पाकिस्तान के पूर्व रक्षा अधिकारी
भारत के मिसाइल कार्यक्रम पर पाकिस्तान की नई चिंता
भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और अत्याधुनिक मिसाइल कार्यक्रम एक बार फिर पाकिस्तान की चिंता का कारण बन गए हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण के सलाहकार और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मजहर जमील ने दावा किया है कि भारत का लंबी दूरी का मिसाइल विकास कार्यक्रम केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका लक्ष्य वैश्विक रणनीतिक शक्ति के रूप में उभरना है।
इस बयान के बाद दोनों देशों के सामरिक संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पाकिस्तान का मानना है कि भारत की बढ़ती मिसाइल क्षमता भविष्य में वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
मजहर जमील ने क्या कहा?
इस्लामाबाद में आयोजित एक रणनीतिक संगोष्ठी के दौरान मजहर जमील ने कहा कि भारत का सामरिक बल कार्यक्रम केवल पाकिस्तान या चीन को ध्यान में रखकर नहीं बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत अंतरमहाद्वीपीय क्षमता वाली मिसाइल प्रणालियों पर भी काम कर रहा है, जिनकी पहुंच पश्चिमी देशों की राजधानियों तक हो सकती है।
जमील के अनुसार भारत का उद्देश्य खुद को एक ऐसी वैश्विक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करना है, जिसकी रणनीतिक पहुंच दुनिया के बड़े देशों तक हो। उन्होंने पश्चिमी देशों से भी भारत के सैन्य आधुनिकीकरण पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की।
भारत की बढ़ती सामरिक ताकत
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों, बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली, अंतरिक्ष आधारित तकनीकों और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों के विकास पर लगातार काम किया जा रहा है। भारत पहले ही कई सफल मिसाइल परीक्षण कर चुका है और उसकी सामरिक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रक्षा नीति मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर आधारित है। हालांकि पड़ोसी देशों द्वारा इसे अलग नजरिए से देखा जाता है।
पाकिस्तान की रणनीतिक चिंता क्यों बढ़ी?
पाकिस्तान लंबे समय से भारत की सैन्य क्षमता को अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मानता रहा है। दोनों देशों के बीच कई युद्ध और सीमा तनाव हो चुके हैं। ऐसे में भारत के मिसाइल कार्यक्रम में हो रही
प्रगति पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बनना स्वाभाविक माना जा रहा है।
मजहर जमील ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि किसी प्रकार का सैन्य टकराव होता है तो
पाकिस्तान उसका “निर्णायक और व्यापक” जवाब देने की क्षमता रखता है। उन्होंने मई में हुए
भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान के संयम को एक सोची-समझी रणनीति बताया।
वैश्विक स्तर पर क्या हैं इसके मायने?
दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे संवेदनशील परमाणु क्षेत्रों में गिना जाता है।
भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ऐसे में किसी भी
प्रकार की मिसाइल प्रतिस्पर्धा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा सकती है।
हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रक्षा क्षमताओं का
विकास उसकी दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। वहीं पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयान क्षेत्रीय
शक्ति संतुलन और सामरिक प्रतिस्पर्धा को लेकर उसकी चिंताओं को दर्शाते हैं।
भारत के लंबी दूरी के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
यह दिखाती है कि दक्षिण एशिया में सामरिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
मजहर जमील के बयान ने एक बार फिर भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता को
अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय सुरक्षा और
रणनीतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए दोनों देश किस प्रकार की नीतियां अपनाते हैं।
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