रूस-यूक्रेन युद्ध
मॉस्को/कीव। रूस और यूक्रेन के बीच करीब साढ़े चार साल से जारी युद्ध में हमलों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब यूक्रेन ने रूस के काफी अंदर स्थित तातारस्तान क्षेत्र के निजनेकाम्स्क शहर में बड़ा ड्रोन हमला किया है। रूसी अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है, जबकि 39 लोग घायल हुए हैं। बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 13 तक पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
इस हमले की खास बात यह है कि निजनेकाम्स्क यूक्रेन की सीमा से करीब 1,200 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान हैं। हमले के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि यूक्रेन की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता रूस के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
तातारस्तान के निजनेकाम्स्क में बड़ा ड्रोन हमला
रूसी क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार सोमवार को निजनेकाम्स्क में औद्योगिक और नागरिक इलाकों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया गया। हमले के बाद इलाके में नुकसान और जनहानि की जानकारी सामने आई।
रिपोर्टों के मुताबिक इस हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए। बाद में कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने मृतकों की संख्या 13 बताई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल बताया गया है। इसलिए अलग-अलग समय पर जारी आधिकारिक अपडेट में आंकड़ों में अंतर दिखाई दे रहा है।
यह हमला रूस में यूक्रेन की ओर से किए गए सबसे घातक लंबी दूरी के हमलों में से एक माना जा रहा है।
यूक्रेन की सीमा से 1200 किलोमीटर दूर है शहर
निजनेकाम्स्क रूस के तातारस्तान क्षेत्र में स्थित है और यूक्रेन की सीमा से लगभग 1,200 किलोमीटर की दूरी पर है। इतने दूर तक ड्रोन हमला पहुंचना युद्ध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है।
यह इलाका रूस के ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां तेल शोधन केंद्रों और पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़े बड़े प्रतिष्ठान मौजूद हैं। इसी कारण इस क्षेत्र में होने वाला कोई भी हमला केवल स्थानीय स्तर की घटना नहीं माना जाता, बल्कि इसका असर रूस की ऊर्जा व्यवस्था और सैन्य आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
तेल रिफाइनरी भी बनी निशाना
हमले में निजनेकाम्स्क के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। शहर में TANECO तेल रिफाइनरी समेत प्रमुख औद्योगिक ढांचा मौजूद है।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक हमले के दौरान रिफाइनरी क्षेत्र में आग लगने की सूचना सामने आई। यह संयंत्र रूस के महत्वपूर्ण तेल प्रसंस्करण केंद्रों में शामिल है।
यूक्रेन पिछले कुछ समय से रूस के तेल और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाता रहा है। इसका उद्देश्य रूस की ईंधन उत्पादन क्षमता और युद्ध से जुड़ी आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ाना बताया जाता है।
*यूक्रेन ने क्यों बढ़ाए रूस के अंदर हमले?
यूक्रेन की रणनीति में रूस के भीतर स्थित ऊर्जा और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाना अब महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। यूक्रेनी पक्ष का तर्क है कि रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करने के लिए उसके सैन्य और ऊर्जा ढांचे पर दबाव जरूरी है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि रूस के हमलों का जवाब दिया जाएगा और युद्ध का असर रूस के भीतर भी महसूस होना चाहिए। उनके मुताबिक युद्ध जारी रहने की प्रमुख वजह रूस का इसे समाप्त करने के लिए तैयार न होना है।
हालांकि रूस इन हमलों को अपने क्षेत्र पर गंभीर हमला मानता है और कई मामलों में इन्हें आतंकवादी कार्रवाई के रूप में वर्णित करता है। दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक नुकसान और हमले के प्रभाव का स्वतंत्र आकलन करना कई बार मुश्किल होता है।
रूस ने 456 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराने का दावा किया
इस बड़े हमले के बीच रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने 456 यूक्रेनी ड्रोन नष्ट या मार गिराए।
हालांकि रूसी मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कुल कितने ड्रोन अपने संभावित लक्ष्यों तक पहुंच पाए। तातारस्तान के अलावा रूस के दूसरे क्षेत्रों में भी ड्रोन गतिविधियों की सूचना सामने आई।
इससे पता चलता है कि यूक्रेन ने एक ही रात में रूस के अलग-अलग हिस्सों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन अभियान चलाया।
दोनों देशों ने बढ़ाए लंबी दूरी के हमले
रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में मुख्य लड़ाई सीमा और फ्रंटलाइन क्षेत्रों तक ज्यादा केंद्रित थी। लेकिन अब दोनों देशों ने लंबी दूरी के मिसाइल और ड्रोन हमलों को युद्ध की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया है।
संयुक्त राष्ट्र के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार इस साल दोनों पक्षों की ओर से लंबी दूरी के हमलों में बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर नागरिक आबादी पर भी पड़ा है।
यूक्रेन का कहना है कि वह रूसी सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है, जबकि रूस लगातार यूक्रेनी शहरों, ऊर्जा व्यवस्था और सैन्य ठिकानों पर हमले करता रहा है।
यूक्रेन में भी रूसी हमले में मौतें
रूस पर यूक्रेनी हमले के बीच यूक्रेन में भी रूसी हमलों की खबर सामने आई।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक खार्किव क्षेत्र के
