व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप
व्हाइट हाउस की बैठक बनी वैश्विक चर्चा का विषय
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच व्हाइट हाउस में हुई एक बेहद अहम बैठक ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपने शीर्ष सुरक्षा और कूटनीतिक सलाहकारों के साथ करीब दो घंटे तक चर्चा की। माना जा रहा था कि इस बैठक में ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते पर अंतिम फैसला लिया जाएगा, लेकिन बैठक खत्म होने के बाद भी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई।
आखिर क्या था इस सीक्रेट मीटिंग का एजेंडा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई हफ्तों से एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य समुद्री यातायात बहाल करना, युद्धविराम को आगे बढ़ाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई शर्तों के साथ बातचीत शुरू करना है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में कोई कदम न उठाए और अपने संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण स्वीकार करे।
किन मुद्दों पर अटक गया समझौता?
सूत्रों के अनुसार सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके यूरेनियम भंडार को लेकर बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट करे या सौंप दे। वहीं ईरान इस मांग को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नियंत्रण और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी है।
ईरान ने ट्रंप के दावों पर जताई असहमति
बैठक से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया था कि समझौता करीब है और कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। हालांकि ईरान ने इन दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और बातचीत जारी है। तेहरान का कहना है कि केवल बयानबाजी से नहीं बल्कि ठोस कदमों से भरोसा कायम होगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों बना सबसे बड़ा मुद्दा?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका चाहता है कि यहां बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही हो, जबकि ईरान इस क्षेत्र में अपने रणनीतिक अधिकारों को बनाए रखना चाहता है। यही वजह है कि यह मुद्दा वार्ता का सबसे संवेदनशील हिस्सा बना हुआ है।
वैश्विक बाजारों पर दिख रहा असर
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ रहा है। निवेशक इस वार्ता के
नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं। तेल की कीमतों में
उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में
किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है।
क्या अभी भी समझौते की उम्मीद बाकी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार
एक अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने और अगले दौर की वार्ता के लिए रास्ता बनाने पर चर्चा जारी है।
हालांकि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी भी बड़ा मतभेद बना हुआ है।
दुनिया की नजर क्यों टिकी है इस वार्ता पर?
अमेरिका और ईरान के संबंधों का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है।
इसका असर मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।
यही कारण है कि व्हाइट हाउस में हुई यह बैठक वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
डोनाल्ड ट्रंप की हाई प्रोफाइल सिचुएशन रूम मीटिंग से फिलहाल कोई बड़ा समाधान नहीं निकल पाया है।
हालांकि बातचीत अभी जारी है और दोनों पक्षों के बीच
कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है या तनाव का नया दौर शुरू होता है।
फिलहाल पूरी दुनिया इस वार्ता के अगले कदम का इंतजार कर रही है।
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