उत्तर प्रदेश की राजनीति में
यूपी में बसपा-कांग्रेस गठबंधन की अटकलें तेज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की ओर से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। कांग्रेस नेताओं को मायावती के आवास से बिना मुलाकात लौटना पड़ा, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में नए कयास लगाए जा रहे हैं।
राहुल गांधी का संदेश लेकर पहुंचे कांग्रेस नेता
जानकारी के अनुसार कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष एवं बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया समेत कई कांग्रेस नेता लखनऊ स्थित मायावती के आवास पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संदेश लेकर पहुंचे थे और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संभावित गठबंधन पर चर्चा करना चाहते थे।
हालांकि, मायावती ने कांग्रेस नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया। नेताओं ने गेट पर अपना नाम लिखवाया और वापस लौट गए।
मायावती के रुख से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
बसपा सुप्रीमो मायावती के इस रुख के बाद प्रदेश की राजनीति में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस आगामी चुनावों में दलित वोट बैंक को मजबूत करने के लिए बसपा के साथ गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। लेकिन मायावती का दूरी बनाए रखना कई संकेत दे रहा है।
बसपा और कांग्रेस के बीच पहले भी कई बार राजनीतिक समीकरण बनने और बिगड़ने की चर्चाएं होती रही हैं।
हालांकि अब तक दोनों दलों की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है।
कांग्रेस नेताओं ने बताया औपचारिक मुलाकात
मुलाकात नहीं होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे केवल औपचारिक मुलाकात बताया
। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि
मायावती दलित समाज की बड़ी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं। उनका हालचाल लेना हमारा दायित्व है।
उन्होंने कहा कि हमने अपना नाम गेट पर लिखवा दिया है। जब भी मायावती बुलाएंगी, हम दोबारा मिलने जाएंगे।
विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सक्रियता
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं,
वैसे-वैसे राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ती जा रही है।
विपक्षी दल भाजपा को चुनौती देने के लिए नए समीकरण बनाने में जुटे हैं। कांग्रेस भी राज्य में
अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बसपा और
कांग्रेस के बीच गठबंधन होता है तो इसका असर प्रदेश की राजनीति पर
पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल मायावती के रुख से ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा।
दलित वोट बैंक पर सभी दलों की नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बैंक हमेशा से अहम माना जाता रहा है। बसपा का मुख्य आधार दलित समाज है,
जबकि कांग्रेस भी इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
