संभल में 74 वर्षीय रामबेटी देवी
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा ने लोगों को भावुक कर दिया। रजपुरा क्षेत्र के ब्यौरा गांव की 74 वर्षीय रामबेटी देवी के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा सामान्य शवयात्राओं से बिल्कुल अलग रही। महिला के साथ वर्षों से जुड़े दो हाथी भी उनकी अंतिम विदाई में शामिल हुए।
रामबेटी देवी के बेटे मनवीर और चरन सिंह के मुताबिक, उनकी मां का हाथियों से बेहद गहरा लगाव था। परिवार के अनुसार, पिता के निधन के बाद रामबेटी ने हाथियों की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली थी। वह उनके भोजन, स्नान और देखरेख का विशेष ध्यान रखती थीं। इसी आत्मीय रिश्ते को देखते हुए परिजनों ने दोनों हाथियों को मां की अंतिम यात्रा में शामिल करने का निर्णय लिया।
आगे चलते रहे हाथी, पीछे थी अर्थी
ब्यौरा गांव से शुरू हुई अंतिम यात्रा करीब 15 किलोमीटर दूर राजघाट गंगा घाट तक पहुंची। यात्रा में हाथी आगे चल रहे थे और उनके पीछे रामबेटी देवी की अर्थी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।
अंतिम यात्रा में धार्मिक झांकियां और ट्रैक्टरों का लंबा काफिला भी दिखाई दिया। आसपास के कई गांवों से लोग इस अंतिम विदाई में शामिल होने पहुंचे। रास्ते में हाथियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जुटते रहे।
हाथियों का रामबेटी से था वर्षों पुराना रिश्ता
परिवार के अनुसार रामबेटी देवी और दोनों हाथियों के बीच सिर्फ मालिक और पशु का संबंध नहीं था,
बल्कि वर्षों से एक गहरा आत्मीय जुड़ाव था। परिजनों का कहना है कि रामबेटी दोनों हाथियों की
आवाज और जरूरतों को समझती थीं और उनकी नियमित देखभाल करती थीं।
परिवार के सदस्यों के मुताबिक, उनके यहां हाथी पालने की परंपरा कई पीढ़ियों पुरानी है। बताया गया है कि
परिवार का हाथियों से जुड़ाव करीब दो सौ वर्षों से चला आ रहा है।
अंतिम संस्कार के समय भावुक हुआ माहौल
राजघाट गंगा घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान भी हाथियों की मौजूदगी लोगों के लिए भावुक पल बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथियों ने अपनी सूंड ऊपर उठाई, जिसे वहां मौजूद लोगों ने
रामबेटी देवी के प्रति सम्मान और विदाई के भाव के रूप में देखा।
इस दृश्य को देखने वाले ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने इससे पहले ऐसी अंतिम यात्रा नहीं देखी थी, जिसमें
किसी परिवार के पालतू हाथी अपनी देखभाल करने वाली महिला की अंतिम यात्रा में इस तरह शामिल हुए हों।
मां के निधन के बाद उदास हैं हाथी
रामबेटी देवी के बेटों ने बताया कि मां के निधन के बाद दोनों
हाथी काफी शांत और उदास नजर आ रहे हैं।
लंबे समय तक रामबेटी द्वारा उनकी देखभाल किए जाने के कारण परिवार को लगता है कि
उनके जाने का असर हाथियों के व्यवहार में भी दिखाई दे रहा है।
गांव से गंगा घाट तक बना चर्चा का विषय
रामबेटी देवी की अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और
हाथियों के शामिल होने से यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।
गांव से लेकर राजघाट तक रास्ते में लोगों ने इस अनोखे दृश्य को देखा।
यह अंतिम यात्रा इंसान और पशु के बीच लंबे समय में बने
भावनात्मक रिश्ते की एक अलग तस्वीर सामने लेकर आई।
परिवार के लिए यह मां को सम्मान देने का तरीका था, जबकि आसपास के लोगों के लिए यह
एक ऐसी घटना रही जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा
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