अवैध प्रवासन पर सख्ती, न्याय और संवैधानिक सुधार तथा इटली के
राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना उनकी सरकार की प्रमुख नीतियों में शामिल रहा है।
सवाल 7: क्या मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं?
जवाब: हां, जॉर्जिया मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं।
सवाल 8: मेलोनी और डोनाल्ड ट्रंप के संबंध क्यों चर्चा में हैं?
जवाब: हालिया इंटरव्यू में मेलोनी ने कहा कि उन्हें ट्रंप के साथ सहयोग आसान होने की उम्मीद थी,
लेकिन परिस्थितियां अलग रहीं। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच कई सप्ताह से बातचीत नहीं हुई थी।
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