Russia Ukraine War
Russia Ukraine War: दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्ध और सैन्य टकराव अब एक-दूसरे से जुड़ते नजर आ रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में हालिया हमलों ने यूरोप की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है, वहीं अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ते सैन्य तनाव ने मध्य पूर्व को भी अस्थिर कर दिया है। इन घटनाओं के बीच NATO, अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक तनाव पर पूरी दुनिया की नजर है।
ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अलग-अलग मोर्चों पर बढ़ता तनाव किसी बड़े वैश्विक संघर्ष का रूप ले सकता है? फिलहाल तीसरे विश्व युद्ध की कोई आधिकारिक घोषणा या निश्चित संकेत नहीं है, लेकिन कई संघर्षों का एक साथ तेज होना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती जरूर है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में फिर बढ़ी गर्मी
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लंबे समय से जारी है, लेकिन हाल के दिनों में रूसी हमलों की तीव्रता बढ़ने की खबरें सामने आई हैं।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक रूस ने यूक्रेन के कई हिस्सों में ड्रोन और मिसाइल हमले तेज किए हैं। 4 सितंबर को कीव में यूक्रेन की सुरक्षा सेवा यानी SBU के मुख्यालय के पास भी हमला हुआ, जिसमें कई लोग घायल हुए। यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी प्रतिनिधियों की यूक्रेन यात्रा की तैयारियां चल रही थीं।
इससे यह आशंका बढ़ी है कि आने वाले समय में रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य टकराव और तेज हो सकता है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष ने मध्य पूर्व को फिर झकझोरा
दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव कम होने के बजाय फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
5 सितंबर को ईरान के महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिकी मिसाइल हमले की खबर सामने आई। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ने चार मिसाइलों से हमले का दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी, लेकिन घटना की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि तत्काल नहीं हुई थी।
खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर केवल ईरान-अमेरिका संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
पुतिन का ईरान को समर्थन, अमेरिका की बढ़ी चिंता
रूस और ईरान के संबंध भी इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बनाते हैं।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक में ईरान को समर्थन जारी रखने की बात कही। रिपोर्टों के अनुसार रूस ने ईरान को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी रूस-ईरान संबंधों पर भी नजर रख रहे हैं।
रूस पहले से यूक्रेन में युद्ध लड़ रहा है और ईरान अमेरिका के साथ संघर्ष में है। ऐसे में दोनों देशों का रणनीतिक सहयोग वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
NATO के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
रूस और NATO के बीच सीधे युद्ध की स्थिति अभी नहीं है, लेकिन दोनों के बीच तनाव बेहद गंभीर है।
NATO रूस को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष खतरे के रूप में देखता है और साथ ही यह भी कहता है कि वह रूस के साथ संघर्ष बढ़ाना नहीं चाहता। NATO ने संचार के रास्ते खुले रखने को भी जोखिम कम करने के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
यही बिंदु बेहद अहम है। क्योंकि अगर रूस और किसी NATO सदस्य देश के बीच सीधा सैन्य टकराव होता है, तो मामला केवल रूस-यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा।
अमेरिका एक साथ कई मोर्चों पर दबाव में
अमेरिका के सामने भी इस समय एक जटिल रणनीतिक स्थिति है।
एक तरफ वह यूरोप में यूक्रेन की सुरक्षा और रूस की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख रहा है, दूसरी तरफ मध्य पूर्व में ईरान के साथ संघर्ष जारी है।
विश्लेषकों के अनुसार यूक्रेन और ईरान के युद्धों ने अमेरिका और रूस दोनों की सैन्य एवं राजनीतिक क्षमता पर दबाव बढ़ाया है। दोनों संघर्षों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि बड़ी शक्तियां एक साथ कई क्षेत्रों में अपने प्रभाव को कितनी देर तक बनाए रख सकती हैं।
क्या चीन भी इस समीकरण का हिस्सा बन रहा है?
