नेपाल-चीन सीमा के गिरोंग
Nepal China Border Flood: नेपाल-चीन सीमा पर 26 अगस्त को आए भीषण भूस्खलन और उसके बाद आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। चीन ने पहली बार इस आपदा में अपने क्षेत्र में हुए नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जारी किया है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, गिरोंग इलाके में 31 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 531 लोग अब भी लापता हैं। यह आंकड़ा 4 सितंबर की शाम तक की स्थिति पर आधारित है।
चीन के अनुसार, बाढ़ और मलबे की चपेट में आने के बाद इमिग्रेशन और कस्टम परिसर में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। बचाव दल लगातार मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
26 अगस्त को कैसे मची तबाही?
यह भयावह आपदा 26 अगस्त को नेपाल और चीन की सीमा के पास शुरू हुई। पहाड़ी क्षेत्र में हुए बड़े भूस्खलन के बाद नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ और देखते ही देखते पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आने लगा।
गिरोंग क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने सड़क, इमारतों और सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान पहुंचाया। शुरुआती घंटों में नुकसान का सही अनुमान लगाना भी मुश्किल हो गया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस आपदा में नेपाल का क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ और वहां मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या चीन की तुलना में कई गुना अधिक रही।
इमिग्रेशन और कस्टम बिल्डिंग में फंसे लोग
चीनी अधिकारियों के मुताबिक गिरोंग सीमा क्षेत्र में स्थित इमिग्रेशन और कस्टम भवन बाढ़ के पानी और मलबे की चपेट में आ गया।
इस परिसर में मौजूद लोगों में से 531 का अब तक पता नहीं चल पाया है। बचाव दल को घटनास्थल से बड़ी संख्या में निजी सामान मिले हैं, जिनका इस्तेमाल लापता लोगों की पहचान और तलाश में किया जा रहा है।
अब तक बचावकर्मियों को 987 व्यक्तिगत सामान मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा ने कितने बड़े क्षेत्र को प्रभावित किया।
31 लोगों की मौत, 531 अब भी लापता
चीनी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 4 सितंबर शाम 6 बजे तक इस आपदा में 31 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। वहीं 531 लोग लापता बताए गए हैं। इससे पहले चीन की ओर से 21 मौतों और 541 लोगों के लापता होने का आंकड़ा सामने आया था।
नए आंकड़े सामने आने के बाद मृतकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जबकि लापता लोगों की संख्या में कुछ कमी आई है। इसका मतलब यह हो सकता है कि बचाव और पहचान अभियान के दौरान कुछ लोगों की स्थिति स्पष्ट हुई है।
987 सामान से तलाश में जुटे बचावकर्मी
आपदा के बाद मलबे में लोगों की तलाश करना बचाव दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
गिरोंग इलाके में मिले कपड़े, व्यक्तिगत वस्तुएं और अन्य सामानों को इकट्ठा किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन वस्तुओं के आधार पर कुछ लापता लोगों की पहचान करने और उनके परिवारों तक जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
G-216 हाईवे बना बचाव अभियान में बड़ी बाधा
आपदा प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने में G-216 हाईवे भी बड़ी चुनौती बन गया है। यह सड़क गिरोंग बंदरगाह तक पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता है, लेकिन बाढ़ के कारण इसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
सड़क के कई हिस्सों में भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है। चीनी अधिकारियों की जांच में 58 ऐसे स्थानों की पहचान की गई जहां आगे भी भूस्खलन का जोखिम बताया गया है।
इस कारण राहत और बचाव टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।
बिजली व्यवस्था भी हुई प्रभावित
भूस्खलन और बाढ़ ने केवल सड़क और इमारतों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई।
बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से राहत एवं बचाव कार्य और मुश्किल हो गया। प्रभावित लोगों के लिए
अस्थायी व्यवस्था करने के साथ-साथ प्रशासन को जरूरी सेवाएं बहाल करने की चुनौती का भी सामना करना पड़ा।
दो आपातकालीन आश्रय स्थल बनाए गए
प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने
दो स्थानों को आपातकालीन आश्रय स्थल के तौर पर चुना है।
जिन लोगों के घर बाढ़ या भूस्खलन से प्रभावित हुए हैं, उन्हें अस्थायी रूप से
सुरक्षित स्थानों पर रखने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता लोगों की तलाश,
घायलों की मदद और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।
नेपाल में भी भारी तबाही
इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल चीन के तिब्बत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा।
नेपाल में भी बाढ़ और मलबे ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में मृतकों की संख्या 1,200 से ज्यादा हो चुकी है और
हजारों लोग अब भी लापता हैं। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सुरंगों में भी लोग फंसे हुए हैं।
नेपाल में बचाव अभियान के दौरान कुछ लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया है। हालिया अभियान में
हाइड्रोपावर सुरंग से दो नेपाली कर्मचारियों और बाद में एक चीनी नागरिक को भी जिंदा बचाया गया।
आखिर इतनी बड़ी आपदा कैसे आई?
