G7 सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी
फ्रांस में आयोजित जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने इस दौरान उन भारतीय नागरिकों का भी उल्लेख किया जिन्होंने हालिया संघर्षों के दौरान अपनी जान गंवाई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हमेशा शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थक रहा है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते संघर्ष और तनाव के कारण आम नागरिकों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज़ स्ट्रेट का उल्लेख करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में आई बाधाओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
पश्चिम एशिया संघर्ष से मित्र देशों को हुआ नुकसान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत के कई मित्र देशों को जान-माल का भारी नुकसान झेलना पड़ा है। इस संघर्ष का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था आज आपस में जुड़ी हुई है और किसी भी क्षेत्र में अस्थिरता का असर दुनिया के दूसरे देशों पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि भारत लगातार शांति स्थापना के प्रयासों का समर्थन करता रहा है और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील करता है।
भारतीय नागरिकों की मौत पर जताया दुख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हालिया संघर्षों के दौरान भारत के कई नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। उन्होंने मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है और जरूरत पड़ने पर विशेष राहत एवं निकासी अभियान भी संचालित किए जाएंगे।
नाविकों की सुरक्षा को बताया सामूहिक जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुद्री व्यापार में कार्यरत नाविकों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और
लाखों नाविक दिन-रात काम करके विभिन्न देशों को आपस में जोड़ते हैं।
ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि
मानवीय दृष्टिकोण से भी बेहद आवश्यक है। यदि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहेंगे तो
वैश्विक व्यापार सुचारू रूप से चलता रहेगा और दुनिया के देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला बाधित नहीं होगी।
अमेरिका का नाम न लेने पर विपक्ष का हमला
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद विपक्ष ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
विपक्षी दलों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिकों की मौत और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का
उल्लेख तो किया, लेकिन अमेरिका का नाम लेने से परहेज किया।
विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी सम्मेलन में मौजूद थे,
तब प्रधानमंत्री को स्पष्ट रूप से जिम्मेदार पक्षों का उल्लेख करना चाहिए था।
हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलित और
कूटनीतिक रही है। सरकार का उद्देश्य किसी देश को निशाना बनाना नहीं बल्कि
शांति, स्थिरता और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है।
भारत ने दिया शांति और सहयोग का संदेश
जी-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय
भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का
समाधान केवल संवाद, सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है।
भारत ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा, वैश्विक व्यापार की निर्बाध आवाजाही और
नागरिकों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया है।
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