SCO Summit
SCO Summit 2026: शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आमने-सामने मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और हाथ मिलाया। इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी वहीं मौजूद नजर आए।
इस मुलाकात के दृश्य सामने आने के बाद भारत-चीन संबंधों के साथ-साथ पाकिस्तान की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, कुछ सेकंड के इस घटनाक्रम को किसी बड़े कूटनीतिक बदलाव का अंतिम संकेत मानने के बजाय पूरे सम्मेलन और दोनों देशों के संबंधों के व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है।
SCO Summit में दिखी मोदी-शी की मुलाकात
SCO सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के शीर्ष नेता एक साथ दिखाई दिए। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने सामान्य कूटनीतिक शिष्टाचार के तहत एक-दूसरे से हाथ मिलाकर अभिवादन किया।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों से संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों पर गहरा असर पड़ा था। ऐसे में किसी बहुपक्षीय मंच पर दोनों शीर्ष नेताओं की प्रत्यक्ष मुलाकात स्वाभाविक रूप से अंतरराष्ट्रीय नजरों में आ जाती है।
शहबाज शरीफ भी मौके पर मौजूद
मोदी और शी जिनपिंग के अभिवादन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी वहां मौजूद थे। सम्मेलन से सामने आए दृश्यों ने इस पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में खासा ध्यान दिलाया।
हालांकि, किसी नेता ने किस दिशा में देखा या किससे बातचीत की, इससे कूटनीतिक रिश्तों के बारे में सीधे निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। ऐसी घटनाओं को आधिकारिक बैठकों, बयानों और आगे होने वाली बातचीत के साथ जोड़कर देखना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
भारत-चीन रिश्तों के बीच क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
भारत और चीन एशिया की दो बड़ी शक्तियां हैं और दोनों के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय प्रभाव और रणनीतिक हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव जरूर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों के नेताओं का संपर्क लगातार बना रहता है। SCO जैसे बहुपक्षीय संगठन का मंच दोनों देशों को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद का अवसर भी देता है।
इसलिए मोदी और शी जिनपिंग का हाथ मिलाना अपने आप में कोई समझौता या नई नीति घोषित नहीं करता, लेकिन यह बताता है कि उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हैं।
पीएम मोदी की अन्य नेताओं से भी मुलाकात
SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ बातचीत की। इससे पहले उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी मुलाकात की थी।
पुतिन के साथ बातचीत में भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग की चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और शांति के प्रयासों को आगे बढ़ाने की भारत की नीति को भी दोहराया।
इसके अलावा सम्मेलन के दौरान भारत ने विभिन्न क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका जारी रखी।
क्या है SCO और भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन एक प्रमुख क्षेत्रीय बहुपक्षीय संगठन है। इसकी स्थापना वर्ष 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी।
भारत और पाकिस्तान वर्ष 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद ईरान और बेलारूस भी संगठन में शामिल हुए। संगठन में सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क और आपसी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होती है।
भारत के लिए SCO इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके मंच पर नई दिल्ली को चीन, रूस, मध्य एशिया और अन्य सदस्य देशों के साथ एक ही बहुपक्षीय मंच पर संवाद का अवसर मिलता है।
मोदी-शी मुलाकात से क्या संदेश?
मोदी और शी जिनपिंग की यह संक्षिप्त मुलाकात कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। पहला, दोनों देशों के बीच
मतभेदों के बावजूद शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद का सिलसिला जारी है। दूसरा, SCO जैसे मंच पर भारत अपनी
स्वतंत्र विदेश नीति के तहत विभिन्न शक्तियों के साथ संपर्क बनाए रखता है।
हालांकि, केवल हाथ मिलाने को भारत-चीन संबंधों में किसी बड़े बदलाव की
घोषणा के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। सीमा से जुड़े मुद्दे, व्यापार और
रणनीतिक चिंताएं अभी भी दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पाकिस्तान की मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी भी
चर्चा का एक कारण बनी। एक ही मंच पर भारत, चीन और पाकिस्तान के
शीर्ष नेताओं की मौजूदगी एशियाई भू-राजनीति की जटिल तस्वीर को सामने रखती है।
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते भी लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में
किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी पर स्वाभाविक रूप से नजर रहती है।
SCO Summit 2026 का व्यापक महत्व
इस सम्मेलन को केवल भारत-चीन या भारत-पाकिस्तान के संबंधों के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं है।
SCO का मंच क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे कई विषयों से जुड़ा है।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में रूस, चीन, भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच बढ़ता संवाद भी
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे मंचों पर भारत की भागीदारी
नई दिल्ली की बहुपक्षीय कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
निष्कर्ष
SCO Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का हाथ मिलाकर
अभिवादन करना चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की
मौजूदगी ने घटनाक्रम को और अधिक ध्यान आकर्षित करने वाला बना दिया।
हालांकि, इस छोटी मुलाकात को किसी बड़े राजनीतिक समझौते या भारत-चीन संबंधों में
तत्काल बदलाव का संकेत मानना उचित नहीं होगा। असली तस्वीर आने वाली आधिकारिक बातचीत,
नीतिगत फैसलों और दोनों देशों के बीच संबंधों की आगे की दिशा से स्पष्ट होगी।
FAQ
सवाल 1: SCO Summit 2026 में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई?
हां। SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने
मुलाकात की और एक-दूसरे का अभिवादन करते हुए हाथ मिलाया।
सवाल 2: मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान शहबाज शरीफ कहां थे?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी उसी कार्यक्रम में मौजूद थे और घटनाक्रम के दौरान आसपास दिखाई दिए।
सवाल 3: भारत और चीन के रिश्ते अभी चर्चा में क्यों हैं?
दोनों देशों के बीच सीमा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर पिछले कुछ वर्षों में तनाव रहा है।
वर्ष 2020 की गलवान घाटी की सैन्य झड़प ने रिश्तों को विशेष रूप से प्रभावित किया था।
सवाल 4: SCO क्या है?
SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन एक क्षेत्रीय बहुपक्षीय संगठन है, जिसकी
स्थापना 2001 में हुई थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने थे।
सवाल 5: भारत के लिए SCO क्यों महत्वपूर्ण है?
SCO भारत को चीन, रूस, मध्य एशिया और अन्य सदस्य देशों के साथ सुरक्षा, व्यापार,
ऊर्जा, क्षेत्रीय संपर्क और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद का मंच देता है।
सवाल 6: क्या मोदी-शी की हाथ मिलाने की घटना से भारत-चीन संबंध बदल गए हैं?
सिर्फ हाथ मिलाने की घटना के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
संबंधों की वास्तविक दिशा आधिकारिक बातचीत, सीमा संबंधी प्रगति और भविष्य के नीतिगत फैसलों से तय होगी
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