मल्लिकार्जुन खरगे
देश में चीनी की कीमतों और उपलब्धता को लेकर शनिवार को सियासी बहस तेज हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए चीनी के बढ़ते दाम, कम होते स्टॉक और इथेनॉल नीति को लेकर सवाल उठाए। इसके जवाब में बीजेपी नेता अमित मालवीय ने खरगे के आरोपों को आंकड़ों के आधार पर खारिज करने की कोशिश की और कहा कि चीनी की कीमत तथा आयात को E20 से जोड़ना सही नहीं है।
खरगे ने चीनी की कीमतों को लेकर सरकार को घेरा
मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 40 फीसदी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय जब घरेलू मांग बढ़ती है, तब महंगाई का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। खरगे ने केंद्र सरकार से पूछा कि देश में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया।
खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि भारत जैसे बड़े चीनी उत्पादक देश को करीब 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी। उनके मुताबिक सरकार को चीनी की उपलब्धता और कीमतों से जुड़े फैसलों की समीक्षा करनी चाहिए।
E20 और इथेनॉल नीति पर भी सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने चीनी की कमी को इथेनॉल नीति से जोड़ते हुए सवाल किया कि जब देश में चीनी की उपलब्धता कम बताई जा रही है, तो गन्ने और अनाज का इस्तेमाल E20 के लिए इथेनॉल बनाने में क्यों किया जा रहा है।
खरगे का तर्क है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल की नीति की समीक्षा की जानी चाहिए, खासकर तब जब चीनी की कीमतें बढ़ रही हों और सरकार को विदेश से चीनी आयात करनी पड़ रही हो।
अमित मालवीय ने खरगे के आरोपों पर दिया जवाब
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चीनी की कीमत, स्टॉक और आयात को सीधे E20 से जोड़ना राजनीतिक तर्क हो सकता है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस दावे का समर्थन नहीं करते।
मालवीय के मुताबिक चीनी का आयात मुख्य रूप से देश के शुगर बैलेंस यानी उत्पादन, घरेलू खपत, उपलब्ध स्टॉक और कीमतों को देखते हुए किया जाता है। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति के पीछे उत्पादन में कमी और घटता स्टॉक ज्यादा महत्वपूर्ण कारण हैं।
चीनी उत्पादन में आई बड़ी गिरावट
अमित मालवीय ने अपने जवाब में 2025-26 के चीनी उत्पादन के आंकड़ों का हवाला दिया। उनके मुताबिक शुरुआती अनुमान करीब 349 लाख टन था, लेकिन बाद में उत्पादन का अनुमान लगभग 280 लाख टन तक आ गया।
बीजेपी नेता का कहना है कि उत्पादन में इस बड़ी गिरावट के साथ खपत अपेक्षाकृत स्थिर रही और क्लोजिंग स्टॉक भी कम हुआ। ऐसे में घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात करना एक नीतिगत कदम है।
मालवीय बोले- E20 से पहले भी होती थी चीनी की कमी और आयात
अमित मालवीय ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए पुराने आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में E20 लागू होने से पहले भी चीनी का आयात होता रहा है।
उनके अनुसार UPA-II के दौरान 2009-10 से 2013-14 के बीच कुल 75.25 लाख टन चीनी का आयात हुआ था। इनमें 2009-10 में ही करीब 41.8 लाख टन आयात शामिल था। मालवीय का कहना है कि उस समय E20 का मुद्दा मौजूद नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा कि आयात की गई कच्ची चीनी का पूरा हिस्सा घरेलू उपभोग में नहीं जाता, क्योंकि इसका कुछ हिस्सा प्रोसेसिंग और दोबारा निर्यात के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
*E20 क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों?