चुहुइव जिले के बुगाइवका गांव में रूसी तोपखाने के हमले में पांच लोगों की मौत हुई।
अधिकारियों के अनुसार हमले में कई घरों को नुकसान पहुंचा।
इस तरह एक ही समय में दोनों देशों में हमलों और
नागरिकों के हताहत होने की खबरों ने युद्ध की गंभीरता को फिर उजागर किया।
बेलगोरोद और खेरसॉन में भी हमले
रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेनी हमले में एक महिला की मौत होने की जानकारी भी सामने आई है।
वहीं यूक्रेन के खेरसॉन क्षेत्र में एक टैक्सी पर रूसी ड्रोन हमले में एक व्यक्ति के मारे जाने की सूचना दी गई।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि युद्ध का प्रभाव केवल अग्रिम मोर्चे तक सीमित नहीं है। दोनों पक्षों के
ड्रोन और लंबी दूरी के हथियार अब काफी दूर स्थित इलाकों को भी प्रभावित कर रहे हैं।
रूस की ऊर्जा व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
रूस के तेल और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे यूक्रेनी हमलों का उद्देश्य
उसकी अर्थव्यवस्था और युद्ध से जुड़ी लॉजिस्टिक क्षमता पर दबाव बनाना माना जा रहा है।
रिफाइनरी पर हमला होने से केवल उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती, बल्कि ईंधन की उपलब्धता,
परिवहन व्यवस्था और औद्योगिक आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
हाल के महीनों में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की रणनीति यूक्रेन की लंबी दूरी की
सैन्य कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती दिखाई दे रही है।
रूस के लिए बढ़ी सुरक्षा चुनौती
निजनेकाम्स्क जैसे रूस के भीतर काफी दूर स्थित शहर पर हमला रूसी सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी चुनौती है।
यदि ड्रोन लगातार इतनी लंबी दूरी तय करके औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचते हैं तो
रूस को अपनी वायु रक्षा का दायरा और मजबूत करना पड़ सकता है।
रूस पहले से ही बड़ी संख्या में ड्रोन को मार गिराने का दावा करता रहा है।
लेकिन कुछ ड्रोन का लक्ष्य तक पहुंच जाना और
औद्योगिक क्षेत्र में नुकसान होना यह बताता है कि पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना आसान नहीं है।
युद्ध के खत्म होने की उम्मीदों के बीच बढ़े हमले
रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों की चर्चा लगातार होती रही है।
इसके बावजूद जमीन पर सैन्य गतिविधियां कम होने के बजाय कई क्षेत्रों में तेज दिखाई दे रही हैं।
यूक्रेन का कहना है कि रूस पर दबाव बढ़ाकर उसे बातचीत के लिए मजबूर किया जा सकता है।
दूसरी ओर रूस भी अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए है।
ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बढ़ते लंबी दूरी के हमले शांति वार्ता की राह को और मुश्किल बना सकते हैं।
क्या बदल रही है युद्ध की रणनीति?
इस हमले से यह संकेत मिलता है कि यूक्रेन अब रूस के काफी अंदर स्थित महत्वपूर्ण औद्योगिक और
ऊर्जा ठिकानों तक पहुंच बनाने की क्षमता का इस्तेमाल कर रहा है।
यूक्रेन की लंबी दूरी की ड्रोन क्षमता में बढ़ोतरी ने रूस के उन क्षेत्रों को भी
युद्ध के प्रभाव क्षेत्र में ला दिया है, जो पहले अग्रिम मोर्चे से काफी दूर माने जाते थे।
रूस के लिए चुनौती यह है कि उसे सीमा से लेकर देश के भीतर मौजूद
महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
आम लोगों पर बढ़ता असर
युद्ध की सबसे गंभीर कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है। रूस और यूक्रेन दोनों में ड्रोन,
मिसाइल और तोपखाने के हमलों के कारण नागरिकों की मौत और घायल होने की खबरें सामने आती रहती हैं।
निजनेकाम्स्क हमले में भी नागरिकों के हताहत होने की जानकारी सामने आई है।
इसी तरह यूक्रेन के खार्किव और दूसरे इलाकों में भी नागरिक प्रभावित हुए हैं।
युद्ध जितना लंबा खिंच रहा है, नागरिक इलाकों के लिए खतरा भी उतना ही बढ़ता जा रहा है।
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रूस इस हमले का जवाब किस तरह देता है।
यूक्रेन द्वारा रूस के भीतर लगातार बढ़ाए जा रहे ड्रोन हमलों के बाद रूसी सेना की
प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में संघर्ष की दिशा को प्रभावित कर सकती है।
अगर दोनों पक्ष लंबी दूरी के हमलों को और तेज करते हैं तो युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है।
इससे नागरिकों के साथ-साथ ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
वहीं दूसरी तरफ यदि कूटनीतिक प्रयासों को सफलता मिलती है तो
सैन्य तनाव को कम करने का रास्ता खुल सकता है।
निष्कर्ष
रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन ने रूस के भीतर करीब 1,200 किलोमीटर दूर स्थित तातारस्तान के
निजनेकाम्स्क शहर को बड़े ड्रोन हमले का निशाना बनाया। रूसी
अधिकारियों के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार कम से कम 12 लोगों की मौत और
39 लोग घायल हुए, जबकि बाद के अपडेट में मृतकों की संख्या 13 बताई गई।
हमले की गंभीरता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि निजनेकाम्स्क रूस के महत्वपूर्ण तेल और
पेट्रोकेमिकल केंद्रों में शामिल है। यहां स्थित ऊर्जा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की सूचना सामने आई है।
दूसरी तरफ रूस ने रातभर में 456 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है।
चार साल से अधिक समय से जारी इस युद्ध में लंबी दूरी के ड्रोन हमले अब संघर्ष की
दिशा और रणनीति को बदल रहे हैं। रूस के अंदर दूर तक यूक्रेनी हमलों और यूक्रेन के
शहरों पर रूसी हमलों के बीच फिलहाल तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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