रूस से तेल खरीद
रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिकी दबाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस प्रस्ताव में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति को देने का प्रावधान है।
इस प्रावधान के तहत कुछ परिस्थितियों में संबंधित देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत भी उन देशों में शामिल है जिन पर इस व्यवस्था का संभावित असर पड़ सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। अंतिम कानून और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई पर इसका वास्तविक प्रभाव निर्भर करेगा।
अमेरिकी हाउस में क्या हुआ?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में संबंधित विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए हुए प्रक्रियात्मक मतदान में प्रस्ताव 214 के मुकाबले 211 मतों से आगे बढ़ा। इसके बाद बिल को अंतिम मतदान की दिशा में ले जाने का रास्ता साफ हुआ है। अंतिम मतदान के बाद ही यह तय होगा कि विधेयक आगे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाता है या नहीं।
इस विधेयक का उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े आर्थिक तंत्र पर दबाव बढ़ाना है। प्रस्ताव में रूस के साथ ऊर्जा व्यापार करने वाले प्रमुख देशों पर माध्यमिक शुल्क लगाने की व्यवस्था भी चर्चा में है।
भारत का नाम क्यों महत्वपूर्ण है?
सीनेट से पारित संस्करण में रूस के तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों को सीधे नाम से सूचीबद्ध नहीं किया गया था। इसके बजाय रूस से तेल और गैस की सबसे अधिक मात्रा खरीदने वाले प्रमुख देशों को इस व्यवस्था के दायरे में लाने का प्रावधान रखा गया था।
बाद में प्रतिनिधि सभा में एक संशोधन के जरिए भारत, चीन सहित कई देशों के नाम सीधे शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया। प्रस्तावित सूची में भारत और चीन के अलावा तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिज गणराज्य जैसे देश शामिल हैं।
वहीं, एक अन्य संशोधन में राष्ट्रपति को व्यापक माध्यमिक टैरिफ अधिकार देने वाले प्रावधान को हटाने की मांग की गई है। इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी संसद में इस मुद्दे पर अलग-अलग मत मौजूद हैं।
भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ कैसे लग सकता है?
प्रस्तावित व्यवस्था में 100 प्रतिशत टैरिफ को अधिकतम सीमा के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि कानून पारित होते ही भारत के सभी सामान पर स्वतः 100 प्रतिशत शुल्क लग जाएगा।
यदि विधेयक कानून बनता है और अमेरिकी राष्ट्रपति इसके तहत कार्रवाई करने का निर्णय लेते हैं, तभी संबंधित देशों पर शुल्क लगाया जा सकता है। शुल्क की वास्तविक दर, उसका दायरा और संभावित छूट जैसे मुद्दे आगे प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेंगे। प्रस्ताव में परिस्थितियों की समीक्षा का प्रावधान भी रखा गया है।
रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की आपत्ति
अमेरिका का तर्क है कि रूस को ऊर्जा निर्यात से मिलने वाली आय उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है और इससे यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को आर्थिक संसाधन मिलते हैं। इसी कारण अमेरिका रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उसके साथ तेल कारोबार करने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
प्रस्तावित कानून में रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और उन जहाजों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई की बात है जिन पर प्रतिबंधों से बचते हुए रूसी तेल की आवाजाही में मदद करने के आरोप लगते रहे हैं।
भारत के लिए इसका क्या असर हो सकता है?
यदि भविष्य में भारत पर अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क लगाया जाता है, तो इसका सबसे सीधा असर अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर पड़ सकता है। अधिक शुल्क से भारतीय वस्तुओं की अमेरिकी बाजार में कीमत बढ़ सकती है और निर्यातकों के सामने नई चुनौतियां आ सकती हैं।
इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, किसी भी संभावित प्रभाव का वास्तविक आकार इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम कानून में कौन-कौन से प्रावधान शामिल होते हैं और अमेरिकी प्रशासन उनका किस तरह इस्तेमाल करता है।
भारत के लिए रूसी तेल क्यों महत्वपूर्ण है?
रूस भारत के लिए कच्चे तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। वैश्विक बाजार में परिस्थितियों के बदलने के बाद भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। इसका एक कारण कीमत और आपूर्ति की उपलब्धता से जुड़ी व्यावसायिक परिस्थितियां रही हैं।
भारत का पक्ष यह रहा है कि ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले देश की ऊर्जा सुरक्षा, उपलब्धता और
आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।
ऐसे में रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव भारत के लिए
कूटनीतिक और व्यापारिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
अभी भारत पर टैरिफ लगा है या नहीं?
नहीं। मौजूदा स्थिति में भारत पर प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ को लागू किया हुआ शुल्क नहीं माना जा सकता।
फिलहाल अमेरिकी संसद में विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
पहले हाउस से विधेयक को मंजूरी मिलना जरूरी है। इसके बाद राष्ट्रपति की भूमिका आएगी।
कानून बनने के बाद भी यह अलग विषय होगा कि अमेरिकी प्रशासन
भारत समेत किसी देश पर इस अधिकार का इस्तेमाल करता है या नहीं।
आगे क्या होगा?
अब इस विधेयक की अगली महत्वपूर्ण प्रक्रिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अंतिम मतदान है।
यदि हाउस इसे मंजूरी देता है तो विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जा सकता है।
इसके बाद भारत से जुड़े प्रावधानों की वास्तविक स्थिति और अमेरिकी प्रशासन की ओर से
संभावित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। इसलिए फिलहाल इसे भारत पर 100 प्रतिशत
टैरिफ लागू होने की खबर के बजाय 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की
संभावित शक्ति से जुड़े विधायी घटनाक्रम के रूप में समझना अधिक उचित है।
निष्कर्ष
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक दबाव का
एक नया अध्याय सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाए जाने से
भारत समेत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित अतिरिक्त शुल्क का मुद्दा फिर चर्चा में है।
हालांकि, अभी अंतिम तस्वीर साफ नहीं है। 100 प्रतिशत टैरिफ की संभावना प्रस्तावित
अधिकार के रूप में मौजूद है, लेकिन भारत पर ऐसा शुल्क स्वतः लागू नहीं हुआ है।
आने वाले विधायी फैसले और अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई
यह तय करेगी कि इस प्रावधान का भारत-अमेरिका व्यापार पर कितना प्रभाव पड़ता है।
FAQ
1. क्या भारत पर अमेरिका ने 100 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है?
नहीं। अभी भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। फिलहाल ऐसा शुल्क लगाने की
संभावित शक्ति से जुड़ा विधायी प्रस्ताव अमेरिकी संसद में आगे बढ़ा है।
2. अमेरिकी बिल में भारत का मुद्दा क्यों आया है?
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
3. 100 प्रतिशत टैरिफ का मतलब क्या है?
यह अधिकतम प्रस्तावित शुल्क सीमा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि
संबंधित देश के हर उत्पाद पर स्वतः 100 प्रतिशत शुल्क लागू हो जाएगा।
4. क्या रूस से तेल खरीदना भारत के लिए प्रतिबंधित है?
भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका की आपत्तियां हैं, लेकिन अमेरिकी
प्रस्ताव में भारत पर संभावित अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात अलग व्यवस्था के रूप में सामने आई है।
5. बिल पास होने के बाद क्या होगा?
यदि प्रतिनिधि सभा इसे मंजूरी देती है तो विधेयक आगे राष्ट्रपति के पास जा सकता है
। इसके बाद कानून के प्रावधानों के अनुसार प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति बनेगी।
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