सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद
सहारनपुर में शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर स्थित मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई उस कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई, जिसमें अदालत ने संरचना को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा माना था। ध्वस्तीकरण के दौरान
इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।
मस्जिद को लेकर यह मामला पिछले कई महीनों से कानूनी प्रक्रिया में था।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
कलेक्ट्रेट परिसर में क्यों बनी थी मस्जिद?
मामला सहारनपुर के जिला कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद एक पुरानी मस्जिद से जुड़ा है।
जुलाई में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने इस संरचना को सरकारी
जमीन पर बना अवैध निर्माण मानते हुए हटाने का आदेश दिया था।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और
परिसर का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा था।
अदालत के समक्ष इस मामले में राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को आधार बनाया गया।
कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
जुलाई 2026 में सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था।
रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने करीब
315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन से जुड़े कब्जे को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
इसके साथ ही occupants पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी
सामने आई थी। आदेश में कथित अतिक्रमण हटाने के लिए समय भी दिया गया था।
इसके बाद मामले को उच्च स्तर पर चुनौती दी गई। 4 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने
पहले के आदेश को बरकरार रखा, जिसके अगले दिन प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
शनिवार सुबह प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई शुरू की। संवेदनशीलता को देखते हुए
बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
प्रशासन का मुख्य फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर रहा। कार्रवाई के दौरान इलाके में
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और किसी भी संभावित तनाव को रोकने के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया।
प्रशासन ने क्या कहा?
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की गई।
सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि
संरचना सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित पाई गई थी और
मस्जिद प्रबंधन की ओर से की गई अपील भी खारिज हो चुकी थी।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि कलेक्ट्रेट एक संवेदनशील सरकारी परिसर है, जहां प्रशासनिक और गोपनीय कार्य होते हैं। इसी वजह से परिसर में मौजूद संरचना को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिहाज से भी सवाल उठाए गए थे।
कार्रवाई से पहले क्या हुआ?
इस मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कलेक्ट्रेट जैसी सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया और परिसर में धार्मिक गतिविधियों के अलावा व्यावसायिक गतिविधियां भी चल रही थीं।
मामले की जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई। इसके बाद मस्जिद को हटाने का आदेश जारी किया गया था।
मस्जिद पक्ष की ओर से इस आदेश को चुनौती दी गई, लेकिन 4 सितंबर को जिला जज की अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अगले ही दिन प्रशासन ने कार्रवाई कर दी।
सपा सांसद इकरा हसन ने क्या कहा?
मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर नजरबंद किया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, इकरा हसन मस्जिद के ध्वस्तीकरण स्थल पर जाना चाहती थीं। प्रशासन की कार्रवाई के बीच उन्हें वहां जाने से रोके जाने की बात सामने आई है।
वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी कार्रवाई पर आपत्ति जताई और इसे सहारनपुर के लिए दुर्भाग्यपूर्ण दिन बताया।
करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही थी मस्जिद
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि पहले की रिपोर्टों में मस्जिद को करीब 70 साल पुराना बताया गया था। हालांकि पुराना होने मात्र से जमीन पर कानूनी अधिकार साबित नहीं होता। अदालत में विवाद का प्रमुख मुद्दा संरचना की वैधता और जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ा रहा।
यही वजह है कि मामले में धार्मिक पहचान से ज्यादा कानूनी तौर पर जमीन के इस्तेमाल और कथित अतिक्रमण का सवाल अदालत के सामने रहा।
अब आगे क्या होगा?
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है। विपक्षी नेताओं की ओर से कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे अदालत के आदेश के अनुपालन के तौर पर देख रहा है।
ऐसे मामलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। सहारनपुर में भी इसी वजह से कार्रवाई के दौरान व्यापक पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की गई।
सहारनपुर मस्जिद विवाद: क्या है पूरा मामला?
संक्षेप में देखें तो मामला इस क्रम में आगे बढ़ा—
- कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद को लेकर शिकायत हुई।
- प्रशासनिक जांच के बाद मामला सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचा।
- अदालत ने संरचना को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा मानते हुए हटाने का आदेश दिया।
- करीब 6.41 करोड़ रुपये के जुर्माने की जानकारी भी सामने आई।
- मस्जिद पक्ष की ओर से आदेश को चुनौती दी गई।
- 4 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने पहले के आदेश को बरकरार रखा।
- 5 सितंबर को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
- कार्रवाई के दौरान राजनीतिक विरोध और सांसद इकरा हसन को रोके जाने को लेकर विवाद सामने आया।
निष्कर्ष
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद का ध्वस्तीकरण फिलहाल उत्तर प्रदेश की बड़ी खबरों में शामिल है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के आधार पर की गई, जबकि विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई की आलोचना की है। पूरे विवाद का केंद्र सरकारी जमीन पर निर्माण की वैधता, अदालत के आदेश और उसके बाद प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई है।
मामले में आगे यदि कोई नई कानूनी चुनौती, राजनीतिक प्रतिक्रिया या प्रशासनिक निर्णय सामने आता है, तो उससे विवाद का अगला रुख तय होगा।
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