इस पूरे शक्ति संघर्ष में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
रूस और ईरान दोनों के चीन के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में पश्चिमी देशों के दबाव के बीच मॉस्को और तेहरान का बीजिंग की ओर झुकाव वैश्विक राजनीति को और बहुध्रुवीय बना सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि चीन सीधे युद्ध में शामिल हो रहा है, लेकिन बदलते गठजोड़ अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को जरूर प्रभावित कर रहे हैं।
तीसरे विश्व युद्ध की चर्चा क्यों तेज हुई?
जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ सैन्य संघर्ष बढ़ता है तो स्वाभाविक रूप से “World War 3” की चर्चा तेज हो जाती है।
इस समय तीन परिस्थितियां खास तौर पर चिंता बढ़ा रही हैं—
- रूस-यूक्रेन युद्ध का लगातार जारी रहना।
- अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा सैन्य तनाव बढ़ना।
- रूस, ईरान, अमेरिका और NATO के बीच बढ़ता रणनीतिक टकराव।
हालांकि, इन घटनाओं को सीधे तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कहना अभी जल्दबाजी होगी। दुनिया की बड़ी शक्तियों के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य यही रहता है कि संघर्ष को प्रत्यक्ष महाशक्ति युद्ध में बदलने से रोका जाए।
रूस-NATO सीधी भिड़ंत सबसे बड़ा खतरा
अगर रूस और NATO के किसी सदस्य देश के बीच सीधा
सैन्य टकराव होता है तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
NATO की सामूहिक रक्षा व्यवस्था के कारण किसी सदस्य पर बड़े हमले की स्थिति में गठबंधन के दूसरे देशों की
भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी वजह से रूस और NATO के बीच किसी भी गलतफहमी या
सैन्य घटना को नियंत्रित करना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बड़ी प्राथमिकता है।
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया टिप्पणी में कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि
पुतिन NATO क्षेत्र पर हमला करना चाहते हैं।
शांति वार्ता की कोशिशें भी जारी
तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए
अपने प्रतिनिधियों को सक्रिय किया है। अमेरिकी प्रतिनिधियों की रूस और यूक्रेन से बातचीत की कोशिशों के बीच
युद्ध के मैदान पर हमलों का जारी रहना स्थिति की जटिलता को दिखाता है।
यानी एक तरफ बातचीत की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ सैन्य दबाव भी जारी है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
इन युद्धों का प्रभाव केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने से तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।
वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध का असर ऊर्जा, खाद्य और वैश्विक व्यापार पर पहले से पड़ चुका है।
अगर दोनों क्षेत्रों में संघर्ष और बढ़ता है तो तेल की कीमत, समुद्री व्यापार, बीमा लागत,
आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल
आज दुनिया की चिंता केवल यह नहीं है कि रूस यूक्रेन में क्या करेगा या
अमेरिका और ईरान के बीच अगला कदम क्या होगा।
बड़ा सवाल यह है कि क्या ये अलग-अलग संघर्ष किसी समय
एक-दूसरे से जुड़कर बड़े वैश्विक टकराव में बदल सकते हैं?
फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-ईरान संघर्ष,
NATO की सुरक्षा चिंताएं और बदलते अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ मिलकर दुनिया के सामने
एक बेहद संवेदनशील भू-राजनीतिक स्थिति जरूर पैदा कर रहे हैं।
निष्कर्ष
Russia Ukraine War और US Iran Conflict के बीच दुनिया इस समय
कई सुरक्षा संकटों का सामना कर रही है। यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध की तीव्रता और
मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान टकराव ने वैश्विक तनाव को बढ़ाया है।
फिर भी तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो चुकी है, ऐसा कहना अभी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या बड़ी शक्तियां अपने
मतभेदों और सैन्य गतिविधियों को नियंत्रित कर कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ती हैं।
आने वाले दिनों में रूस, यूक्रेन, अमेरिका, ईरान और NATO से जुड़े फैसले वैश्विक
सुरक्षा की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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