झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं
रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने अब आंदोलन को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है। छात्रों की मांग है कि विवादित परीक्षाओं को रद्द किया जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर CBI जांच कराई जाए। साथ ही आंदोलनकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि लगातार परीक्षा विवादों के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है।
23वें दिन भी जारी रहा आंदोलन
रिपोर्टों के अनुसार, JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन अब 23वें दिन में पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। आंदोलन में कुछ छात्र लंबे समय से भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मुख्य मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने सरकार पर मामले को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप भी लगाया है।
आंदोलन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने अपनी तबीयत खराब होने की बात भी कही है। इससे प्रशासन के सामने प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी चुनौती बढ़ गई है।
JPSC और JSSC परीक्षाओं पर उठे सवाल
छात्रों के आंदोलन का मुख्य केंद्र झारखंड में होने वाली विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाएं हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि अलग-अलग परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि जिन परीक्षाओं पर सवाल उठे हैं, उनकी स्वतंत्र जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
छात्र संगठनों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में अभ्यर्थी कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो जाएं तो उनकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं।
CBI जांच की मांग क्यों?
आंदोलनकारी छात्र कई मामलों की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि परीक्षा संबंधी आरोपों की निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच जरूरी है।
छात्रों की मांगों में कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच के साथ-साथ दोषियों की पहचान और जिम्मेदारी तय करना भी शामिल है। उनका कहना है कि जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।
हालांकि किसी परीक्षा में अनियमितता या किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
सरकार पहले ही कुछ परीक्षाओं पर ले चुकी है फैसला
इस पूरे विवाद के बीच राज्य सरकार ने कुछ परीक्षाओं को लेकर कदम भी उठाए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। इसके अलावा दो अन्य JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने और कुछ परीक्षाओं से जुड़ी जांच की बात सामने आई थी।
सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने का भरोसा भी दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि भर्ती परीक्षाओं में प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जाएगा।
लेकिन आंदोलनकारी छात्र सरकार के इन कदमों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि उनकी सभी प्रमुख मांगों का समाधान अभी नहीं हुआ है।
छात्रों ने आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने अब प्रदर्शन को और व्यापक बनाने की रणनीति घोषित की है। छात्रों ने झारखंड के सभी 24 जिलों में पुतला दहन का कार्यक्रम तय किया है।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। छात्रों का आरोप है कि राज्य की भर्ती व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक नेतृत्व को अधिक जवाबदेही दिखानी चाहिए।
इस ऐलान के बाद आंदोलन का राजनीतिक असर भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी
छात्रों ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की चेतावनी दी है। यह कार्यक्रम आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है। उनका कहना है कि अगर सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को दूर करने में विफल रहती है तो राजनीतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
हालांकि इस तरह के विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी निशाना
JPSC-JSSC विवाद अब केवल राज्य सरकार तक सीमित नहीं रहा है।
आंदोलनकारी छात्रों ने कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस से राज्य की गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने की मांग तक की है।
उनका कहना है कि अगर सरकार छात्रों की मांगों पर कार्रवाई नहीं करती तो
गठबंधन के सहयोगी दलों को भी अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
इससे परीक्षा विवाद ने झारखंड की राजनीति में भी नया मुद्दा खड़ा कर दिया है।
भूख हड़ताल से बढ़ी चिंता
आंदोलन के दौरान कुछ छात्र लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। रिपोर्टों में प्रदर्शनकारी
देवेंद्र नाथ महतो के लंबे अनशन का भी उल्लेख है। वहीं
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई है।
भूख हड़ताल के कारण प्रशासन के सामने स्वास्थ्य संबंधी चुनौती भी है। ऐसे में सरकार और
आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छात्रों की मुख्य मांगें
आंदोलन के दौरान सामने आ रही प्रमुख मांगों को इस तरह समझा जा सकता है:
- कथित अनियमितताओं वाली परीक्षाओं की समीक्षा और जरूरत के अनुसार रद्द करना।
- परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच।
- कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई।
- कुछ मामलों में CBI जांच की मांग।
- भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस सुधार।
- अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय।
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग।
इन मांगों को लेकर छात्र आंदोलन को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।
सरकार और छात्रों के बीच बढ़ता अंतर
सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और जांच के फैसले भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। लेकिन छात्र संगठनों का कहना है कि
सरकार की कार्रवाई उनकी सभी मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
यही अंतर आंदोलन को लंबा खींच रहा है। यदि सरकार और छात्रों के बीच जल्द बातचीत नहीं होती है तो
20 अगस्त का प्रस्तावित कार्यक्रम आंदोलन को और बड़ा रूप दे सकता है।
भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण?
झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं के लिए JPSC और
JSSC की परीक्षाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षा रद्द होने या
अनियमितताओं के आरोपों का सीधा असर अभ्यर्थियों पर पड़ता है।
एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में छात्रों का कई साल का समय और आर्थिक संसाधन खर्च होते हैं।
ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना युवाओं के भरोसे के लिए जरूरी है।
इसी वजह से JPSC-JSSC विवाद अब केवल परीक्षा से जुड़ा मामला नहीं रह गया है,
बल्कि युवाओं के रोजगार और सरकारी भर्ती व्यवस्था में विश्वास से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। 16 अगस्त को जिलों में विरोध कार्यक्रम और
20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी के कारण प्रशासन भी स्थिति पर नजर रख रहा है।
अगर सरकार छात्रों की मांगों पर कोई नया फैसला लेती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है।
वहीं मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदर्शन और तेज होने की संभावना है।
निष्कर्ष
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है।
अभ्यर्थी कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, कुछ परीक्षाओं को रद्द करने,
CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठ रही है।
सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता का भरोसा दिया है तथा कुछ परीक्षाओं को
रद्द करने जैसे फैसले भी लिए हैं। इसके बावजूद छात्र आंदोलन खत्म करने के मूड में नहीं हैं।
अब 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव पर सभी की नजर रहेगी।
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