2050 तक दुनिया के सबसे बड़े शहरों
आने वाले करीब 25 वर्षों में दुनिया के बड़े शहरों की आबादी और शहरीकरण का नक्शा काफी बदल सकता है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक 2050 तक एशिया और अफ्रीका दुनिया के सबसे बड़े शहरी केंद्रों का प्रमुख आधार बन जाएंगे। बांग्लादेश की राजधानी ढाका करीब 5.21 करोड़ की अनुमानित आबादी के साथ दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहर बन सकता है। इसके बेहद करीब जकार्ता करीब 5.18 करोड़ आबादी के साथ दूसरे स्थान पर रह सकता है।
इस अनुमान की खास बात यह है कि भारत के भी तीन बड़े शहर दुनिया के शीर्ष 15 मेगासिटी में शामिल रहेंगे। नई दिल्ली करीब 3.39 करोड़, कोलकाता करीब 2.38 करोड़ और मुंबई करीब 2.31 करोड़ आबादी के साथ इस सूची में जगह बना सकते हैं। अनुमानित सूची में नई दिल्ली चौथे स्थान पर रह सकती है।
2050 तक ढाका बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा शहर?
शहरी आबादी के अनुमानों के अनुसार 2050 में ढाका की आबादी करीब 5.21 करोड़ तक पहुंच सकती है। इस आंकड़े के साथ बांग्लादेश की राजधानी दुनिया के सबसे बड़े शहरी केंद्र के रूप में उभर सकती है।
ढाका के बाद इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता का स्थान बताया गया है, जिसकी आबादी करीब 5.18 करोड़ हो सकती है। दोनों शहरों के बीच आबादी का अंतर बहुत कम रहने का अनुमान है।
इस बदलाव को केवल जनसंख्या वृद्धि के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह एशिया में तेज शहरीकरण, रोजगार के लिए शहरों की ओर बढ़ते लोगों और महानगरीय क्षेत्रों के लगातार विस्तार की ओर भी संकेत करता है।
शंघाई तीसरे नंबर पर
2050 की अनुमानित सूची में चीन का शंघाई करीब 3.49 करोड़ की आबादी के साथ तीसरे स्थान पर रह सकता है। इसके बाद भारत की नई दिल्ली का नंबर आने का अनुमान है।
इसका मतलब है कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले महानगरों में एशियाई शहरों का दबदबा और मजबूत हो सकता है। उपलब्ध अनुमान के अनुसार टॉप-15 में 13 शहर एशिया से हो सकते हैं।
यह बदलाव पिछले कई दशकों में वैश्विक शहरी विकास की दिशा में आए बड़े परिवर्तन को भी दर्शाता है। जहां पहले यूरोप और अमेरिका के शहर दुनिया के सबसे बड़े शहरी केंद्रों में प्रमुख स्थान रखते थे, वहीं भविष्य की सूची में एशिया और अफ्रीका का प्रभाव बढ़ता नजर आता है।
भारत के तीन शहरों की बड़ी मौजूदगी
भारत के लिए 2050 का अनुमान खास महत्व रखता है। नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई तीनों शहर दुनिया के शीर्ष 15 मेगासिटी में शामिल हो सकते हैं।
नई दिल्ली की अनुमानित आबादी करीब 3.39 करोड़ बताई गई है। इसके साथ वह दुनिया में चौथे स्थान पर रह सकती है। कोलकाता करीब 2.38 करोड़ और मुंबई करीब 2.31 करोड़ आबादी के साथ शीर्ष शहरों में जगह बनाए रख सकते हैं।
भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण का असर केवल आबादी के आंकड़ों पर नहीं पड़ेगा। बड़े शहरों में आवास, परिवहन, रोजगार, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं की मांग भी बढ़ेगी।
कौन-कौन से शहर होंगे टॉप-15 में?
