Gold Price
सोने की कीमतों में इस साल तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। रिकॉर्ड स्तरों तक पहुंचने के बाद हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव भी दिखाई दिया है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिवाली 2026 तक भारत में सोने का भाव ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है?
बाजार विशेषज्ञों की कुछ राय में दिवाली तक सोने के इस स्तर को छूने की संभावना जताई गई है, लेकिन इसे निश्चित कीमत नहीं माना जा सकता। अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत, डॉलर, रुपये की चाल, अमेरिकी ब्याज दरें और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे के भाव को प्रभावित कर सकती हैं।
2 अक्टूबर को क्या रहा सोने का भाव?
2 अक्टूबर 2026 के उपलब्ध भारतीय बेंचमार्क के अनुसार 999 शुद्धता यानी 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,51,096 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। पिछले फिक्स की तुलना में इसमें ₹390 की बढ़त रही।
एक अन्य बाजार डेटा के अनुसार इसी दिन भारत में 24 कैरेट सोने की औसत कीमत करीब ₹1,49,230 प्रति 10 ग्राम, जबकि 22 कैरेट का भाव करीब ₹1,36,790 प्रति 10 ग्राम था। अलग-अलग शहरों, स्थानीय प्रीमियम और टैक्स के कारण वास्तविक खुदरा कीमत में अंतर हो सकता है।
इसका मतलब है कि ₹1.80 लाख के स्तर तक पहुंचने के लिए मौजूदा कीमत से अभी अच्छी-खासी तेजी की जरूरत होगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2 अक्टूबर को स्पॉट गोल्ड करीब $4,181.59 प्रति औंस पर था। सप्ताह के दौरान कीमत में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज हो चुकी थी। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी सोने पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रहे।
सोना आम तौर पर ब्याज न देने वाली संपत्ति है। इसलिए जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए सोने को रखने की अवसर लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों को प्रभावित करती है।
क्या दिवाली तक ₹1.80 लाख संभव है?
कुछ बाजार विशेषज्ञों ने दिवाली 2026 तक भारतीय बाजार में सोने के ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छूने की संभावना जताई है। इसके पीछे वैश्विक बाजार में सोने की मजबूती और रुपये की विनिमय दर जैसे कारकों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बाजार में कीमत का अनुमान कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत में अपेक्षित तेजी नहीं आती या डॉलर मजबूत बना रहता है, तो घरेलू बाजार में ₹1.80 लाख तक पहुंचने में अधिक समय लग सकता है।
रुपये की चाल भी तय करेगी घरेलू कीमत
भारत में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय भाव से तय नहीं होती। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यदि रुपया कमजोर होता है तो समान अंतरराष्ट्रीय कीमत पर भारत में सोने की लागत बढ़ सकती है। दूसरी तरफ रुपये में मजबूती घरेलू सोने की कीमत पर कुछ दबाव डाल सकती है।
इसी वजह से दिवाली तक सोने का भाव किस दिशा में जाएगा, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
अमेरिकी फेड की नीति का असर
सोने की कीमतों के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति भी महत्वपूर्ण है। ब्याज दरों में बदलाव और
आगे की दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड को प्रभावित करती हैं।
2 अक्टूबर की बाजार स्थिति में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ऊंची रहने से सोने पर दबाव देखा गया।
वहीं महंगाई के कुछ आंकड़ों के अपेक्षा से कमजोर रहने के बाद
अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव भी आया।
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा तो मिल सकता है सोने को सहारा
सोने को आमतौर पर संकट के समय सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखा जाता है।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव बढ़ने पर निवेशकों की मांग सोने की ओर बढ़ सकती है।
इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी लंबे समय में सोने की कीमत को प्रभावित करने वाला
एक कारक है। कुछ विश्लेषणों में केंद्रीय बैंक खरीद और वैश्विक आर्थिक
अनिश्चितता को सोने की कीमतों के लिए समर्थन देने वाले कारणों में शामिल किया गया है।
2026 में सोने का प्रदर्शन कैसा रहा?
2026 में सोने की कीमतों में काफी तेजी और उसके बाद उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी के दौरान सोना $5,400 प्रति औंस से
ऊपर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका था। बाद में कीमत में सुधार देखने को मिला।
भारतीय बाजार में भी सोना इस साल ऊंचे स्तरों पर पहुंचा है। 2 अक्टूबर को
उपलब्ध विभिन्न भारतीय बाजार आंकड़ों में 24 कैरेट सोना करीब ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा।
विशेषज्ञों के अनुमान में क्या कहा गया है?
कुछ अनुमानों में 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय सोने के लिए
$4,800 से $5,000 प्रति औंस का स्तर बताया गया है।
घरेलू बाजार में इसी आधार पर ₹1.5 लाख से ₹1.8 लाख या
उससे ऊपर के स्तरों की संभावना पर चर्चा हुई है।
हालांकि, ऐसे अनुमान बाजार की परिस्थितियों के साथ बदल सकते हैं।
इसलिए ₹1.80 लाख को निश्चित लक्ष्य समझने के बजाय संभावित बाजार परिदृश्य के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
सोना खरीदने वालों के लिए क्या मायने?
दिवाली और धनतेरस जैसे त्योहारों के दौरान भारत में सोने की मांग आम तौर पर बढ़ती है।
यदि उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत ऊंची रहती है और
रुपया कमजोर होता है, तो घरेलू ग्राहकों के लिए सोना और महंगा हो सकता है।
वहीं अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट आती है या रुपये में मजबूती रहती है,
तो घरेलू कीमतों पर कुछ राहत मिल सकती है।
निष्कर्ष
दिवाली 2026 तक सोने के ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना पर बाजार में चर्चा जरूर है,
लेकिन यह कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं है। 2 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने का भारतीय बेंचमार्क
करीब ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम था और अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमत लगभग $4,182 प्रति औंस रही।
आगे सोने की दिशा मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कीमत, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों,
बॉन्ड यील्ड, रुपये और वैश्विक आर्थिक एवं भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
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