इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति
ट्रंप की चेतावनी के बावजूद इजरायल का बड़ा सैन्य एक्शन
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से संयम बरतने और जवाबी कार्रवाई न करने की अपील के बावजूद Benjamin Netanyahu के नेतृत्व वाले इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले कर दिए। रिपोर्टों के अनुसार इजरायली वायुसेना ने ईरानी सीमा में प्रवेश किए बिना लंबी दूरी की मिसाइलों से कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया।
तेहरान, इस्फहान और तबरीज समेत कई शहर बने निशाना
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजधानी Tehran, Isfahan, Tabriz और पश्चिमी ईरान के कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इजरायल ने इन हमलों को हाल ही में हुए ईरानी मिसाइल हमलों का जवाब बताया है। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
ट्रंप ने दी थी जवाबी कार्रवाई से बचने की सलाह
हमले से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बातचीत कर उन्हें ईरान के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई से बचने की सलाह दी थी। ट्रंप का मानना था कि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम किया जा सकता है और अमेरिका-ईरान वार्ता को आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इजरायल ने अपनी सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना।
ईरान-इजरायल टकराव के बाद हाई अलर्ट
इजरायल ने हमले के तुरंत बाद पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। स्कूलों को बंद रखने और अस्पतालों को भूमिगत सुविधाओं से संचालित करने जैसे कदम उठाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि ईरान जवाबी हमला कर सकता है। वहीं कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ा दी है।
ईरान की संभावित प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान जवाबी कार्रवाई करता है तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व में फैल सकता है। हाल के दिनों में ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइलें दागे जाने और यमन से भी हमलों की खबरों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को और जटिल बना दिया है। इस स्थिति का
असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर भी पड़ सकता है।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर कच्चे तेल की
कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशकों को आशंका है कि
यदि संघर्ष लंबा चला तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में
अस्थिरता बढ़ने लगी है और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं।
इजरायल द्वारा ट्रंप की सलाह को नजरअंदाज कर ईरान पर किए गए हमले ने
मध्य पूर्व को एक बार फिर युद्ध जैसे हालात की ओर धकेल दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर
ईरान की प्रतिक्रिया और अमेरिका की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।
यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका
असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जा सकता है।
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