156 साल बाद हांगकांग को चीन को सौंप
1 जुलाई 1997 का दिन क्यों है ऐतिहासिक?
विश्व इतिहास में 1 जुलाई 1997 का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन आधी रात को ब्रिटेन ने लगभग 156 वर्षों के शासन के बाद हांगकांग की संप्रभुता चीन को सौंप दी। यह केवल एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं था, बल्कि एशिया और वैश्विक राजनीति के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। इस ऐतिहासिक समारोह में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, तत्कालीन प्रिंस चार्ल्स, चीन के राष्ट्रपति जियांग जेमिन सहित कई देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
ब्रिटेन ने हांगकांग पर कैसे किया था कब्जा?
हांगकांग कभी चीन का हिस्सा था। वर्ष 1839 में ब्रिटेन और चीन के बीच पहला अफीम युद्ध शुरू हुआ। युद्ध में चीन की हार के बाद 1842 में नानकिंग संधि (Treaty of Nanking) हुई, जिसके तहत हांगकांग द्वीप ब्रिटेन को सौंप दिया गया।
इसके बाद 1860 में कोवलून प्रायद्वीप का एक हिस्सा भी ब्रिटेन के नियंत्रण में आ गया।
बाद में 1898 में एक अलग समझौते के तहत न्यू टेरिटरीज़ (New Territories) को ब्रिटेन को
99 वर्षों की लीज पर दिया गया, जिसकी अवधि 30 जून 1997 को समाप्त होनी थी।
99 साल की लीज खत्म होने पर क्यों लौटाना पड़ा हांगकांग?
हांगकांग का सबसे बड़ा हिस्सा न्यू टेरिटरीज़ था, जो 99 साल की लीज पर ब्रिटेन के पास था।
जब यह अवधि समाप्त होने लगी तो केवल इस क्षेत्र को वापस करना व्यावहारिक नहीं माना गया,
क्योंकि पूरा हांगकांग प्रशासनिक और आर्थिक रूप से एक इकाई बन चुका था।
इसी कारण ब्रिटेन और चीन के बीच लंबी वार्ता हुई और 1984 में
सिनो-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा (Sino-British Joint Declaration) पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें तय हुआ कि
1 जुलाई 1997 को पूरा हांगकांग चीन को सौंप दिया जाएगा।
बदले में चीन ने हांगकांग की पूंजीवादी व्यवस्था, न्यायिक प्रणाली और
कई प्रशासनिक अधिकारों को 50 वर्षों तक बनाए रखने का वादा किया।
‘एक देश, दो व्यवस्था’ की नीति क्या है?
हांगकांग के हस्तांतरण के साथ चीन ने ‘One Country, Two Systems’ (एक देश, दो व्यवस्था) की नीति लागू की।
इस नीति के तहत—
- हांगकांग चीन का हिस्सा रहेगा।
- उसकी अलग आर्थिक व्यवस्था जारी रहेगी।
- स्वतंत्र न्यायपालिका बनी रहेगी।
- अपनी अलग मुद्रा (Hong Kong Dollar) रहेगी।
- सीमा और आव्रजन व्यवस्था अलग होगी।
- कई नागरिक स्वतंत्रताओं को बनाए रखने का आश्वासन दिया गया।
इस व्यवस्था को कम-से-कम 50 वर्षों तक लागू रखने का वादा किया गया था।
हस्तांतरण समारोह कैसा था?
30 जून और 1 जुलाई 1997 की मध्यरात्रि में हांगकांग कन्वेंशन एंड एग्जीबिशन सेंटर में भव्य समारोह आयोजित किया गया। ब्रिटिश ध्वज उतारा गया और चीन तथा हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (HKSAR) के झंडे फहराए गए।
समारोह में चीन के राष्ट्रपति जियांग जेमिन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, प्रिंस चार्ल्स, हांगकांग के अंतिम ब्रिटिश गवर्नर क्रिस पैटन और पहले मुख्य कार्यकारी तुंग ची-ह्वा मौजूद थे।
क्या सभी लोग इस फैसले से खुश थे?
हालांकि सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, लेकिन हांगकांग के सभी नागरिक इससे संतुष्ट नहीं थे। कुछ लोगों को आशंका थी कि चीन के अधीन आने के बाद उनकी लोकतांत्रिक स्वतंत्रताएं और नागरिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
बाद के वर्षों में विशेष रूप से 2014 और 2019 में लोकतंत्र समर्थक बड़े आंदोलन भी हुए, जिनमें चीन की नीतियों के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन देखने को मिले।
आज हांगकांग की क्या स्थिति है?
वर्तमान में हांगकांग चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (Special Administrative Region – SAR) है। यहां की आर्थिक व्यवस्था, वित्तीय बाजार और कई प्रशासनिक व्यवस्थाएं मुख्य भूमि चीन से अलग हैं, हालांकि हाल के वर्षों में बीजिंग का प्रभाव पहले की तुलना में अधिक बढ़ा है।
निष्कर्ष
1 जुलाई 1997 केवल हांगकांग के इतिहास का नहीं बल्कि पूरी दुनिया के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है। लगभग 156 वर्षों तक ब्रिटिश शासन में रहने के बाद हांगकांग चीन के अधीन आया। 99 साल की लीज समाप्त होने, 1984 के चीन-ब्रिटेन समझौते और ‘एक देश, दो व्यवस्था’ की नीति ने इस ऐतिहासिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। आज भी हांगकांग का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र से जुड़ी बहसों का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
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