महाराष्ट्र की राजनीति में
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर मचा सियासी तूफान
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। खबरें सामने आ रही हैं कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के कई सांसद पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, छह सांसद दिल्ली पहुंचे हैं और लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
छह सांसदों के जाने की अटकलों से बढ़ी हलचल
रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद अलग समूह बनाने या शिंदे गुट के साथ जाने पर विचार कर रहे हैं। इस खबर के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में सांसद अलग होते हैं तो इसका असर पार्टी की राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीति पर पड़ सकता है।
संजय राउत ने किया दावों का खंडन
शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद Sanjay Raut ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी को कमजोर करने के लिए दबाव और प्रलोभन की राजनीति की जा रही है। राउत ने दावा किया कि सांसदों को पक्ष बदलने के लिए आर्थिक ऑफर दिए जा रहे हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उद्धव ठाकरे ने बुलाई अहम बैठक
बढ़ती अटकलों के बीच Uddhav Thackeray ने पार्टी सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि यह बैठक पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और संभावित बगावत को रोकने के लिए बुलाई गई है।
राजनीतिक जानकार इसे उद्धव ठाकरे की डैमेज कंट्रोल रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
2022 की बगावत की यादें हुईं ताजा
यह घटनाक्रम 2022 में हुई उस बड़ी बगावत की याद दिला रहा है
जब Eknath Shinde के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे। उसी बगावत के बाद महाराष्ट्र की
सत्ता बदल गई थी और शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। अब सांसदों के स्तर पर
संभावित टूट की खबरों ने फिर से राजनीतिक अस्थिरता की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
शिंदे गुट की बढ़ सकती है ताकत
यदि सांसदों का एक बड़ा समूह शिंदे गुट में शामिल होता है तो इससे शिंदे की राजनीतिक ताकत और
बढ़ सकती है। वर्तमान में महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा और शिंदे गुट की साझेदारी सत्ता में है।
ऐसे में सांसदों के संभावित समर्थन से शिंदे गुट का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हो सकता है।
विपक्ष के लिए भी चिंता का विषय
उद्धव ठाकरे की पार्टी विपक्षी गठबंधन का अहम हिस्सा मानी जाती है। ऐसे में यदि पार्टी में टूट होती है तो
इसका असर विपक्षी एकजुटता पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि
महाराष्ट्र में विपक्ष की रणनीति पर इसका सीधा प्रभाव दिखाई दे सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सभी की नजर सांसदों की अगली राजनीतिक चाल पर टिकी हुई है।
क्या सांसद वास्तव में शिंदे गुट में शामिल होंगे या फिर उद्धव ठाकरे
उन्हें साथ रखने में सफल होंगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि
महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है और
इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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