प्रज्वल रेवन्ना के जेल में मिले मोबाइल
दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना एक बार फिर चर्चा में हैं। बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में उनके बैरक से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में दर्जनों अश्लील वीडियो मिलने की जानकारी सामने आई है। यह मामला केवल मोबाइल के जेल के अंदर पहुंचने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था और कथित वीआईपी सुविधाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस और जेल अधिकारियों की कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। ताजा जांच में मोबाइल और सिम कार्ड को जेल तक पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि प्रतिबंधित सामान जेल के भीतर पहुंचाने का मामला एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
अचानक छापेमारी में पकड़ा गया था मोबाइल
यह पूरा मामला 11 अगस्त 2026 को हुई अचानक छापेमारी के बाद सामने आया। केंद्रीय अपराध शाखा यानी CCB की टीम ने बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल के हाई-सिक्योरिटी बैरक में तलाशी ली थी। इसी दौरान एक मोबाइल फोन, चार्जर, पेन ड्राइव और नोटबुक समेत कुछ सामान बरामद हुआ।
जिस सेल से सामान मिला, उसमें प्रज्वल रेवन्ना और एक अन्य कैदी प्रताप राय रह रहे थे। मोबाइल फोन जेल में प्रतिबंधित सामान है, इसलिए इसके बरामद होने के बाद अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी। मामले में जेल प्रशासन के स्तर पर भी कार्रवाई की गई और अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू हुई।
फोरेंसिक जांच में सामने आए दर्जनों अश्लील वीडियो
जब्त मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। जांच के बाद फोन में दर्जनों पोर्नोग्राफिक वीडियो मिलने की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में वीडियो की संख्या करीब 90 बताई गई है।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि फोन की सामग्री की बरामदगी और उसकी फोरेंसिक जांच को लेकर रिपोर्ट सामने आई है, लेकिन इन डिजिटल फाइलों के स्रोत, उन्हें किसने डिवाइस में डाला और उनका इस्तेमाल किसने किया, इन सवालों की जांच अभी महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से जांच एजेंसियां सिर्फ वीडियो मिलने पर नहीं रुक रही हैं। उनका ध्यान इस बात पर भी है कि मोबाइल फोन जेल की सुरक्षा व्यवस्था को पार करके अंदर कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
फोन में कई ऐप भी मिले
जांच के दौरान मोबाइल फोन में व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो जैसे कई ऐप मौजूद होने की जानकारी भी सामने आई थी। कुछ ऐप पासवर्ड से सुरक्षित बताए गए हैं।
इससे जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फोन का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था, किन लोगों से संपर्क किया गया और जेल के अंदर इस डिवाइस तक किस तरह पहुंच बनी।
जेल में फोन पहुंचाने वाले नेटवर्क की जांच
मामले का सबसे गंभीर पहलू मोबाइल फोन की जेल के भीतर एंट्री है। ताजा जांच के अनुसार, पुलिस ने कथित तौर पर मोबाइल और सिम कार्ड जेल तक पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। एक जेल वार्डर समेत कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
पुलिस की जांच अब इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि क्या जेल कर्मचारियों की मिलीभगत से प्रतिबंधित मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान अंदर पहुंचाए जाते थे। एक अन्य जांच में जेल के भीतर मोबाइल फोन की कथित तस्करी के बड़े नेटवर्क का भी पता चला है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि जेल के भीतर मोबाइल
फोन की कीमत बाहर की तुलना में कई गुना अधिक हो सकती थी। इससे
आशंका जताई जा रही है कि जेल में प्रतिबंधित सामान पहुंचाने का एक संगठित तंत्र सक्रिय था।
पुलिस हिरासत में भी भेजे गए थे रेवन्ना
मोबाइल इस्तेमाल के मामले में जांच आगे बढ़ने के बाद सितंबर में प्रज्वल रेवन्ना को
अदालत के सामने पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेजा था।
जांच अधिकारियों का फोकस इस बात पर था कि मोबाइल फोन और दूसरे सामान को
जेल तक किसने पहुंचाया और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। पुलिस
यह भी जानना चाहती थी कि जेल कर्मचारियों की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं।
वीआईपी कैदियों को लेकर फिर उठे सवाल
प्रज्वल रेवन्ना के मामले ने बेंगलुरु की जेल में वीआईपी कैदियों को कथित तौर पर मिलने वाली सुविधाओं पर
एक बार फिर बहस छेड़ दी है। इससे पहले भी इसी जेल से कैदियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और
जेल के भीतर विशेष सुविधाएं मिलने से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं।
रेवन्ना के बैरक से मोबाइल फोन बरामद होने के बाद जेल प्रशासन की
निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर हाई-सिक्योरिटी बैरक तक
मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित सामान कैसे पहुंचा, यह जांच का अहम हिस्सा है।
कौन हैं प्रज्वल रेवन्ना?
प्रज्वल रेवन्ना जनता दल (सेक्युलर) के पूर्व सांसद हैं और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते हैं।
उन्हें एक दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
उनके खिलाफ चल रहे मामलों में यौन अपराध और उससे जुड़े गंभीर आरोप शामिल रहे हैं।
रेवन्ना ने अपने खिलाफ लगे आरोपों का खंडन किया है और
उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही को लेकर अपील भी लंबित रही है।
अब जांच की दिशा क्या होगी?
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल तीन हैं—मोबाइल फोन जेल के अंदर किसने पहुंचाया,
इसका इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और फोन में मौजूद डिजिटल सामग्री का वास्तविक स्रोत क्या है।
जांच एजेंसियां मोबाइल की फोरेंसिक रिपोर्ट, कॉल और डिजिटल गतिविधियों तथा आरोपियों के बयानों को
जोड़कर पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ करने की कोशिश कर रही हैं। ताजा गिरफ्तारियों से यह संकेत मिलता है कि
जांच अब सिर्फ एक कैदी के मोबाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि जेल में प्रतिबंधित
इलेक्ट्रॉनिक सामान की सप्लाई से जुड़े संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल हो रही है।
निष्कर्ष
प्रज्वल रेवन्ना के जेल से जुड़े मोबाइल मामले ने कर्नाटक की
जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फोन से दर्जनों अश्लील वीडियो मिलने की फोरेंसिक रिपोर्ट ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
वहीं मोबाइल और सिम की कथित सप्लाई को लेकर हुई गिरफ्तारियों से जांच का दायरा भी बढ़ गया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर जेल के भीतर
मोबाइल पहुंचाने वाले नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों को लेकर क्या नए तथ्य सामने आते हैं। साथ ही यह मामला जेलों में
हाई-प्रोफाइल कैदियों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़ा सवाल बन गया है।
read this post :हरीश रावत का कांग्रेस के पदों से इस्तीफा, चंदन सिंह जीना पर ED कार्रवाई के बाद लिया बड़ा फैसला