2050 के अनुमानित आंकड़ों में एशिया के कई बड़े शहरों का दबदबा दिखाई देता है। ढाका, जकार्ता और शंघाई के अलावा नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई प्रमुख शहरों में रहेंगे।
चीन के ग्वांगझू, पाकिस्तान के कराची और लाहौर, तथा फिलीपींस की राजधानी मनीला भी तेजी से बढ़ते शहरी केंद्रों में शामिल रहने का अनुमान है।
अफ्रीका में भी कई शहरों की आबादी तेजी से बढ़ने की संभावना है। काहिरा और लुआंडा इसके प्रमुख उदाहरण हैं। अनुमान के अनुसार काहिरा की आबादी करीब 3.24 करोड़ और लुआंडा की आबादी करीब 2.03 करोड़ तक पहुंच सकती है।
अफ्रीका में भी तेजी से बढ़ेगा शहरीकरण
भविष्य के बड़े शहरों की सूची में सिर्फ एशिया का ही दबदबा नहीं रहेगा। अफ्रीका में भी शहरी आबादी तेजी से बढ़ने का अनुमान है।
कई अफ्रीकी देशों में रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर आबादी बढ़ रही है। इसके कारण राजधानी और बड़े औद्योगिक शहरों का विस्तार हो रहा है।
वैश्विक स्तर पर शहरीकरण पहले से ही तेज गति से बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया की लगभग 45 प्रतिशत आबादी अब शहरों में रहती है और शहरी आबादी का हिस्सा आने वाले दशकों में और बढ़ने की संभावना है।
इतनी बड़ी आबादी वाले शहरों के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
करोड़ों लोगों की आबादी वाले शहरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी ढांचे की होगी। यदि किसी महानगर की आबादी 2 करोड़ से बढ़कर 5 करोड़ के करीब पहुंचती है तो उसके लिए सिर्फ नए मकान बनाना पर्याप्त नहीं होगा।
ऐसे शहरों को पर्याप्त साफ पानी, बिजली, सीवरेज, सड़क, सार्वजनिक परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत होगी। इसके साथ ही किफायती आवास उपलब्ध कराना भी सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बनेगा।
शहरों में बढ़ती आबादी का सीधा असर ट्रैफिक पर भी पड़ सकता है। निजी वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम, वायु प्रदूषण और पार्किंग की समस्या गंभीर हो सकती है। इसलिए भविष्य के शहरों में मेट्रो, बस रैपिड ट्रांजिट, लोकल ट्रेन और अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों का विस्तार जरूरी होगा।
आवास की बढ़ती मांग बनेगी बड़ी चुनौती
जब किसी शहर की आबादी करोड़ों में पहुंचती है तो सबसे पहले आवास की मांग बढ़ती है। यदि योजनाबद्ध तरीके से नए आवासीय क्षेत्र विकसित नहीं किए गए तो अनधिकृत बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों का विस्तार हो सकता है।
नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य भारतीय महानगर पहले से ही आवास और जमीन की बढ़ती कीमतों की चुनौती का सामना करते हैं। भविष्य में आबादी बढ़ने के साथ यह दबाव और बढ़ सकता है।
इसलिए 2050 के शहरों की योजना आज से तैयार करना जरूरी होगा। शहरों का
विस्तार केवल बाहरी क्षेत्रों में करने के बजाय मौजूदा इलाकों में बेहतर
सार्वजनिक सेवाएं और परिवहन सुविधाएं विकसित करना भी जरूरी होगा।
पानी और बिजली की मांग भी बढ़ेगी
करोड़ों लोगों वाले शहरों में पानी की मांग बहुत ज्यादा होगी। पीने के पानी के अलावा उद्योग,
अस्पताल, होटल, कार्यालय और घरेलू उपयोग के लिए भी भारी मात्रा में पानी की जरूरत होगी।
इसी तरह बिजली की मांग बढ़ने के साथ ऊर्जा infrastructure को मजबूत करना होगा।
भविष्य में शहरों को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत हो सकती है।
जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, अत्यधिक गर्मी और समुद्र के बढ़ते जलस्तर जैसी चुनौतियां भी
कई एशियाई शहरों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। खासकर तटीय और निचले इलाकों में बसे महानगरों के लिए
शहरी योजना में जलवायु जोखिम को शामिल करना जरूरी होगा।
दुनिया का आर्थिक केंद्र भी बदल सकता है
जनसंख्या और शहरीकरण का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
बड़ी आबादी वाले शहर आम तौर पर रोजगार, व्यापार, उद्योग, सेवाओं और निवेश के बड़े केंद्र बनते हैं।
यदि 2050 तक एशिया और अफ्रीका के शहर दुनिया के सबसे बड़े शहरी केंद्र बनते हैं तो
वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में इन क्षेत्रों का महत्व और बढ़ सकता है।
बड़ी आबादी कंपनियों के लिए बड़ा उपभोक्ता बाजार भी तैयार करती है। इसके साथ ही लाखों
नए रोजगार, स्टार्टअप, निर्माण परियोजनाएं और सेवाओं की मांग पैदा हो सकती है।
नई दिल्ली के लिए भी बड़ा अवसर और चुनौती
2050 के अनुमान में नई दिल्ली का चौथे स्थान पर रहना भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
करीब 3.39 करोड़ की आबादी वाले महानगरीय क्षेत्र को बेहतर परिवहन, आवास और पर्यावरण व्यवस्था की जरूरत होगी।
दिल्ली-एनसीआर पहले से ही कई शहरों को जोड़ने वाला बड़ा आर्थिक क्षेत्र है। आने वाले वर्षों में नोएडा,
गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे आसपास के क्षेत्रों के साथ इसका शहरी विस्तार और बढ़ सकता है।
ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर परिवहन और बुनियादी ढांचे की योजना बनाना जरूरी होगा,
ताकि एक शहर पर अत्यधिक दबाव न पड़े।
*मुंबई और कोलकाता पर भी बढ़ेगा दबाव
मुंबई और कोलकाता के लिए भी बढ़ती आबादी कई अवसरों के साथ चुनौतियां लेकर आएगी।
मुंबई जैसे तटीय शहर में आवास और परिवहन के अलावा बाढ़ तथा समुद्री जोखिम भी महत्वपूर्ण होंगे।
कोलकाता के सामने भी जल निकासी, आवास, परिवहन और जलवायु से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
इन शहरों को भविष्य की आबादी के हिसाब से तैयार करने के लिए
लंबी अवधि की योजनाओं और मजबूत स्थानीय प्रशासन की जरूरत होगी।
2050 की तस्वीर आज से तय करनी होगी
2050 अभी दूर दिखाई देता है, लेकिन इतने बड़े शहरों की योजना तैयार करने में कई दशक लग सकते हैं।
सड़क, मेट्रो, जलापूर्ति, सीवरेज, बिजली नेटवर्क और आवासीय परियोजनाएं लंबे समय में तैयार होती हैं।
इसीलिए भविष्य की आबादी के अनुमानों को आज की शहरी नीतियों में शामिल करना महत्वपूर्ण है।
दुनिया में शहरी आबादी का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है और 2050 तक वैश्विक आबादी का करीब 83 प्रतिशत शहरों,
कस्बों और उपनगरों में रहने का अनुमान बताया गया है।
कुल मिलाकर 2050 की अनुमानित तस्वीर बताती है कि दुनिया का
शहरी भविष्य मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका के
इर्द-गिर्द घूम सकता है। ढाका और जकार्ता जैसे शहर सबसे बड़े महानगरों में शामिल हो सकते हैं,
जबकि नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई भारत की मजबूत शहरी मौजूदगी बनाए रखेंगे।
हालांकि इतनी बड़ी आबादी को बेहतर जीवन देने के लिए आज से ही आवास,
पानी, परिवहन, ऊर्जा और पर्यावरण की व्यापक योजना बनाना सबसे जरूरी होगा।
FAQs
1. 2050 में दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहर कौन बन सकता है?
अनुमान के अनुसार बांग्लादेश की राजधानी ढाका करीब 5.21 करोड़
आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा शहर बन सकता है।
2. 2050 में जकार्ता की आबादी कितनी हो सकती है?
जकार्ता की अनुमानित आबादी करीब 5.18 करोड़ बताई गई है और वह दूसरे स्थान पर रह सकता है।
3. 2050 में भारत के कौन से शहर टॉप-15 में रहेंगे?
नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई के दुनिया के शीर्ष 15 मेगासिटी में शामिल रहने का अनुमान है।
4. 2050 में नई दिल्ली की अनुमानित आबादी कितनी होगी?
नई दिल्ली की अनुमानित आबादी करीब 3.39 करोड़ बताई गई है।
5. 2050 में शंघाई किस स्थान पर रह सकता है?
अनुमानित सूची में शंघाई करीब 3.49 करोड़ आबादी के साथ तीसरे स्थान पर रह सकता है।
6. भविष्य में एशिया के शहरों का दबदबा क्यों बढ़ेगा?
तेजी से बढ़ती आबादी, शहरीकरण और रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्रों के
विस्तार के कारण एशिया के कई शहर दुनिया के सबसे बड़े शहरी केंद्र बन सकते हैं।
7. इतनी बड़ी आबादी वाले शहरों की सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
आवास, साफ पानी, बिजली, सीवरेज, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, ट्रैफिक और पर्यावरण प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल होंगे।
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