ईरान में 25 वर्षीय अलीरेजा सेपाही
Iran Protester Execution: ईरान से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने लोगों को झकझोर दिया है। 25 वर्षीय अलीरेजा सेपाही को फांसी दिए जाने से ठीक एक दिन पहले जेल में बंद अपनी मंगेतर महशाद काशानी से फोन के जरिए शादी की रस्म पूरी करने का मौका मिला। इसके अगले ही दिन उन्हें फांसी दे दी गई।
अलीरेजा सेपाही जनवरी 2026 में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किए गए थे। उनकी मंगेतर महशाद काशानी भी विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में जेल में थीं। दोनों अलग-अलग जेलों में बंद थे, इसलिए आमने-सामने मिलने की अनुमति नहीं मिली। वकील की मदद से फोन कॉल पर विवाह की रस्म पूरी कराई गई।
फांसी से एक दिन पहले हुई शादी
रिपोर्टों के अनुसार अलीरेजा सेपाही और महशाद काशानी पहले से एक-दूसरे के साथ रिश्ते में थे और दोनों की सगाई हो चुकी थी। जेल में रहने के दौरान जब सेपाही को अपनी फांसी का डर था, तब दोनों ने विवाह करने का फैसला किया।
सेपाही के वकील ने फोन पर दोनों को जोड़कर विवाह की धार्मिक रस्म पूरी कराने में मदद की। इस दौरान दोनों के पिता ने भी विवाह के लिए अपनी सहमति दी।
इस विवाह में पारंपरिक समारोह या आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई। दोनों अलग-अलग जेलों में थे और फोन के माध्यम से विवाह की प्रक्रिया पूरी की गई।
अगले दिन इस्फहान जेल में दी गई फांसी
विवाह की रस्म पूरी होने के अगले दिन यानी 5 अक्टूबर 2026 की सुबह अलीरेजा सेपाही को इस्फहान की केंद्रीय जेल में फांसी दे दी गई।
उनके साथ 21 वर्षीय अलीरेजा रायसी को भी मृत्युदंड दिया गया। दोनों के खिलाफ जनवरी में इस्फहान के अलीखानी स्क्वायर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला था। ईरानी अधिकारियों के अनुसार उस दौरान चार सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी।
अधिकारियों के मुताबिक दोनों पर गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आरोप लगाए गए थे और उनकी सजा को सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था। वहीं मानवाधिकार संगठनों ने मामले की न्यायिक प्रक्रिया और आरोपों को लेकर सवाल उठाए हैं।
जुलाई में भी टल गई थी फांसी
अलीरेजा सेपाही को इससे पहले जुलाई में सार्वजनिक रूप से फांसी दिए जाने की योजना थी। लेकिन निर्धारित समय से कुछ पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
इलाज के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। संयुक्त राष्ट्र के ईरान संबंधी विशेष प्रतिवेदक के हवाले से बताया गया है कि इसके बाद वह लगातार फांसी के डर में जी रहे थे।
जुलाई में उनकी फांसी टलने के बावजूद मौत की सजा समाप्त नहीं हुई और अक्टूबर में उन्हें फिर फांसी दी गई।
जेल में बंद थी मंगेतर भी
महशाद काशानी भी जनवरी में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामले में गिरफ्तार की गई थीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें पांच साल की जेल की सजा मिली है।
दोनों के जेल में होने के कारण सामान्य तरीके से शादी करना संभव नहीं था। इसी वजह से अंतिम समय में फोन पर विवाह की धार्मिक रस्म पूरी करने की व्यवस्था की गई।
यह विवाह सेपाही के जीवन के अंतिम दिनों की सबसे भावनात्मक घटनाओं में से एक बन गया।
आमने-सामने मिलने की नहीं मिली अनुमति
परिवार और वकील की कोशिश के बावजूद दोनों को शादी से पहले या अंतिम समय में आमने-सामने मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार वकीलों को उम्मीद थी कि विवाह की स्थिति शायद फांसी को कुछ समय के लिए टालने में मदद कर सकती है। हालांकि जेल अधिकारियों ने आमने-सामने विवाह की अनुमति नहीं दी। इसके बाद फोन पर ही विवाह की रस्म पूरी हुई।
शादी में क्या था प्रतीकात्मक दहेज?
