पाकिस्तान में ईंधन संकट गहराने
इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव का असर पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पेट्रोलियम आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच पाकिस्तान सरकार ईंधन की खपत कम करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठकों में सरकारी और निजी कार्यालयों के कामकाज, बाजारों के समय, सरकारी वाहनों के इस्तेमाल तथा परिवहन गतिविधियों को सीमित करने जैसे उपायों पर चर्चा की गई। इनमें सप्ताह में तीन दिन छुट्टी और चार दिन काम करने का प्रस्ताव भी शामिल बताया गया है। हालांकि, इन सभी उपायों को अंतिम सरकारी आदेश मानना अभी सही नहीं होगा।
क्यों बढ़ा पाकिस्तान का ईंधन संकट?
पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।
पाकिस्तान भी अपनी पेट्रोलियम जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने के साथ देश के आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है।
हालिया घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत बढ़कर करीब 380.24 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 409.42 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई।
तीन दिन की छुट्टी और चार दिन काम का प्रस्ताव
ईंधन की खपत कम करने के लिए पाकिस्तान सरकार के सामने सप्ताह में चार दिन काम और तीन दिन छुट्टी का विकल्प रखा गया है।
इस प्रस्ताव के तहत शुक्रवार, शनिवार और रविवार को छुट्टी रखने तथा सोमवार से गुरुवार तक कार्यालय संचालित करने की संभावना पर विचार किया गया। इसका उद्देश्य कर्मचारियों की रोजाना आवाजाही घटाकर पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करना है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए रोटेशन आधारित ड्यूटी व्यवस्था का विकल्प भी चर्चा में बताया गया है। इससे एक ही समय पर सभी कर्मचारियों के कार्यालय पहुंचने की आवश्यकता कम हो सकती है।
बाजार और कारोबारी गतिविधियों पर भी असर
ईंधन बचाने की योजना में बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कामकाज के समय को कम करने का विकल्प भी शामिल है।
सरकार के सामने बाजारों को सप्ताह में कुछ दिन बंद रखने और कारोबारी समय घटाने जैसे विकल्प रखे गए हैं। इसके पीछे उद्देश्य केवल पेट्रोल की बचत करना नहीं, बल्कि परिवहन और बिजली की खपत को भी नियंत्रित करना है।
हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर अंतिम निर्णय और उनका वास्तविक दायरा अलग प्रशासनिक आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकारी वाहनों के इस्तेमाल में कटौती
ईंधन बचत के लिए सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को सीमित करने पर भी विचार किया गया है। एक प्रस्ताव में सरकारी वाहनों के बड़े हिस्से को अस्थायी रूप से इस्तेमाल से बाहर रखने की बात सामने आई है।
इस तरह के कदम से सरकारी कार्यालयों में पेट्रोल और
डीजल की खपत कम करने की कोशिश की जा सकती है।
छोटे वाहन मालिकों के लिए राहत योजना
ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने छोटे वाहन मालिकों को
राहत देने के लिए लक्षित सहायता योजना भी शुरू की है।
इसके तहत मोटरसाइकिल, रिक्शा, छोटे तीन-पहिया वाहन और 800 सीसी तक की कारों के मालिकों को
100 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की दर से सीमित ईंधन राहत देने की योजना बनाई गई है।
योजना को डिजिटल माध्यम से लागू करने की व्यवस्था की जा रही है
ताकि पात्र लोगों तक सहायता सीधे पहुंचाई जा सके।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी
पाकिस्तान में 15 सितंबर से पेट्रोल की कीमत में 4.42 रुपये प्रति लीटर और
हाई-स्पीड डीजल में 6.10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई।
इसके बाद पेट्रोल करीब 380 रुपये प्रति लीटर और डीजल 409 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया।
यह स्थिति आम लोगों के साथ-साथ परिवहन,
कारोबार और कृषि क्षेत्र के लिए भी अतिरिक्त लागत पैदा कर सकती है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
पाकिस्तान सरकार के सामने इस समय दो प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली चुनौती ईंधन की कीमतों को आम जनता के लिए कम से कम प्रभाव के साथ संभालना है और दूसरी तरफ देश में पेट्रोलियम की मांग को नियंत्रित करना है।
अगर सरकार ज्यादा सब्सिडी देती है तो सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अगर ईंधन की खपत कम करने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो कारोबार और आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।
इसी संतुलन को देखते हुए सरकार अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है।
क्या पाकिस्तान में लॉकडाउन लागू हो गया है?
इस सवाल पर स्थिति को समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सरकार के स्तर पर ईंधन बचाने के लिए “स्मार्ट लॉकडाउन” जैसे विकल्पों पर चर्चा की खबर सामने आई थी। लेकिन बाद में पाकिस्तान के संघीय मंत्री तारिक फजल चौधरी ने कहा कि जिस बैठक का हवाला दिया जा रहा है, उसमें स्मार्ट लॉकडाउन पर चर्चा नहीं हुई थी और उन्हें ऐसी योजना की जानकारी नहीं थी।
इसलिए फिलहाल पूरे पाकिस्तान में नया स्मार्ट लॉकडाउन लागू हो गया है, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
पहले भी अपनाए गए थे ईंधन बचत के उपाय
पाकिस्तान ने इससे पहले भी ऊर्जा संकट के दौरान ईंधन बचाने के लिए कई कदम उठाए थे।
इनमें सरकारी वाहनों के ईंधन भत्ते में कटौती, कुछ कर्मचारियों के लिए घर से काम की
व्यवस्था और बाजारों के संचालन समय को सीमित करना शामिल था।
इनमें से कई उपाय बाद में वापस लिए गए, जबकि कुछ बाजार समय से जुड़े प्रतिबंध जारी रहे।
अब पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़े तनाव के कारण
पुराने उपायों की समीक्षा और कुछ को फिर लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर ईंधन बचाने के लिए कामकाज के दिन घटाए जाते हैं या
बाजारों के समय में कटौती की जाती है, तो
इसका असर लोगों की दैनिक आवाजाही पर पड़ सकता है।
दूसरी तरफ, परिवहन कम होने से पेट्रोल-डीजल की मांग घटाने में मदद मिल सकती है। बाजारों के समय में
बदलाव से कारोबारियों और ग्राहकों दोनों के काम करने के तरीके में परिवर्तन आ सकता है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि ईंधन की बचत और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
पाकिस्तान के लिए आगे की राह
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बनी रहने की स्थिति में पाकिस्तान को
आयातित ऊर्जा पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सरकार को
तत्काल ईंधन बचत के साथ-साथ दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।
सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने जैसे विकल्पों पर भी काम कर रही है।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर अब ऊर्जा बाजार के जरिए पाकिस्तान की
अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार
ईंधन खपत कम करने के लिए चार दिन के कार्य सप्ताह, बाजारों के समय में बदलाव,
सरकारी वाहनों के इस्तेमाल में कटौती और अन्य उपायों पर विचार कर रही है।
हालांकि, स्मार्ट लॉकडाउन को लेकर अभी अंतिम और स्पष्ट स्थिति नहीं है। सरकार की ओर से
अलग-अलग स्तर पर सामने आए बयानों के कारण प्रस्ताव और लागू नीति के बीच अंतर करना जरूरी है।
आने वाले फैसलों से यह स्पष्ट होगा कि पाकिस्तान ईंधन संकट से निपटने के लिए कौन-से कदम वास्तव में लागू करता है।
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