E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल का मिश्रण होता है। भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और किसानों के लिए गन्ने तथा अन्य फीडस्टॉक से अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है।
E20 को लेकर राजनीतिक बहस हाल के महीनों में तेज हुई है। कांग्रेस की ओर से इसके प्रभावों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि बीजेपी का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग की नीति की शुरुआत मौजूदा सरकार से पहले हो चुकी थी।
बीजेपी ने E20 नीति की पुरानी पृष्ठभूमि भी बताई
बीजेपी की ओर से पहले भी यह तर्क दिया गया है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग की शुरुआत कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौर में हुई थी। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने जुलाई 2026 में दावा किया था कि E10 से संबंधित शुरुआती फैसले यूपीए सरकार के समय लिए गए थे और बाद में नीति का विस्तार हुआ।
इस राजनीतिक बहस का एक अहम हिस्सा यह है कि दोनों पक्ष नीति की अलग-अलग समयसीमा और उसके प्रभावों को सामने रख रहे हैं।
त्योहारों से पहले महंगाई का मुद्दा
चीनी की कीमतों का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब देश में त्योहारों का मौसम नजदीक है। मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों के उत्पादन में चीनी की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में कीमतों में तेजी का असर मिठाई, बेकरी और दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत पर भी पड़ सकता है।
खरगे ने इसी संदर्भ में सरकार से जवाब मांगा है कि अगर घरेलू बाजार में उपलब्धता को
लेकर स्थिति सामान्य थी तो आयात की जरूरत क्यों पड़ी और कीमतों में इतनी तेजी कैसे आई।
सरकार और विपक्ष के दावों में मुख्य अंतर
इस पूरे विवाद में कांग्रेस और बीजेपी के तर्क अलग-अलग हैं।
कांग्रेस का सवाल: चीनी का स्टॉक घट रहा है, कीमतें बढ़ रही हैं और
आयात करना पड़ रहा है तो E20 के लिए गन्ने के इस्तेमाल की समीक्षा क्यों नहीं होनी चाहिए?
बीजेपी का जवाब: चीनी की कीमत और आयात को E20 से जोड़ना सही नहीं है।
उत्पादन में कमी और घटता स्टॉक मौजूदा स्थिति के प्रमुख कारण हैं।
यानी विवाद का केंद्र यह है कि चीनी की मौजूदा स्थिति के लिए उत्पादन और
स्टॉक में कमी जिम्मेदार है या इथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल की नीति।
आम जनता पर क्या पड़ सकता है असर?
अगर चीनी की कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो
इसका असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
इसके अलावा मिठाई और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की लागत भी बढ़ सकती है।
हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में घरेलू उत्पादन, स्टॉक,
आयात और बाजार में चीनी की उपलब्धता किस स्तर पर रहती है।
निष्कर्ष
चीनी की कीमतों और E20 नीति को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच
राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मल्लिकार्जुन खरगे ने चीनी के बढ़ते दाम, कम स्टॉक और
10 लाख टन आयात को लेकर मोदी सरकार से सवाल किए हैं, जबकि
अमित मालवीय ने उत्पादन में गिरावट और घटते स्टॉक को मौजूदा दबाव की मुख्य वजह बताया है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और आंकड़े सामने रख रहे हैं। आने वाले दिनों में चीनी उत्पादन,
आयात और कीमतों के आंकड़े इस बहस की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
FAQ
1. मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार से क्या सवाल किया?
खरगे ने चीनी की बढ़ती कीमत, कम होते स्टॉक और करीब 10 लाख टन चीनी के
आयात को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किए।
2. खरगे के मुताबिक चीनी कितनी महंगी हुई?
खरगे ने दावा किया कि तीन महीने में चीनी की कीमत करीब 40 फीसदी बढ़ी है।
3. अमित मालवीय ने क्या जवाब दिया?
अमित मालवीय ने कहा कि चीनी की कीमत और आयात को E20 से जोड़ना सही नहीं है।
उनके मुताबिक उत्पादन में गिरावट और कम स्टॉक मौजूदा दबाव की प्रमुख वजह हैं।
4. E20 पेट्रोल क्या होता है?
E20 ऐसा पेट्रोल है जिसमें 20 फीसदी इथेनॉल और बाकी पेट्रोल होता है।
इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाना है।
5. चीनी का आयात क्यों किया जा रहा है?
अमित मालवीय के अनुसार उत्पादन में कमी और घटते स्टॉक के कारण
घरेलू उपलब्धता और कीमतों को संतुलित करने के लिए आयात किया जा रहा है।
6. 2025-26 में चीनी उत्पादन का क्या अनुमान बताया गया?
अमित मालवीय के अनुसार शुरुआती उत्पादन अनुमान करीब 349 लाख टन था, जो घटकर लगभग 280 लाख टन रह गया।
7. क्या E20 नीति की शुरुआत मौजूदा सरकार ने की?
बीजेपी का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की शुरुआत यूपीए सरकार के दौर में हुई थी और
बाद की सरकारों ने इसका विस्तार किया।
8. चीनी की कीमत बढ़ने का असर किस पर पड़ सकता है?
चीनी की कीमत बढ़ने से घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा मिठाई, बेकरी और
खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों की लागत भी प्रभावित हो सकती है।
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