प्रारंभिक रिपोर्टों में इस आपदा को हिमालयी क्षेत्र में हुए
बर्फ और चट्टान के बड़े खिसकाव से जोड़कर देखा गया है।
इसके बाद मलबे और पानी के तेज बहाव ने नदियों के आसपास के इलाकों में तबाही मचा दी।
हालांकि ऐसी घटनाओं के सटीक कारणों और आपदा की पूरी श्रृंखला को समझने के लिए वैज्ञानिक और
प्रशासनिक स्तर पर आकलन जारी है। इसलिए किसी एक कारण को अंतिम कारण मानना जल्दबाजी होगी।
बचाव अभियान में अभी भी उम्मीद कायम
इतने बड़े हादसे के बावजूद बचाव टीमों को कुछ लोगों के जिंदा मिलने से उम्मीद मिली है।
नेपाल में बाढ़ के बाद सुरंग में फंसे लोगों को कई दिनों के बाद बाहर निकाला गया।
बचाव विशेषज्ञों के लिए यह अभियान बेहद कठिन रहा है क्योंकि सुरंगों में पानी,
मलबा और चट्टानों के कारण रास्ते बंद हो गए थे। इसके बावजूद लगातार प्रयास जारी हैं।
चीन में सूचना को लेकर भी सवाल
आपदा के बाद चीन के तिब्बत क्षेत्र में मीडिया की पहुंच और सूचनाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्र से स्वतंत्र जानकारी और
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं सीमित रूप से सामने आ रही हैं।
इसी वजह से आपदा के शुरुआती दिनों में चीन की ओर से नुकसान और
हताहतों के आंकड़ों को लेकर काफी इंतजार करना पड़ा।
नेपाल-चीन सीमा की अहमियत
गिरोंग सीमा क्षेत्र नेपाल और चीन के बीच व्यापार तथा आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है।
यहां स्थित सीमा मार्ग और ढांचा दोनों देशों के बीच संपर्क में अहम भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में बाढ़ और भूस्खलन से सड़क, पुल, सीमा चौकी और अन्य ढांचे को हुआ नुकसान केवल
स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर सीमा पार व्यापार और लोगों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है।
आगे भी भूस्खलन का खतरा
आपदा के बाद सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रभावित पहाड़ी इलाकों में
भूस्खलन का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
G-216 हाईवे के आसपास दर्जनों संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है।
ऐसे में बचाव दलों के लिए मलबे में तलाश अभियान चलाना जोखिम भरा बना हुआ है।
निष्कर्ष
Nepal China Border Flood ने हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की
भयावहता को एक बार फिर सामने ला दिया है। चीन ने अब तक 31 मौतों और
531 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। गिरोंग के इमिग्रेशन और कस्टम
परिसर को भारी नुकसान हुआ है और बचाव दल लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं।
नेपाल में भी इस आपदा का असर बेहद विनाशकारी रहा है। हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं और
बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित लोगों के
पुनर्वास और सीमा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना बड़ी चुनौती होगी।
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