फोन पर हुई इस शादी में भी पारंपरिक धार्मिक रस्म का पालन किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रतीकात्मक मेहर/दहेज में
कुरान की एक प्रति, केसर की मिठाई का एक टुकड़ा और लाल गुलाब शामिल था।
दोनों परिवारों की सहमति के बाद वकील ने फोन कॉल पर विवाह की रस्म पूरी कराई।
मामले की न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
मानवाधिकार संगठनों ने अलीरेजा सेपाही के मामले में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर
गंभीर सवाल उठाए हैं। एक मानवाधिकार संगठन के अनुसार बचाव पक्ष के कुछ साक्ष्यों को
कथित तौर पर पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इनमें ऐसा फुटेज भी बताया गया है
जिसके आधार पर सेपाही की घटना स्थल पर मौजूदगी को लेकर सवाल उठते थे।
दूसरी ओर, ईरानी न्यायिक अधिकारियों ने उन्हें गंभीर अपराधों का दोषी बताया।
इसलिए मामले से जुड़े आरोपों और बचाव पक्ष के दावों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
मां अभी भी जेल में
अलीरेजा सेपाही की गिरफ्तारी उनकी मां के साथ हुई थी।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनकी मां अभी भी जेल में हैं और पांच वर्ष की सजा काट रही हैं।
इस तरह परिवार पहले ही लंबे समय से कानूनी और भावनात्मक संकट से गुजर रहा था।
बेटे की फांसी के बाद परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
शव को भी दूसरे शहर भेजे जाने की जानकारी
संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि फांसी के बाद
अलीरेजा सेपाही का शव उनके परिवार को इस्फहान में दफनाने के लिए नहीं दिया गया,
बल्कि लगभग 200 किलोमीटर दूर काशान भेजा गया।
इससे परिवार की परेशानी और बढ़ने की बात कही गई है।
ईरान में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर बढ़ी चिंता
जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों के बाद ईरान में बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी और
मुकदमों को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।
ताजा घटनाक्रम में अलीरेजा सेपाही और अलीरेजा रायसी को फांसी दिए जाने से
मृत्युदंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर बहस तेज हुई है। अधिकार संगठनों का कहना है कि
प्रदर्शन से जुड़े मामलों में निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।
एक शादी और अगले दिन मौत
अलीरेजा सेपाही की कहानी का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि जिस दिन उन्होंने जेल में
अपनी मंगेतर के साथ शादी की रस्म पूरी की, उसके अगले ही दिन उन्हें फांसी दे दी गई।
एक ओर दो युवा लोगों ने अपने रिश्ते को अंतिम समय में विवाह का रूप देने की कोशिश की,
वहीं अगले दिन सेपाही को मृत्युदंड दे दिया गया। घटना ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ चल रही कानूनी
कार्रवाई और मृत्युदंड के इस्तेमाल पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
FAQ
अलीरेजा सेपाही कौन थे?
अलीरेजा सेपाही 25 वर्षीय ईरानी नागरिक थे, जिन्हें जनवरी 2026 के
विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था।
अलीरेजा सेपाही की फांसी कब हुई?
उन्हें 5 अक्टूबर 2026 को इस्फहान की केंद्रीय जेल में फांसी दी गई।
फांसी से पहले उन्होंने किससे शादी की?
उन्होंने जेल में बंद अपनी मंगेतर महशाद काशानी से फोन के जरिए विवाह की धार्मिक रस्म पूरी की थी।
दोनों की शादी आमने-सामने क्यों नहीं हुई?
दोनों अलग-अलग जेलों में बंद थे और जेल अधिकारियों ने उन्हें अंतिम समय में
आमने-सामने मिलने की अनुमति नहीं दी। इसलिए वकील की मदद से फोन कॉल पर विवाह कराया गया।
अलीरेजा सेपाही को किस मामले में मौत की सजा मिली थी?
उन्हें जनवरी 2026 में इस्फहान के अलीखानी स्क्वायर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले
में दोषी ठहराया गया था। ईरानी अधिकारियों ने उन पर गंभीर सुरक्षा संबंधी अपराधों के आरोप लगाए थे,
जबकि मानवाधिकार संगठनों ने मामले की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
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